World Hepatitis Day: यूपी में बदल रहा हेपेटाइटिस का ट्रेंड, पश्चिम में Blood-Borne और पूर्वांचल में Water-Borne संक्रमण बढ़ा - Haribhoomi

Published on 28 जुल॰ 2026

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर सामने आई रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश में संक्रमण के बदलते स्वरूप को उजागर किया है। पश्चिमी यूपी में हेपेटाइटिस-बी और सी यानी रक्तजनित संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि पूर्वांचल और तराई में दूषित पानी के कारण हेपेटाइटिस-ए और ई के मामले बढ़ रहे हैं।

World Hepatitis Day

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ का एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज हेपेटाइटिस-सी के इलाज का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

  • Published: 28 Jul 2026, 03:19 PM IST
  • Last Updated: 28 Jul 2026, 03:19 PM IST

उत्तर प्रदेश प्रदेश में हेपेटाइटिस का संक्रमण अब नए पैटर्न के साथ सामने आ रहा है। एक ओर पश्चिमी जिलों में संक्रमित रक्त, सिरिंज और ब्लेड के कारण संक्रमण बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर मानसून के दौरान पूर्वांचल और तराई में दूषित पेयजल और जलभराव के चलते जलजनित हेपेटाइटिस के मामलों में तेजी देखी जा रही है।

प्रदेश के कुल हेपेटाइटिस-बी और सी मरीजों में करीब 39 प्रतिशत मरीज अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18 जिलों से हैं। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के हालिया अध्ययन में पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में हेपेटाइटिस-ए और ई के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है।

पूर्वांचल में दूषित पानी बना बड़ा खतरा
ICMR के अध्ययन के मुताबिक मानसून के दौरान दूषित पेयजल, जलभराव और सीवेज मिश्रित पानी के कारण पूर्वांचल और तराई में हेपेटाइटिस-ए और ई का खतरा बढ़ जाता है। बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, महराजगंज और गोरखपुर जैसे जिलों में बाढ़ और दूषित पेयजल के कारण संक्रमण के मामलों में तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान साफ पानी की उपलब्धता और स्वच्छता बेहद जरूरी है।

पश्चिमी यूपी में रक्तजनित संक्रमण के मामले ज्यादा
दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हेपेटाइटिस-बी और सी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त, असुरक्षित सिरिंज, संक्रमित ब्लेड, रेजर और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के जरिए फैलता है। प्रदेश के कुल मरीजों में करीब 39 फीसदी केवल पश्चिमी यूपी के 18 जिलों से हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है।

21 से 40 साल के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, उत्तर प्रदेश में संक्रमित मरीजों में 54 प्रतिशत पुरुष और 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। रिपोर्ट बताती है कि 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा सबसे ज्यादा संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। यह वही आयु वर्ग है, जो कामकाजी आबादी का बड़ा हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता से इस संक्रमण को रोका जा सकता है।

देर से जांच बन रही बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या अंडर-डायग्नोसिस है। बड़ी संख्या में मरीजों को संक्रमण का पता तब चलता है, जब बीमारी लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है। समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने से मरीजों में जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

गोंडा, बलरामपुर, मऊ, उन्नाव, औरैया और बरेली समेत नौ जिलों से लिए गए 1,957 रक्त नमूनों की जांच में 97 प्रतिशत लोगों में हेपेटाइटिस-ए के खिलाफ एंटीबॉडी मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी बचपन में ही इस संक्रमण के संपर्क में आ चुकी है।

मेरठ बना हेपेटाइटिस उपचार का प्रमुख केंद्र
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ का एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज हेपेटाइटिस-सी के इलाज का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां 22 हजार से अधिक हेपेटाइटिस-सी मरीज पंजीकृत हैं। वहीं बिजनौर में 3,997 और मुजफ्फरनगर में 2,300 से अधिक हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीज दर्ज किए जा चुके हैं।

अगस्त 2025 में सीतापुर के सोनसारी गांव में 400 लोगों की जांच के दौरान 95 लोग हेपेटाइटिस-बी और सी से संक्रमित मिले थे। जांच में संक्रमित ब्लेड, असुरक्षित शेविंग, एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल और संक्रमण नियंत्रण मानकों की अनदेखी को प्रमुख कारण माना गया।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस से बचाव के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए।

  • हमेशा साफ और उबला हुआ पानी पिएं।
  • खुले और दूषित भोजन से बचें।
  • इंजेक्शन के लिए हमेशा नई सिरिंज का इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
  • सैलून में नया ब्लेड इस्तेमाल करवाएं।
  • हेपेटाइटिस-बी का टीका जरूर लगवाएं।
  • समय-समय पर जांच कराएं।
  • हेपेटाइटिस-बी और सी साथ खाना खाने, हाथ मिलाने, गले मिलने या खांसने से नहीं फैलता।