यूपी में टैक्सी वालों की मनमानी पर लगेगी लगाम: पिकअप न करने पर 100 रुपए जुर्माना लगेगा, ड्राइवर्स का 5 लाख का बीमा होगा - Uttar Pradesh News

Published on 21 अग॰ 2026

यूपी में अब ऐप से कैब बुक कर सफर करने वालों को मनमाने किराए और खराब सेवा से राहत मिलेगी। योगी सरकार ने ऐप आधारित कैब, यात्री परिवहन, डिलीवरी और लॉजिस्टिक सेवाओं के लिए नई नियमावली-2026 लागू कर दी है। नियमावली का नाम उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वि

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इसके तहत किराए से लेकर ड्राइवर के सत्यापन, यात्री बीमा और शिकायतों के निपटारे तक के नियम तय किए गए हैं। सरकार ने निगरानी के लिए UP My Fleet पोर्टल भी शुरू किया है। इस पर ग्राहकों को सुविधाएं देने वाले दो एग्रीगेटर और उनके 3,15,218 वाहन पोर्टल पर ऑनबोर्ड हैं।

अब किसी खास समय में कैब की मांग बढ़ने पर कंपनियां बेस फेयर से अधिकतम 50% तक ही किराया बढ़ा सकेंगी। यानी पीक टाइम या ज्यादा डिमांड के नाम पर मनमाना किराया वसूलना आसान नहीं होगा।

बुकिंग के बाद बिना उचित कारण ड्राइवर यात्री को लेने नहीं पहुंचता है तो 100 रुपए का जुर्माना लगेगा। यह राशि यात्री को अगली ट्रिप में लाभ के तौर पर देने का प्रावधान है।

यूपी में ओला, उबर, रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनिया हैं।

यूपी में ओला, उबर, रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनिया हैं।

ड्राइवरों को 5 लाख स्वास्थ्य, 10 लाख का टर्म इंश्योरेंस

एग्रीगेटर से जुड़े हर ड्राइवर का पुलिस और चरित्र सत्यापन कराया जाएगा। इसके अलावा ड्राइवरों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण और समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी होगी।

ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपए का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। वहीं, हर यात्री का बीमा कराना एग्रीगेटर की जिम्मेदारी होगी।

कंपनी में शिकायत अधिकारी होगा

हर ऐप कंपनी को ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। यात्री किराये, बुकिंग, ड्राइवर या सेवा से जुड़ी शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। नियमों या मोटर वाहन कानून का उल्लंघन करने पर कंपनी पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए 5 लाख रुपए फीस

एग्रीगेटर के आवेदन की फीस 25 हजार रुपए और लाइसेंस की फीस 5 लाख रुपए तय की गई है। वाहनों की संख्या के हिसाब से जमानत राशि भी तय होगी।

  • 100 बस या 1,000 अन्य वाहन तक: 10 लाख रुपए
  • 1,000 बस या 10,000 अन्य वाहन तक: 25 लाख रुपए
  • इससे ज्यादा वाहन: 50 लाख रुपए
सरकारी पोर्टल के जरिए वाहनों का डेटाबेस, नियमों का अनुपालन, प्रदूषण की स्थिति और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में फ्लीट का ट्रांजिशन ट्रैक किया जा सकेगा।

सरकारी पोर्टल के जरिए वाहनों का डेटाबेस, नियमों का अनुपालन, प्रदूषण की स्थिति और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में फ्लीट का ट्रांजिशन ट्रैक किया जा सकेगा।

डिलीवरी और लॉजिस्टिक कंपनियां भी नियमों के दायरे में

नई व्यवस्था सिर्फ ऐप कैब तक सीमित नहीं है। ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में होंगे, जो ड्राइवरों को ई-कॉमर्स कंपनियों, विक्रेताओं या अन्य लोगों से जोड़कर पार्सल, पैकेज और कूरियर की डिलीवरी कराते हैं।

वाहनों के प्रदूषण पर भी नजर रहेगी

UP My Fleet पोर्टल के जरिए एग्रीगेटर से जुड़े वाहनों की जानकारी, नियमों का पालन और प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। सरकार ने पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और फ्लीट को धीरे-धीरे EV में बदलने पर भी जोर दिया है।

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