दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने वाहनों के Pollution Under Control (PUC/PUCC) प्रमाणपत्र को लेकर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर 2026 से वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना चलने वाले वाहनों के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान शुरू किया जाएगा। नियम का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर मौजूदा प्रावधानों के तहत चालान और ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
1 अक्टूबर से शुरू होगा विशेष अभियान
दिल्ली सरकार के मुताबिक, 1 अक्टूबर से परिवहन विभाग और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियां वैध PUC वाले वाहनों की जांच पर ज्यादा जोर देंगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजधानी की सड़कों पर चलने वाले वाहन निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह घोषणा बुराड़ी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के उद्घाटन के दौरान की। सरकार का कहना है कि केवल सर्दियों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करने के बजाय पूरे साल वाहनों के उत्सर्जन पर निगरानी मजबूत करने की जरूरत है।
PUC नहीं तो ₹10 हजार तक जुर्माना
रिपोर्टों के अनुसार, बिना वैध PUC प्रमाणपत्र के वाहन चलाने पर मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी 1 अक्टूबर से दिल्ली में वाहन चालकों को अपने PUC की वैधता को लेकर विशेष सावधानी रखनी होगी।
हालांकि, ₹10,000 को हर मामले में स्वतः लगने वाला नया शुल्क समझना सही नहीं होगा। अधिकारियों के मुताबिक यह मौजूदा प्रावधानों के तहत लागू होने वाला संभावित अधिकतम जुर्माना है।
किन वाहनों पर लागू होगा नियम?
PUC व्यवस्था मुख्य रूप से पेट्रोल, डीजल और CNG वाहनों के उत्सर्जन की जांच से जुड़ी है। नियम के तहत वाहन का प्रदूषण स्तर निर्धारित सीमा के भीतर होना चाहिए और इसके लिए अधिकृत केंद्र से PUC प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
रिपोर्टों के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों को PUC की इस आवश्यकता से छूट है, क्योंकि उनमें टेलपाइप से उत्सर्जन नहीं होता।
PUC सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है?
PUC प्रमाणपत्र यह प्रमाणित करता है कि वाहन से निकलने वाला प्रदूषण निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर है। मोटर वाहन नियमों के तहत पहली बार रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद वाहन के लिए वैध PUC रखना जरूरी होता है। जरूरत पड़ने पर अधिकृत अधिकारी इसे जांच के दौरान मांग सकते हैं।
दिल्ली जैसे शहर में इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां वाहन प्रदूषण वायु गुणवत्ता से जुड़ी बड़ी चिंताओं में शामिल है।
PUC सेंटरों की भी होगी निगरानी
सरकार सिर्फ वाहन चालकों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती। मुख्यमंत्री ने कहा है कि PUC केंद्रों की निगरानी और उनके कामकाज को तकनीक के जरिए मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य PUC जांच की प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद बनाना है।
बुराड़ी में शुरू किया गया ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन इसी दिशा में एक कदम बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टेशन की क्षमता सालाना करीब एक लाख वाहनों की जांच करने की है।
वाहन मालिक अभी क्या करें?
1 अक्टूबर से पहले वाहन मालिकों को अपने वाहन के PUC की वैधता की तारीख जरूर जांच लेनी चाहिए। अगर प्रमाणपत्र एक्सपायर हो चुका है तो अधिकृत PUC केंद्र पर वाहन की जांच कराकर नया प्रमाणपत्र लेना होगा।
खास तौर पर पेट्रोल, डीजल और CNG वाहन मालिकों के लिए यह जरूरी है, क्योंकि अभियान के दौरान वैध प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर चालान की कार्रवाई हो सकती है।
एक नजर में पूरा मामला
- नियम लागू होने की तारीख: 1 अक्टूबर 2026
- जगह: दिल्ली
- मुख्य फोकस: वैध PUC/PUCC प्रमाणपत्र
- बिना वैध PUC: चालान और कानूनी कार्रवाई
- संभावित अधिकतम जुर्माना: ₹10,000
- मुख्य वाहन: पेट्रोल, डीजल और CNG
- इलेक्ट्रिक वाहन: PUC आवश्यकता से छूट
- सरकार का उद्देश्य: वाहनों के उत्सर्जन की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण
इसलिए दिल्ली में वाहन चलाने वालों के लिए 1 अक्टूबर से पहले PUC की वैधता जांचना अहम हो गया है। सरकार का नया अभियान सालभर प्रदूषण नियंत्रण और वाहन उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में बताया जा रहा है।
