रेडियो पर नंबर-1 रही Asha Bhosle की ये गजल, गुलाम अली ने दिया था संगीत; 43 साल बाद भी देती है सुकून - how asha bhosle and ghulam ali ghazal salona sa sajan hai aur main hoon topped radio charts for weeks in india and pakistan

Published on 15 सित॰ 2026

मशहूर गायिका आशा भोसले (Asha Bhosle) की एक ऐसी गजल रही, जो भारत और पाकिस्तान में नंबर 1 रही। इस ...और पढ़ें

आशा ताई की वो गजल रेडियो पर रही थी नंबर 1

आशा ताई की वो गजल रेडियो पर रही थी नंबर 1

HighLights

  1. आशा भोसले की गजल रेडियो पर रही नंबर 1

  2. गुलाम अली ने गजल का संगीत तैयार किया

  3. भारत के साथ पाकिस्तान में भी हिट रही ये गजल

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। मशहूर दिवंगत गायिका आशा भोसले ने सिनेमा में अनगिनत यादगार गीत दिए। उनके द्वारा गाए गानों को पसंद करने वालों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। आशा ताई की आवाज की सबसे बड़ी खास बात यह थी कि उन्होंने हर शैली के गाने गाए।

कभी पॉप-जैज में उनकी आवाज का जादू बैठा तो कभी क्लासिकल और लोकगीतों में भी उनके सुरों का जादू चला। आज हम आपको उनकी एक ऐसी गजल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो किसी फिल्म का हिस्सा नहीं थी, लेकिन रिलीज के बाद ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

कौन सी है वह गजल?

अब यूं तो आशा भोसले ने कई गजलों को अपनी आवाज दी, लेकिन उन्होंने साल 1983 में एक ऐसी गजल गाई जो सुपरहिट साबित हुई। इस गजल का नाम है 'सलोना सा सजन है और मैं हूं' (Salona Sa Sajan Hai Aur Main Hoon)। जी हां, साल 1983 में Meraj-E-Ghazal नाम से एक पूरी एल्बम लॉन्च की गई। इस एल्बम में कई यादगार गाने शामिल किए गए और इसी में से एक गाना था, जिसे आशा ताई (Asha Bhosle Ghazal) ने अपनी मखमली आवाज से सजाया।

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इस गजल को आशा ताई ने जब गाया तो मानो हर तरफ इसकी चर्चा हो गई। इस एल्बम की सबसे खास बात यह थी कि इसमें भारत की आशा भोसले और पाकिस्तान के दिग्गज गजल गायक और संगीतकार गुलाम अली (Ghulam Ali) ने एक साथ काम किया था। इस गजल का संगीत गुलाम अली ने ही तैयार किया था और इसके बोल शबीह अब्बास (Shabih Abbas) ने लिखे थे।

आज भी कायम है गजल का जादू

इस गजल की खास बात यह भी है कि ये किसी फिल्म का हिस्सा नहीं है। 1983 में आए आइकॉनिक एल्बम 'Meraj-E-Ghazal' का ये हिस्सा है और इस एल्बम की दूसरी गजलें भी खूब पसंद की गई। गजल की धुन को गुलाम अली (Ghulam Ali Ghazal) ने ही तैयार की थी और इसमें आशा ताई के सुरों ने चार चांद लगा दिए।  

ये इस गजल का ही जादू है कि, इस एल्बम के आने के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों जगह यह गाना रेडियो पर हफ्तों तक नंबर 1 पर रहा था। इस गाने को म्यूजिक लेबल HMV/Saregama ने रिलीज किया। इस गजल की सादगी आज भी लोगों को लुभाती है।

आशा भोसले (Asha Bhosle Songs) की सबसे बड़ी ताकत ही उनकी वर्सेटिलिटी रही। उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर क्लब डांस नंबर्स, गजल, पॉप, और लोकगीतों तक, हर शैली को अपनी गायकी से एक नई पहचान दी। आज भले ही आशा ताई हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत-गजल दर्शकों और श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं।