शिक्षा और आस्था का बड़ा केंद्र VIP वार्ड तेलियरगंज गंदगी, जलभराव और अव्यवस्था से जूझ रहा है। इस वार्ड में ही मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNNIT), टीबी अस्पताल, फाफामऊ का मुख्य गंगा पुल, मसूरियादीन कॉलेज, शंकर घाट, सदानंद आश्रम, जोंधवल, पीताम्बर नगर, छुहारा हनुमान मंदिर और टीवी कॉलोनी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान और स्थान हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने दशा सुधारने में खास दिलचस्पी नहीं ली।
दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा के दौरान लोगों ने खुलकर समस्याएं बताईं। उनका कहना है कि गंगा किनारे बसा यह वार्ड हर साल बाढ़ की मार झेलता है। बारिश होते ही कई मोहल्लों में जलभराव हो जाता है, जबकि खुले नाले, कूड़े के ढेर और गंदगी से स्थानीय लोगों के साथ यहां रहने वाले हजारों छात्र भी परेशान हैं।
दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इस कड़ी में वार्ड-55 का जायजा लिया गया...
गंगा किनारे रिवर फ्रंट रोड पर जगह-जगह गंदगी फैली मिली। नालों में कूड़ा जमा होने से बजबजाती गंदगी और बदबू का माहौल नजर आया। कई स्थानों पर उलझे बिजली के तार और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें मिलीं। वहीं सड़क किनारे पशुपालन, गोबर और अतिक्रमण के कारण आवागमन प्रभावित होता दिखा।
पहले ये नजारा देखिए...
वार्ड के कई खुले स्थानों पर अवैध कब्जा कर पशुपालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कूड़े और गोबर के ढेर लगे रहने से गंदगी, दुर्गंध और बीमारियों का खतरा बना रहता है।
वार्ड में गंगा किनारे बनी रिवर फ्रंट रोड पर गंदा पानी और गंदगी बह रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था न होने से सड़क की हालत लगातार बदहाल होती जा रही है।
वार्ड के नालों में गंदगी और कूड़े का ढेर लगा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई न होने से आसपास दुर्गंध फैली रहती है और बीमारियों का खतरा बना रहता है।
लोग बोले- स्थायी समाधान की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले नालों, जलभराव और गंदगी की समस्या वर्षों से बनी हुई है। नालों की नियमित सफाई नहीं होती और अतिक्रमण के कारण जलनिकासी लगातार प्रभावित हो रही है। लोगों ने बाढ़ और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के साथ नियमित सफाई और अतिक्रमण हटाने की मांग की।
वार्ड में बिजली के तारों का जंजाल फैला हुआ है और कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे रात में अंधेरा रहता है और हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
गंदगी और खुले नाले बने सबसे बड़ी परेशानी
वार्ड के कई इलाकों में खुले नालों में कूड़ा और गंदगी भरी हुई है। कई नालों पर लोगों ने कब्जा कर मकान बना लिए हैं, जिससे सफाई कराना मुश्किल हो गया है। नालों से उठने वाली बदबू सीधे घरों तक पहुंचती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के समय स्थिति और खराब हो जाती है। गंदा पानी सड़कों पर भर जाता है और पूरे इलाके में दुर्गंध फैल जाती है। सफाई व्यवस्था नियमित न होने के कारण डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है।
वार्ड की बड़ी समस्याएं
खुले नाले और अतिक्रमण: नालों पर कब्जे के कारण सफाई और जलनिकासी प्रभावित है।
कूड़े के ढेर: खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैली रहती है।
बाढ़ और जलभराव: गंगा किनारे होने से हर साल कई मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
सड़कों पर पशुपालन: गोबर, आवारा पशु और अवैध पशुपालन से आवागमन प्रभावित होता है।
छात्रों की परेशानी: गंदगी, मच्छरों और बदबू के कारण हजारों छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सफाई व्यवस्था कमजोर: नियमित कूड़ा उठान और नालियों की सफाई नहीं होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है।
छात्रों के लिए भी बड़ी समस्या बना वार्ड
तेलियरगंज शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। एमएनएनआईटी, मसूरियादीन कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों के कारण यहां बड़ी संख्या में छात्र किराये पर रहते हैं। लेकिन गंदगी, खुले नाले, मच्छरों का प्रकोप और जलभराव के कारण छात्रों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि नालों की बदबू कमरों तक पहुंचती है और बरसात में बीमारी फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सड़कों पर पशुपालन, गोबर और अवैध कब्जों से बढ़ी परेशानी
वार्ड के कई हिस्सों में सड़क किनारे ही पशुओं का पालन किया जा रहा है। सड़कों पर गोबर फैला रहता है, जिससे राहगीरों को आने-जाने में परेशानी होती है। खाली सरकारी जमीनों और खुले स्थानों पर अवैध कब्जा कर पशुपालन किया जा रहा है। इससे पूरे इलाके में गंदगी का माहौल बना रहता है। आवारा पशु भी सड़कों पर घूमते रहते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है इलाका
गंगा के किनारे बसे होने के कारण वार्ड का बड़ा हिस्सा हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता है। कई मोहल्लों में पानी घरों तक पहुंच जाता है और लोगों को कई दिनों तक पलायन करना पड़ता है। बाढ़ के दौरान सड़कें डूब जाती हैं, नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं और आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।
हेल्पलाइन नंबर. नगर निगम ने पाइप लाइन में लीकेज या कहीं गंदे पानी की सप्लाई होने की शिकायत करने के लिए टोल फ्री नंबर 1533 व लैंडलाइन नंबर 0532-2427221 जारी किया है। इस पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
अपने वार्ड की कवरेज और समस्याओं की जानकारी देने के लिए वॉट्सएप नंबर 8052297548, 7011286712 पर मैसेज कीजिए।
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दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा के दौरान विकास के दावे हकीकत से कोसों दूर नजर आए। यहां के लोगों का कहना है कि जल निकासी न होने की वजह से गंदा पानी घरों में भर जाता है। संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा है। सफाई व्यवस्था बहुत खराब है।पूरी खबर पढ़ें…
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जाम नालियां, अधूरी सड़कें, लंबे समय से चल रही खुदाई, गंदगी और अतिक्रमण जैसी समस्याएं लोगों के लिए हर दिन मुसीबत बन रही हैं। कई स्थानों पर दुकानों और घरों में पानी घुस जाता है, जबकि वर्षों से शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका है। पूरी खबर पढ़ें…
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