भोपाल में पर्यावरण संरक्षण पर NGT का कड़ा रुख: 80,000 पौधों के रोपण, करोड़ों के फंड का मांगा हिसाब; कहा-केवल पौधे लगाना काफी नहीं - Bhopal News

Published on 6 अक्टू॰ 2026

भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) समेत अन्य प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटाई के बदले किए जाने वाले क्षतिपूर्ति पौधरोपण मामले में नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने 80 हजार

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पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना विरुद्ध एनएचएआई व अन्य से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह, विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मंगलवार को आदेश पारित किया। जिसमें राज्य शासन, वन विभाग और भोपाल नगर निगम के रवैये पर कड़ी असंतुष्टि व्यक्त की।

एनजीटी का बजटीय कोष के इस्तेमाल पर सवाल एनजीटी ने वन विकास और डीएफओ (पर्यावरण वानिकी मंडल) से सीधा सवाल किया है कि वर्ष 2025 में पौधारोपण के लिए जो राशि जमा कराई गई थी, उससे वर्ष 2026 के मानसून सत्र में पौधरोपण की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

पीसीसीएफ और वन बल प्रमुख को यह आदेश

  • एनएचएआई एवं अन्य निजी/सरकारी विकास एजेंसियों से पिछले 5 वर्ष में प्राप्त धनराशि की जिला-वार रिपोर्ट दें।
  • प्राप्त फंड के मुकाबले किस-किस वर्ष में वास्तव में कितना पौधरोपण हुआ, उसकी अलग-अलग सूचियां पेश करें।

अभियान और कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए पीठ ने भोपाल नगर निगम और डीएफओ को निर्देश दिए कि पिछले 5 वर्षों में रोपे गए उन सभी पौधों का हिसाब लगाया जाए, जो पानी या रखरखाव के अभाव में सूख गए हैं। उपलब्ध बजट की बचत राशि से तुरंत कैजुअल्टी रिप्लेसमेंट (मृत पौधों के स्थान पर नए पौधे) किया जाए, ताकि 100% उत्तरजीविता सुनिश्चित हो सके।

पौधों के पूरी तरह स्थापित और बड़े होने तक नियमित पानी देने की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

संबंधित विभागों के लिए सख्त समय-सीमा पूर्व आदेश के बावजूद कोई जवाब पेश न करने पर ट्रिब्यूनल ने बीएमसी को अगली सुनवाई से पूर्व अनिवार्य रूप से जवाब देने का अंतिम अवसर दिया है।

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 कार्य दिवस के भीतर अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करेगा। ⁠वन विभाग पेड़ों की कटाई के बदले जमा राशि के सत्यापन और एसडीओ द्वारा उठाए गए सवालों के निवारण के साथ 4 सप्ताह के भीतर अंतिम विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा।

29 अक्टूबर को होगी सुनवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी जिम्मेदार एजेंसियों को समय-सीमा के भीतर ठोस और सत्यापित रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। प्रकरण की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को नियत की गई है।