राजस्थान के उत्तरी छोर पर स्थित ऐतिहासिक और समृद्ध शहर श्रीगंगानगर ने अपनी स्थापना के 100 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस शताब्दी वर्ष (Centenary Celebration) के ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए शहर भर में अभूतपूर्व उत्साह और जश्न का माहौल देखा जा रहा है। जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों द्वारा आयोजित भव्य 'श्रीगंगानगर मैराथन' में एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया और प्रेरणा से भर दिया। मैराथन की 21 किलोमीटर की हाफ-मैराथन श्रेणी में जब 75 साल के एक बुजुर्ग ने नौजवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ लगाना शुरू किया, तो वहां मौजूद हर शख्स बस देखता ही रह गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका अटूट जज्बा, जोश और अद्भुत स्टेमिना देखकर दर्शकों और अन्य धावकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे मार्ग को गूंजा दिया। 100 साल के श्रीगंगानगर के इस शताब्दी समारोह में 75 वर्षीय बुजुर्ग की यह ऐतिहासिक दौड़ अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
महाराजा गंगा सिंह के सपनों का शहर श्रीगंगानगर: 100 साल के गौरवशाली इतिहास और विकास की गाथा
श्रीगंगानगर का इतिहास भारतीय स्थापत्य, दूरदर्शिता और अदम्य इच्छाशक्ति की एक मिसाल है। बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह जी के प्रयासों से गंगनहर (Gang Canal) के निर्माण के साथ ही इस रेगिस्तानी इलाके की तकदीर बदल गई थी और 26 अक्टूबर 1927 को इस आधुनिक शहर की नींव मजबूत हुई थी। कभी धूल भरी आंधियों और पानी के संकट के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र आज राजस्थान का 'अन्न कटोरा' (Food Bowl of Rajasthan) कहलाता है। कृषि, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में श्रीगंगानगर ने पिछले 100 वर्षों में जो अभूतपूर्व प्रगति की है, उसका उत्सव आज पूरा शहर मिलकर मना रहा है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस मैराथन दौड़ ने शहर के समृद्ध इतिहास, जीवंत संस्कृति और यहाँ के लोगों के कभी न हार मानने वाले जज्बे को एक बार फिर दुनिया के सामने लाकर रख दिया है।
75 साल के बुजुर्ग की 21 किमी मैराथन दौड़: उम्र को मात देकर युवाओं के सामने पेश की नई मिसाल
मैराथन दौड़ की शुरुआत तड़के मुख्य खेल स्टेडियम से हुई, जहाँ हजारों की संख्या में बच्चे, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक एकत्र हुए थे। जैसे ही फ्लैग ऑफ हुआ, 21 किलोमीटर की कठिन श्रेणी में 75 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने बिना किसी झिझक के अपनी दौड़ शुरू की। पूरी दौड़ के दौरान उन्होंने अपनी सांसों और गति पर ऐसा नियंत्रण बनाए रखा कि उनके साथ दौड़ रहे युवा खिलाड़ी भी दंग रह गए। बिना रुके और बिना थके जब उन्होंने 21 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए फिनिशिंग लाइन पार की, तो आयोजकों और अधिकारियों ने उन्हें गले लगा लिया। बुजुर्ग धावक ने बातचीत के दौरान बताया कि नियमित दिनचर्या, योग, गंगनहर के शुद्ध वातावरण और सकारात्मक सोच के बल पर उन्होंने इस उम्र में भी खुद को पूरी तरह फिट रखा हुआ है। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि उम्र केवल एक संख्या है और यदि मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है।
पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल: रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां और मैराथन से गूंजा श्रीगंगानगर
श्रीगंगानगर के 100वें स्थापना दिवस के मौके पर केवल मैराथन ही नहीं, बल्कि कई अन्य सांस्कृतिक और खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी भव्य आयोजन किया गया है। पूरे शहर की प्रमुख इमारतों, चौराहों और ऐतिहासिक स्थलों को आकर्षक रोशनी और गुब्बारों से सजाया गया है। स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों द्वारा प्रभात फेरियां और सांस्कृतिक झांकियां निकाली गईं, जिनमें राजस्थान की समृद्ध लोक कला और महाराजा गंगा सिंह के योगदान को दर्शाया गया। मैराथन मार्ग पर जगह-जगह स्थानीय व्यापारिक मंडलों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा धावकों के लिए पानी, जूस और फल वितरण की व्यवस्था की गई थी। हर नागरिक अपने शहर के इस शताब्दी वर्ष का हिस्सा बनने पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
जन-जन में फिटनेस और हरित श्रीगंगानगर का संदेश: आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना यह शताब्दी समारोह
इस ऐतिहासिक मैराथन और 75 साल के बुजुर्ग की प्रेरणादायी दौड़ का मुख्य उद्देश्य केवल जश्न मनाना नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी था। जिला प्रशासन ने इस मौके पर श्रीगंगानगर को और अधिक स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया है। खेल प्रेमियों और समाजसेवियों का मानना है कि इस तरह के आयोजन युवाओं को नशामुक्त जीवन शैली अपनाने और खेलों की ओर आकर्षित करने में मील का पत्थर साबित होंगे। 100 साल के श्रीगंगानगर की यह शताब्दी मैराथन और बुजुर्ग धावक की स्वर्णिम सफलता आने वाली कई पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य, ऊर्जा और समर्पण की एक अमर गाथा के रूप में याद रखी जाएगी।