मुंबई के बहुचर्चित एंटीलिया बम कांड और कारोबारी मनसुख हिरन हत्याकांड में शनिवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया. जब विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए. अदालत के इस फैसले के बाद अब सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की नियमित सुनवाई यानी ट्रायल शुरू होगा. यह मामला देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है.
विशेष NIA अदालत के न्यायाधीश चकोर बाविस्कर ने सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप तय किए हैं. अदालत में आरोप पढ़कर सुनाए जाने के दौरान सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और आरोपों से इनकार किया. अब अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष के सबूतों के आधार पर इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी.
यह मामला 25 फरवरी 2021 का है, जब देश के बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास 'एंटीलिया' के बाहर एक स्कॉर्पियो SUV खड़ी मिली थी. जांच के दौरान पता चला कि वाहन में विस्फोटक सामग्री रखी गई थी. इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गई थीं. शुरुआती जांच के बाद यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया था.
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जिस SUV में विस्फोटक मिले थे, उसे लेकर कारोबारी मनसुख हिरेन ने दावा किया था कि उनकी गाड़ी चोरी हो गई थी. लेकिन इस खुलासे के कुछ ही दिनों बाद, 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव ठाणे की एक खाड़ी (क्रीक) से बरामद हुआ. उनकी संदिग्ध मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया. इसके बाद जांच एजेंसियों ने बम कांड और मनसुख हिरेन की मौत के बीच संबंधों की गहन जांच शुरू की.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे इस पूरी साजिश का मुख्य किरदार था. जांच एजेंसी का दावा है कि एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी SUV पार्क कराने में वाझे की सीधी भूमिका थी. NIA के मुताबिक, इस पूरी साजिश का मकसद देश के अमीर और प्रभावशाली लोगों में डर पैदा करना और उनसे वसूली करना था. एजेंसी का आरोप है कि कथित तौर पर एक वरिष्ठ राजनीतिक शख्सियत की ओर से हर महीने 100 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसे पूरा करने के लिए इस तरह की योजना बनाई गई.
NIA ने अपनी जांच में यह भी दावा किया है कि सचिन वाझे अपने पुराने प्रभाव और 'सुपर कॉप' वाली छवि को दोबारा हासिल करना चाहता था. एजेंसी के मुताबिक, इसी उद्देश्य से उसने इस पूरे घटनाक्रम की साजिश रची. जांच में यह भी कहा गया है कि जब मनसुख हिरेन विस्फोटकों की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्हें साजिश का 'कमजोर लिंक' माना जाने लगा, तब उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई.
NIA का आरोप है कि मनसुख हिरेन इस पूरे मामले का खुलासा कर सकते थे, इसलिए उन्हें साजिश के तहत मौत के घाट उतार दिया गया. जांच एजेंसी का कहना है कि हिरेन पर विस्फोटकों की जिम्मेदारी लेने का दबाव बनाया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें संभावित गवाह और साजिश उजागर करने वाला व्यक्ति मानते हुए हत्या की साजिश रची गई. अब अदालत में ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष इन सभी आरोपों को सबूतों के आधार पर साबित करने की कोशिश करेगा, जबकि आरोपी अपने बचाव में दलीलें पेश करेंगे.
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