
Gig Workers का दर्द Image Credit source: Getty Images
बेंगलुरु के एक BBA छात्र ने कॉलेज की छुट्टियों के दौरान तीन महीने Rapido Captain बनकर काम किया और इस दौरान उसने सिर्फ कमाई ही नहीं की, बल्कि Gig Economy को काफी करीब से समझा. दूसरे साल में पढ़ रहे इस छात्र का मकसद शुरुआत से ही सिर्फ पैसे कमाना नहीं था. वह जानना चाहता था कि Rapido का एल्गोरिदम कैसे काम करता है, किस इलाके में ज्यादा राइड मिलती हैं और एक Gig Worker की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी होती है.
शुरुआत में उसे प्लेटफॉर्म के काम करने का तरीका ज्यादा समझ नहीं आया. लेकिन कुछ ही दिनों में उसने उन जगहों को पहचानना शुरू कर दिया, जहां राइड की डिमांड ज्यादा रहती थी. इसके बाद उसने अपने काम का टाइम और लोकेशन उसी हिसाब से तय करना शुरू कर दिया. छात्र आमतौर पर सुबह 8 बजे काम शुरू करता था और शाम करीब 4:30 बजे तक सड़कों पर रहता था. किसी अच्छे दिन वह लगभग 1,200 रुपये तक कमा लेता था.
कमाई देख हिल गए लोग
हालांकि, इस रकम में पेट्रोल और दूसरे खर्च शामिल नहीं थे. उसका कहना है कि बतौर Side Hustle यह एक्सपीरियंस उसके लिए अच्छा रहा, लेकिन इसी दौरान उसे उन लोगों के बारे में भी सोचने का मौका मिला, जिनके लिए Gig Work सिर्फ एक्सट्रा कमाई नहीं बल्कि रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है.
उसने बताया कि काम के दौरान वह ज्यादा ब्रेक नहीं लेता था. दोपहर के समय जब राइड कम मिलने लगती थीं, तो वह Food Delivery भी करने लगा. यहां भी काम हमेशा आसान नहीं था. कई बार ऑर्डर तुरंत मिल जाता था, लेकिन कुछ मौकों पर रेस्टोरेंट के बाहर 20 से 25 मिनट तक सिर्फ खाना तैयार होने का इंतजार करना पड़ता था. तीन महीने तक उसने Majestic, रेलवे स्टेशन और दूसरे व्यस्त इलाकों के आसपास ज्यादा समय बिताया. वहां कुछ ऑटो ड्राइवर उसे घूरकर जरूर देखते थे, लेकिन उसके मुताबिक किसी ने उसे धमकाया या उससे बहस नहीं की.
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छात्र ने अपनी कमाई के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए, ताकि लोग आंकड़ों को लेकर कोई भ्रम न रखें. मई में उसने 96 ऑर्डर पूरे किए और 5,650 रुपये कमाए. जून में उसकी कमाई बढ़कर 16,660 रुपये हो गई. जुलाई में उसने 233 ऑर्डर पूरे किए और 14,222 रुपये की कमाई की. अपने एक्सपीरियंस के बारे में छात्र ने कहा कि यह सफर सिर्फ रोजाना 1,200 रुपये कमाने तक सीमित नहीं था. उसे इंतजार, पेट्रोल का खर्च, कमाई की अनिश्चितता, प्लेटफॉर्म के नियम, ग्राहकों से जुड़ी दिक्कतें, रेस्टोरेंट की परेशानियां और लगातार काम करते रहने का दबाव, सब कुछ खुद महसूस हुआ.
यहां देखिए पोस्ट
My 3-month experience doing Rapido as a side hustle in Bangalore — ₹1.2k/day, algorithm, restaurants & what I learned by u/RapTer_OP in bangalore
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आयुष कुमार
आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.<p></p> अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. <p></p>फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.
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