Siswa Assembly Caste Equations महाराजगंज जिले की सिसवा विधानसभा सीट की ऐसी सामाजिक तस्वीर पेश करते हैं, जहां ब्राह्मण, कुर्मी, पटनवार, अनुसूचित जाति, मुस्लिम, यादव और दूसरे पिछड़े समुदायों की मजबूत मौजूदगी है। पुराने चुनावी अनुमानों में ब्राह्मण सबसे बड़े अलग सामाजिक समूहों में दिखाई देते हैं, जबकि कुर्मी और पटनवार मतदाता भी बड़ी संख्या में बताए गए हैं। यही बहुस्तरीय सामाजिक संरचना सिसवा के जातिगत समीकरण को दिलचस्प बनाती है।
2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार सिसवा विधानसभा में 3,64,498 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1,97,682 पुरुष, 1,66,810 महिला और 6 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। पुरानी मतदाता सूची के मुकाबले SIR के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 35,304 मतदाताओं की नेट कमी दर्ज की गई।
सिसवा विधानसभा संख्या 317 है और यह महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रेम सागर पटेल ने 1,27,673 वोट हासिल कर सीट जीती थी। समाजवादी पार्टी के सुशील कुमार टिबड़ेवाल दूसरे स्थान पर रहे और जीत का अंतर 62,731 वोट रहा।
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।
महाराजगंज जिले के सिसवा विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।
सिसवा विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | सिसवा |
| विधानसभा संख्या | 317 |
| जिला | महाराजगंज |
| लोकसभा क्षेत्र | महाराजगंज |
| आरक्षण | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | प्रेम सागर पटेल |
| वर्तमान विधायक की पार्टी | भाजपा |
| 2026 कुल मतदाता | 3,64,498 |
| पुरुष मतदाता | 1,97,682 |
| महिला मतदाता | 1,66,810 |
| थर्ड जेंडर मतदाता | 6 |
| 2022 विजेता | प्रेम सागर पटेल |
| 2022 विजेता के वोट | 1,27,673 |
| 2022 उपविजेता | सुशील कुमार टिबड़ेवाल |
| 2022 जीत का अंतर | 62,731 वोट |
| प्रमुख सामाजिक समूह | ब्राह्मण, कुर्मी, पटनवार, दलित, मुस्लिम, यादव व अन्य OBC |
Siswa Assembly Caste Equations: ब्राह्मण, कुर्मी और पटनवार बड़ा सामाजिक आधार
Siswa Assembly Caste Equations में पुराने चुनावी आकलनों के अनुसार ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 90 हजार बताई गई थी। कुर्मी मतदाता करीब 70 हजार और पटनवार समुदाय भी करीब 70 हजार के आसपास बताया गया था। इसके अलावा दलित मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार, मुस्लिम करीब 40 हजार और यादव करीब 20 हजार बताई गई थी।
ये आंकड़े पुराने चुनावी सामाजिक अनुमान हैं, 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं। निर्वाचन संबंधी आधिकारिक मतदाता सूची में विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं की संख्या उपलब्ध होती है, लेकिन जाति के आधार पर मौजूदा वोटरों का आधिकारिक विभाजन प्रकाशित नहीं किया जाता। इसलिए पुराने जातिगत आंकड़ों को 2027 के लिए बिल्कुल सटीक संख्या मानने के बजाय सामाजिक प्रभाव का संकेत समझना चाहिए।
सिसवा विधानसभा का संकेतात्मक जातिगत समीकरण
| जाति/समुदाय | पुराने चुनावी अनुमान | चुनावी सामाजिक स्थिति |
|---|---|---|
| ब्राह्मण | करीब 90 हजार | सबसे बड़े पुराने अनुमान वाले समूहों में |
| कुर्मी | करीब 70 हजार | मजबूत OBC आधार |
| पटनवार | करीब 70 हजार | क्षेत्र का महत्वपूर्ण सामाजिक समूह |
| दलित | करीब 60 हजार | बड़ा सामाजिक वोट आधार |
| मुस्लिम | करीब 40 हजार | कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मौजूदगी |
| यादव | करीब 20 हजार | महत्वपूर्ण OBC समूह |
| अन्य समुदाय | करीब 20 हजार का पुराना वर्गीकरण | स्थानीय क्षेत्रों में अलग-अलग प्रभाव |
| 2026 कुल आधिकारिक मतदाता | 3,64,498 | SIR अंतिम मतदाता सूची |
पुराने जातिगत अनुमानों का कुल योग मौजूदा 2026 मतदाता सूची से मिलना जरूरी नहीं है। समय के साथ नए मतदाताओं का जुड़ना, नाम हटना, स्थानांतरण, मृत्यु और SIR जैसी पुनरीक्षण प्रक्रिया से कुल वोटर बेस बदलता है। इसी कारण 2022 के आसपास के जातिगत अनुमानों और 2026 की आधिकारिक मतदाता संख्या को अलग-अलग संदर्भ में देखना चाहिए।
ब्राह्मण वोट सिसवा के जातिगत समीकरण में क्यों अहम?
सिसवा के पुराने जातिगत समीकरण में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 90 हजार बताई गई थी। इस अनुमान के आधार पर ब्राह्मण समाज विधानसभा क्षेत्र के बड़े अलग सामाजिक समूहों में शामिल रहा है।
सिसवा के चुनावी इतिहास में स्थानीय राजनीतिक परिवारों और प्रभावशाली नेताओं की भूमिका भी रही है। पुराने चुनावों में प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय नेटवर्क कई बार पार्टी समीकरण के साथ जुड़े दिखाई देते हैं।
हालांकि किसी एक समुदाय के पुराने आकार को सीधे चुनाव परिणाम से जोड़ना सही नहीं होगा। 2022 में विजेता उम्मीदवार को 1.27 लाख से अधिक वोट मिले, जो किसी एक जातिगत समूह के पुराने अनुमान से काफी अधिक हैं। इसका अर्थ है कि चुनावी समर्थन कई सामाजिक समूहों में फैला हुआ था।
कुर्मी और पटनवार वोट का बड़ा आधार
सिसवा विधानसभा के जातिगत समीकरण में कुर्मी और पटनवार समुदाय विशेष महत्व रखते हैं। पुराने आकलन में दोनों समुदायों की संख्या अलग-अलग करीब 70-70 हजार बताई गई थी।
अगर इन पुराने अनुमानों को सामाजिक प्रभाव के संकेत के रूप में देखें तो सिसवा में गैर-यादव OBC मतदाताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण दिखाई देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन समुदायों की मौजूदगी चुनावी अभियान, प्रत्याशी चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण की चर्चा में लगातार बनी रहती है।
कुर्मी और पटनवार मतदाताओं को एक ही राजनीतिक समूह मानना भी उचित नहीं होगा। उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, गांव-स्तरीय संबंध और राजनीतिक दलों के संगठन के आधार पर मतदान व्यवहार अलग हो सकता है।
दलित मतदाता भी सिसवा में बड़ा सामाजिक आधार
पुराने चुनावी अनुमान में सिसवा विधानसभा के दलित मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार बताई गई थी। इस आधार पर अनुसूचित जाति के मतदाता सीट के बड़े सामाजिक समूहों में शामिल हैं।
सिसवा सामान्य विधानसभा सीट है, लेकिन अनुसूचित जाति के मतदाताओं की मजबूत मौजूदगी के कारण अलग-अलग दल इस वर्ग के समर्थन को अपने व्यापक सामाजिक गठजोड़ का हिस्सा बनाने की कोशिश करते रहे हैं।
2027 के संदर्भ में दलित मतदाताओं का वास्तविक मतदान व्यवहार प्रत्याशियों, गठबंधन और स्थानीय मुद्दों पर निर्भर करेगा। पिछले चुनावों के सामाजिक अनुमानों से भविष्य के मतदान की निश्चित दिशा तय नहीं की जा सकती।
मुस्लिम वोट सिसवा के चुनावी गणित का महत्वपूर्ण हिस्सा
सिसवा विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या पुराने चुनावी आकलन में करीब 40 हजार बताई गई थी।
संख्या के लिहाज से यह ब्राह्मण, कुर्मी, पटनवार और दलित के पुराने अनुमानों से कम है, लेकिन बहुकोणीय मुकाबले में 40 हजार के आसपास का सामाजिक वोट आधार चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो सकता है।
यह भी जरूरी है कि मुस्लिम मतदाताओं को एकसमान वोटिंग ब्लॉक न माना जाए। प्रत्याशी, स्थानीय परिस्थितियां और चुनाव के समय राजनीतिक विकल्प मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
यादव मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम, लेकिन भूमिका बनी रहती है
सिसवा विधानसभा में यादव मतदाताओं की संख्या पुराने चुनावी अनुमान के अनुसार करीब 20 हजार बताई गई थी।
यह संख्या ब्राह्मण, कुर्मी, पटनवार, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के पुराने अनुमान से कम है। फिर भी कई सीटों की तरह यहां भी यादव मतों को व्यापक OBC और राजनीतिक गठजोड़ के संदर्भ में देखा जाता है।
सिसवा का सामाजिक गणित केवल बड़े समूहों की संख्या से तय नहीं होता। छोटे सामाजिक समूहों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले समुदायों के वोट भी कुल अंतर में योगदान देते हैं।
सिसवा वोटर लिस्ट 2026: कुल 3,64,498 मतदाता
10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित SIR की अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक सिसवा में कुल 3,64,498 मतदाता हैं। इनमें 1,97,682 पुरुष और 1,66,810 महिला मतदाता हैं। थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 6 है।
सिसवा विधानसभा वोटर लिस्ट 2026
| मतदाता वर्ग | मतदाता संख्या |
|---|---|
| पुरुष | 1,97,682 |
| महिला | 1,66,810 |
| थर्ड जेंडर | 6 |
| कुल मतदाता | 3,64,498 |
SIR के बाद सिसवा की मतदाता सूची में करीब 35,304 मतदाताओं की नेट कमी दर्ज की गई। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी विशेष जाति के इतने मतदाता कम हुए हैं। उपलब्ध SIR आंकड़ा कुल मतदाताओं में बदलाव बताता है, जाति-वार बदलाव नहीं।
इसलिए पुराने जातिगत अनुमानों को एक समान अनुपात में घटाकर 2026 की नई जाति-वार संख्या निकालना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
2022 की तुलना में बदला मतदाता आधार
2022 के आसपास प्रकाशित विधानसभा प्रोफाइल में सिसवा के कुल मतदाताओं की संख्या करीब 3,70,411 बताई गई थी, जिसमें लगभग 1,98,732 पुरुष और 1,71,668 महिला मतदाता शामिल थे।
2026 की अंतिम SIR सूची में यह संख्या 3,64,498 है। हालांकि अलग-अलग वर्षों की मतदाता सूचियों और संशोधन चरणों की तुलना करते समय कटऑफ डेट और पुनरीक्षण प्रक्रिया का अंतर ध्यान में रखना जरूरी है।
| मतदाता विवरण | पुराना विधानसभा प्रोफाइल | SIR 2026 अंतिम सूची |
|---|---|---|
| पुरुष | 1,98,732 | 1,97,682 |
| महिला | 1,71,668 | 1,66,810 |
| थर्ड जेंडर | अलग से स्पष्ट नहीं | 6 |
| कुल | करीब 3,70,411 | 3,64,498 |
2027 विधानसभा चुनाव से पहले निरंतर पुनरीक्षण के कारण कुल मतदाता संख्या में आगे भी बदलाव हो सकता है।
2022 में प्रेम सागर पटेल को मिले थे 1.27 लाख से अधिक वोट
2022 के विधानसभा चुनाव में सिसवा सीट पर भाजपा के प्रेम सागर पटेल ने 1,27,673 वोट हासिल किए। उनका वोट शेयर करीब 50.4 प्रतिशत था। समाजवादी पार्टी के सुशील कुमार टिबड़ेवाल को करीब 64,942 वोट मिले और दोनों प्रत्याशियों के बीच 62,731 वोट का अंतर रहा।
बसपा उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह को 33,498 वोट मिले। इस तरह मुख्य मुकाबले के बाहर तीसरे स्थान के उम्मीदवार को भी 33 हजार से अधिक वोट मिले थे।
सिसवा विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | स्थिति |
|---|---|---|---|
| प्रेम सागर पटेल | भाजपा | 1,27,673 | विजेता |
| सुशील कुमार टिबड़ेवाल | समाजवादी पार्टी | करीब 64,942 | उपविजेता |
| धीरेंद्र प्रताप सिंह | बसपा | 33,498 | तीसरा स्थान |
| जीत का अंतर | — | 62,731 | — |
2022 का परिणाम बताता है कि विजेता उम्मीदवार को सीट के कई सामाजिक समूहों का समर्थन मिला होगा। किसी एक जाति के पुराने अनुमान से 1.27 लाख से अधिक वोट का आंकड़ा नहीं बनता। इसलिए चुनाव परिणाम को किसी एक जातिगत समूह से जोड़कर देखना सिसवा की सामाजिक संरचना को अधूरा दिखाएगा।
2017 में भी प्रेम सागर पटेल ने जीती थी सीट
2017 के विधानसभा चुनाव में भी प्रेम सागर पटेल ने भाजपा के टिकट पर सिसवा सीट जीती थी। उन्हें 1,22,884 वोट मिले थे और जीत का अंतर 68,186 वोट रहा था।
2022 में उनका वोट बढ़कर 1,27,673 हो गया, हालांकि जीत का अंतर घटकर 62,731 रहा।
2017 और 2022 का चुनावी प्रदर्शन
| चुनाव वर्ष | विजेता | पार्टी | विजेता के वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2017 | प्रेम सागर पटेल | भाजपा | 1,22,884 | 68,186 |
| 2022 | प्रेम सागर पटेल | भाजपा | 1,27,673 | 62,731 |
दो चुनावों के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आता है कि 2017 और 2022 दोनों में भाजपा प्रत्याशी प्रेम सागर पटेल ने सीट जीती। इसे 2027 के परिणाम की भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि अगला चुनाव नई मतदाता सूची, उम्मीदवारों और उस समय के राजनीतिक माहौल में होगा।
सिसवा की राजनीति में स्थानीय परिवारों का भी रहा प्रभाव
सिसवा विधानसभा का राजनीतिक इतिहास केवल हाल के दो चुनावों तक सीमित नहीं है। पुराने चुनावी विवरण में सिसवा स्टेट परिवार के सदस्यों के इस सीट से कई बार विधानसभा पहुंचने का उल्लेख मिलता है। एक पुराने चुनावी प्रोफाइल के अनुसार इस परिवार से जुड़े सदस्य 11 बार यहां चुनाव जीत चुके हैं।
यह इतिहास बताता है कि सिसवा में राजनीतिक दल के साथ प्रत्याशी की स्थानीय पहचान और क्षेत्रीय नेटवर्क भी चुनावी राजनीति का हिस्सा रहे हैं।
हालांकि हाल के चुनावों में पार्टी आधारित प्रतिस्पर्धा और सामाजिक गठजोड़ की भूमिका भी स्पष्ट दिखाई देती है।
सिसवा विधानसभा के प्रमुख स्थानीय मुद्दे
सिसवा में जातिगत समीकरण के साथ क्षेत्रीय मुद्दे भी चुनावी चर्चा का हिस्सा रहे हैं। पुराने चुनावी प्रोफाइल में सड़क, बिजली, पानी, बंद चीनी मिल और गन्ना मूल्य भुगतान को प्रमुख स्थानीय मुद्दों में गिना गया था।
सिसवा और आसपास का बड़ा हिस्सा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए गन्ना किसानों से जुड़े प्रश्न, सिंचाई व्यवस्था, नहरें, ग्रामीण सड़कें और स्थानीय रोजगार जैसे विषय विभिन्न चुनावों में मतदाताओं के सामने रहे हैं।
इन मुद्दों का प्रभाव अलग-अलग सामाजिक समूहों पर अलग तरीके से पड़ सकता है। यही कारण है कि जातिगत समीकरण के साथ विकास और स्थानीय मुद्दों को भी चुनावी विश्लेषण में शामिल करना जरूरी है।
ब्राह्मण-कुर्मी-पटनवार समीकरण कैसे बनाता है सिसवा को अलग?
सिसवा के पुराने जातिगत आंकड़ों की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यहां तीन बड़े सामाजिक समूह—ब्राह्मण, कुर्मी और पटनवार—कुल सामाजिक गणित में प्रमुख दिखाई देते हैं।
पुराने अनुमानों में ब्राह्मण करीब 90 हजार और कुर्मी तथा पटनवार करीब 70-70 हजार बताए गए थे। इनके साथ करीब 60 हजार दलित और 40 हजार मुस्लिम मतदाताओं का पुराना अनुमान सिसवा को एक बहुस्तरीय सामाजिक सीट बनाता है।
ऐसी संरचना में किसी एक समुदाय का समर्थन पर्याप्त मान लेना सही नहीं होगा। प्रत्याशी को अलग-अलग सामाजिक समूहों से समर्थन मिलने पर ही बड़ा वोट आधार बनता दिखाई देता है। 2022 के 1,27,673 विजेता वोट इसी व्यापक संदर्भ में देखे जाने चाहिए।
SIR 2026 के बाद सिसवा का नया चुनावी आधार
2026 में SIR के बाद सिसवा में कुल मतदाता संख्या 3,64,498 है। यह संख्या 2027 के चुनावी विश्लेषण के लिए पुराने वोटर डेटा की तुलना में अधिक प्रासंगिक आधार देती है।
लेकिन नई मतदाता संख्या उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि पुरानी जाति-वार संख्याओं को उसी अनुपात में अपडेट किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कुल मतदाता घटे हैं तो यह मान लेना सही नहीं होगा कि ब्राह्मण, कुर्मी, मुस्लिम, दलित या दूसरे सभी समुदायों के वोट समान अनुपात में घटे हैं।
इसलिए सिसवा विधानसभा के जातिगत समीकरण में 3.64 लाख का 2026 आधिकारिक वोटर बेस और पुराने जातिगत अनुमान दो अलग डेटा सेट के रूप में देखे जाने चाहिए।
2027 में सिसवा के जातिगत समीकरण की प्रमुख धुरियां
2027 के संदर्भ में सिसवा विधानसभा का सामाजिक गणित कई स्तरों पर बनता है। पुराने अनुमानों के आधार पर ब्राह्मण मतदाता बड़े समूहों में हैं। कुर्मी और पटनवार समुदायों का मजबूत आधार है। अनुसूचित जाति के मतदाता भी बड़ी संख्या में बताए गए हैं। मुस्लिम और यादव मतदाता इसके बाद महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में सामने आते हैं।
| चुनावी पहलू | सिसवा में स्थिति |
|---|---|
| ब्राह्मण सामाजिक आधार | पुराने अनुमानों में सबसे बड़े समूहों में |
| गैर-यादव OBC | कुर्मी और पटनवार की मजबूत मौजूदगी |
| अनुसूचित जाति | बड़ा मतदाता आधार |
| मुस्लिम मतदाता | उल्लेखनीय सामाजिक समूह |
| यादव मतदाता | अपेक्षाकृत छोटा लेकिन महत्वपूर्ण OBC समूह |
| 2026 नया वोटर बेस | 3,64,498 |
| स्थानीय मुद्दे | सड़क, बिजली, पानी, गन्ना, चीनी मिल, रोजगार |
| चुनावी इतिहास | उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ भी महत्वपूर्ण |
यह सामाजिक ढांचा किसी पार्टी या प्रत्याशी के पक्ष में स्वतः परिणाम तय नहीं करता। अंतिम मतदान उम्मीदवारों, दलों, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों, प्रचार और मतदान प्रतिशत सहित कई कारकों से प्रभावित होगा।
2022 का वोट और जातिगत समीकरण क्या बताते हैं?
2022 में भाजपा उम्मीदवार को करीब 50.4 प्रतिशत वोट मिले और जीत का अंतर 62,731 रहा।
यह परिणाम एक तथ्य स्पष्ट करता है—सिसवा में जीत के लिए किसी एक जातिगत समूह के पुराने अनुमान से बड़ा वोट आधार बना था। ब्राह्मण के पुराने 90 हजार या कुर्मी-पटनवार के अलग-अलग 70 हजार के अनुमान की तुलना में 1.27 लाख से अधिक विजेता वोट व्यापक सामाजिक समर्थन की ओर संकेत करते हैं।
लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वही सामाजिक गठजोड़ 2027 में भी उसी रूप में रहेगा। नई मतदाता सूची, संभावित उम्मीदवार और चुनाव के समय के मुद्दे मतदान व्यवहार बदल सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण और UP Elections 2027
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और प्रत्येक सीट का जातिगत समीकरण स्थानीय सामाजिक संरचना के अनुसार अलग है। कहीं यादव, कुर्मी और मुस्लिम मतदाता प्रमुख हैं तो कहीं ब्राह्मण, ठाकुर, जाट, गुर्जर, लोधी, मौर्य-कुशवाहा, निषाद, दलित और दूसरे समुदाय चुनावी सामाजिक गणित में बड़ी भूमिका रखते हैं।
उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण और UP Elections 2027 से जुड़े सीटवार सामाजिक आंकड़े, चुनावी समीकरण और अपडेट के लिए X पर @CasteEquations — https://x.com/CasteEquations को फॉलो किया जा सकता है।
सिसवा का चुनावी गणित: बड़े सामाजिक समूहों वाली सीट
सिसवा विधानसभा के जातिगत समीकरण में ब्राह्मण, कुर्मी, पटनवार और दलित चार बड़े पुराने सामाजिक आधार दिखाई देते हैं। पुराने अनुमानों में ब्राह्मण करीब 90 हजार, कुर्मी 70 हजार, पटनवार 70 हजार, दलित 60 हजार, मुस्लिम 40 हजार और यादव करीब 20 हजार बताए गए थे। ये आंकड़े मौजूदा आधिकारिक जाति-वार वोटर संख्या नहीं हैं।
2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार सीट पर 3,64,498 मतदाता हैं। 2022 में प्रेम सागर पटेल को 1,27,673 वोट मिले थे और जीत का अंतर 62,731 वोट रहा था।
इसलिए 2027 में सिसवा का चुनावी गणित केवल जातिगत संख्या से नहीं समझा जा सकता। सामाजिक गठजोड़, प्रत्याशी की स्थानीय स्वीकार्यता, दलों की रणनीति, ग्रामीण और किसान मुद्दे, मतदान प्रतिशत तथा 2026 के बाद अपडेट होने वाली मतदाता सूची—इन सभी को साथ रखकर ही सीट की राजनीतिक तस्वीर समझी जा सकती है।
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