रेखा गुप्ता ने VIT वेल्लोर में ICMR समर्थित CARBID का उद्घाटन किया। केंद्र बैक्टीरियोफेज, संक्रमणकारी रोग और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर शोध करेगा।
संक्रमणकारी बीमारियों और बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ भारत की वैज्ञानिक तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल हुई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित Vellore Institute of Technology (VIT) में Centre for Advanced Research in Bacteriophage and Infectious Diseases (CARBID) का उद्घाटन किया।
ICMR के सहयोग से स्थापित यह केंद्र बैक्टीरियोफेज, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और संक्रामक रोगों से जुड़े उन्नत शोध पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक विचारों और तकनीकों को आगे बढ़ाकर ऐसे समाधान तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल वास्तविक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में किया जा सके।
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CARBID क्या है और इसका काम क्या होगा?
CARBID को VIT में ICMR के Centre for Advanced Research कार्यक्रम के तहत स्थापित किया गया है। केंद्र का प्रमुख फोकस बैक्टीरियोफेज की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन और बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में उनके संभावित इस्तेमाल पर है। खासतौर पर उन संक्रमणों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है।
बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित कर उन्हें नष्ट कर सकते हैं। इसी वजह से फेज थेरेपी को एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की बढ़ती चुनौती के बीच शोध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। CARBID इसी संभावना को वैज्ञानिक और चिकित्सकीय स्तर पर आगे ले जाने की दिशा में काम कर रहा है।
Antibiotic Resistance के खिलाफ शोध पर जोर
आज संक्रमणों के इलाज में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक Antimicrobial Resistance (AMR) है। जब बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, तो सामान्य उपचार कम प्रभावी हो सकता है और संक्रमण का प्रबंधन अधिक कठिन हो जाता है।
CARBID के शोध क्षेत्रों में MDR यानी मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया, ESKAPE समूह के रोगजनक, बायोफिल्म और बैक्टीरियोफेज-एंटीबायोटिक के संयुक्त इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। केंद्र का लक्ष्य ऐसे शोध को आगे बढ़ाना है, जो भविष्य में अधिक प्रभावी संक्रमण नियंत्रण और उपचार रणनीतियों का आधार बन सके।
Laboratory से Public Health Solution तक पहुंचाने की कोशिश
CARBID की खासियत सिर्फ बुनियादी शोध तक सीमित नहीं है। केंद्र translational research यानी प्रयोगशाला में हासिल वैज्ञानिक निष्कर्षों को व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों में बदलने पर भी जोर देता है। इस दिशा में केंद्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों, चिकित्सकों तथा शोध संस्थानों के साथ सहयोग कर रहा है। मकसद साफ है—रिसर्च पेपर तक सीमित रहने के बजाय ऐसी तकनीक और उपचार रणनीतियां विकसित करना, जिनका भविष्य में मरीजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लाभ मिल सके।
ICMR से मिले बड़े शोध प्रोजेक्ट, बैक्टीरियोफेज पर खास फोकस
VIT के अनुसार, CARBID को ICMR से कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं का समर्थन मिला है। इनमें MDR ESKAPE pathogens से होने वाले acute respiratory infections के लिए bacteriophage cocktails पर शोध भी शामिल है।
इसके अलावा त्वचा और musculoskeletal system के bacterial infections से निपटने के लिए bacteriophages विकसित करने से जुड़ा ICMR-funded Centre for Advanced Research प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जिसकी अवधि 2024 से 2029 तक है। VIT ने इस परियोजना के लिए कुल करीब 9.84 करोड़ रुपये की ग्रांट दर्ज की है, जिसमें VIT का हिस्सा करीब 4.82 करोड़ रुपये है।
Clinical Research से जुड़ रहा है CARBID
केंद्र का शोध केवल प्रयोगशाला मॉडल तक सीमित नहीं है। CARBID की गतिविधियों में clinical pathogens को ध्यान में रखकर phage research, biofilm biology और phage-antibiotic combination strategies जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
VIT में CARBID से जुड़े शोधकर्ताओं ने antibiotic-resistant Klebsiella pneumoniae जैसे रोगजनकों पर भी अध्ययन प्रकाशित किए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्र का काम उन बैक्टीरियाओं को समझने पर भी केंद्रित है, जो अस्पतालों और गंभीर संक्रमणों के संदर्भ में चुनौती बन सकते हैं।
भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम के लिए क्यों अहम है यह पहल?
CARBID का उद्घाटन ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए केवल नई दवाएं विकसित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संक्रमणों के खिलाफ वैकल्पिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रणनीतियों पर भी काम करना जरूरी है।
बैक्टीरियोफेज आधारित उपचार इसी व्यापक शोध प्रयास का हिस्सा है। भारत में इस क्षेत्र के लिए रिसर्च सेंटर, वैज्ञानिक सहयोग और ICMR जैसी संस्थाओं का समर्थन एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर सकता है, जहां शुरुआती वैज्ञानिक खोज से लेकर संभावित स्वास्थ्य समाधान तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।
दुनिया के लिए समाधान तैयार करने की दिशा में कदम
CARBID के उद्घाटन के मौके पर सामने आया संदेश भी इसी व्यापक सोच से जुड़ा है—भारत ऐसा वैज्ञानिक तंत्र विकसित कर रहा है जो देश की अपनी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए नवाचार करे और साथ ही दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान में योगदान दे। VIT में CARBID का विस्तार इस लिहाज से महज एक नए रिसर्च सेंटर की शुरुआत नहीं है। यह संक्रमणकारी रोगों, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और भविष्य की उपचार पद्धतियों पर भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता को एक जगह लाने की कोशिश भी है। आने वाले वर्षों में इसकी असली सफलता इस बात से तय होगी कि प्रयोगशाला में होने वाला यह शोध कितनी तेजी और प्रभावशीलता से मरीजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए उपयोगी समाधान में बदल पाता है।