हैंडसम होना Vinod Khanna को पड़ा था भारी, 46 साल पहले आई Amitabh Bachchan की 'दोस्ताना' से निकाले गए थे एक्टर - vinod khanna was replaced from amitabh bachchan dostana because of his handsome personality

Published on 11 अक्टू॰ 2026

1980 की सुपरहिट फिल्म Dostana के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। शायद ही आपको मालूम हो कि ...और पढ़ें

दोस्ताना से बाहर किए गए थे विनोद खन्ना। फोटो क्रेडिट- एक्स

दोस्ताना से बाहर किए गए थे विनोद खन्ना। फोटो क्रेडिट- एक्स

HighLights

  1. विनोद खन्ना को 'दोस्ताना' से बाहर कर शत्रुघ्न सिन्हा को लिया गया।

  2. निर्देशक राज खोसला को विनोद खन्ना का लुक समस्या लगा था।

  3. फिल्म अपने प्रेम त्रिकोण और यादगार गानों के लिए प्रसिद्ध है।

अनंत विजय, नई दिल्ली। गोवा में आयोजित होने वाले भारतीय अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कुछ वर्षों पूर्व एक सत्र के दौरान करण जौहर (Karan Johar) ने कहा था कि पहले फिल्मों में दो-तीन प्रकार की कहानियां ही दर्शकों को पसंद आती थीं।

अपने स्मरण के आधार पर कह रहा हूं कि करण के मुताबिक खोया-पाया का फॉर्मूला और प्रेम त्रिकोण (लव ट्रायंगल) लोग खूब पसंद करते हैं। करण जौहर के उस वक्तव्य के बाद वहां उपस्थित फिल्म इतिहासकारों से इस पर चर्चा भी
हुई थी, पर उस चर्चा में फिल्म दोस्ताना (Dostana) की बात नहीं आई थी।

क्या थी दोस्ताना फिल्म की कहानी?

फिल्म दोस्ताना करण जौहर के पिता यश जौहर (Yash Johar) की फिल्म है, जिसकी कहानी भी प्रेम त्रिकोण ही है। विजय (अमिताभ बच्चन) और रवि (शत्रुघ्न सिन्हा) दो दोस्त हैं, जिनको शीतल (जीनत अमान) से प्यार हो जाता है। विजय बिंदास अंदाज में शीतल से प्यार की पींगे बढ़ाता है, वहीं रवि खामोश मोहब्बत करता है।

Dostana 1980

शीतल रवि को दोस्त समझती है। उसको भी रवि के प्यार का अनुमान नहीं है। रोचक तरीके से कहानी कई दिलचस्प मोड़ लेती है। रवि और विजय दोस्त से दुश्मन बन जाते हैं। कहानी के नाटकीय मोड़ से रवि को विजय की उसके प्रति भावना का पता चलता है। वो बेचैन हो जाता है।

दर्शकों को पसंद आया था लव ट्रायंगल

इस फिल्म को राज खोसला ने निर्देशित किया था। राज खोसला अपने जमाने के बेहतरीन निर्देशकों में गिने जाते थे। उन्होंने सलीम-जावेद (Salim-Javed) की दोस्ताना की कहानी का ट्रीटमंट ऐसा किया कि दर्शकों को फिल्म भा गई। जो कहानी कई बार कही जा चुकी थी, उसको दर्शकों का खूब प्यार मिला।

निर्देशन छोड़ शराब में डूब गए थे निर्देशक

1980 में रिलीज हिट फिल्मों में दोस्ताना भी शामिल है। फिल्म दोस्ताना बनने की कहानी भी दिलचस्प है। राज खोसला ने मराठी उपन्यास आशी तुझी प्रीत पर आधारित एक हिंदी फिल्म निर्देशित की थी, जिसका नाम था 'मैं तुलसी तेरे आंगन की'। इस फिल्म के बाद राज खोसला की शराब से ऐसी दोस्ती हुई कि वो कहने लगे थे कि अब फिल्म नहीं बस स्कॉच के साथ जिंदगी बिताई जाएगी।

राज खोसला ने ठुकरा दी थी फिल्म

ये वही दौर था जब यश जौहर फिल्मों की पब्लिसिटी और प्रबंधन से मुक्त होकर फिल्म बनाना चाह रहे थे। वो राज खोसला के पास पहुंचे और उनसे फिल्म निर्देशित करने का अनुरोध किया। पहले तो राज खोसला ने मना कर दिया, लेकिन यश जौहर ने हार नहीं मानी। उनके पास सलीम-जावेद की कहानी थी।

फिल्म की कहानी सुनकर बदला था मन

सलीम-जावेद का हिंदी फिल्मों में डंका बज रहा था। एक दिन यश जौहर ने राज खोसला से आग्रह किया कि वो कहानी सुन लें। खोसला ने जब कहानी सुनी तो हां कर दी। हालांकि, ये कहानी उनके मन मिजाज की थी नहीं।

पहले अमिताभ बच्चन के यार बनने वाले थे विनोद खन्ना

अब कास्टिंग की बात शुरू हुई। अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को राज खोसला ने एक फिल्म में डायरेक्ट किया था। फिर जीनत अमान (Zeenat Aman) और विनोद खन्ना (Vinod Khanna) फाइनल हुए। राज खोसला और विनोद खन्ना ने कई फिल्में साथ में की थीं। दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती भी थी।

Amitabh Bachchan

दोस्ताना की रिलीज के दो साल पहले मुकद्दर का सिकंदर रिलीज हुई थी। उस फिल्म में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना दोनों की दमदार उपस्थिति थी। विनोद खन्ना अपेक्षाकृत अधिक खूबसूरत थे। सब तय हो गया था। कहानी में राज खोसला ने कुछ बदलाव बताए, जिसको सलीम-जावेद ने स्वीकार कर लिया।

क्यों फिल्म से विनोद खन्ना को किया गया था बाहर?

स्टार कास्ट भी फाइनल हो गई। अचानक राज खोसला ने कहा कि विनोद खन्ना को दोस्ताना में लेना ठीक नहीं होगा। जब उनसे कारण पूछा गया तो बोले कि नायिका विनोद खन्ना जैसे खूबसूरत हीरो को छोड़कर अमिताभ बच्चन के साथ क्यों जाएगी। यहीं से फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा के चयन का रास्ता साफ हुआ।

Vinod Khanna

दोस्ताना ने दिए यादगार गीत-संगीत

17 अक्टूबर, 1980 को रिलीज हुई दोस्ताना को उसके गानों के लिए भी याद किया जाता है। सलीम खान कहते भी हैं कि राज कपूर के बाद राज खोसला को ही कहानी और उसमें संगीत के उपयोग की शानदार समझ थी। जिस तरह से राज कपूर संगीत को समझकर उसका उपयोग करते थे, उसी तरह राज खोसला भी करते थे।

रफी-किशोर की आवाज में कल्ट हुए गाने

जरा इस गाने पर गौर करिए- 'मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया, सुना है कि तू बेवफा हो गया'। आनंद बक्शी के इस गीत को मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) की आवाज ने अमर कर दिया। फिल्म में कहानी के जिस मोड़ पर इस गाने का उपयोग राज खोसला ने किया, वो बेहतरीन है।

इसी तरह से फिल्म का आरंभ भी एक गीत से ही होता है, जिसको मोहम्मद रफी और किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने आवाज दी है। आनंद बक्शी ने लिखा और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीत दिया। गाने के बोल हैं- 'सलामत रहे दोस्ताना हमारा'। मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ गाए गानों में ये गीत बेहद पसंद किया गया या कह सकते हैं कि अब भी किया जाता है।

तो जब करण जौहर कह रहे थे कि प्रेम त्रिकोण वाली फिल्में भारतीय दर्शक पसंद करते हैं तो उनके जेहन में अवश्य फिल्म दोस्ताना भी रही होगी, क्योंकि बहुत लंबे समय तक धर्मा प्रोडक्शन की सबसे हिट फिल्म दोस्ताना ही थी।