VB-GRAM G: छत्तीसगढ़ के गांवों की तस्वीर बदलने की तैयारी, शुरू हुआ बड़ा प्रशिक्षण अभियान

Published on 4 अग॰ 2026

रायपुर में जिला पंचायत सदस्यों को वीबी-जीरामजी अधिनियम 2025 का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योजना के तहत 125 दिन रोजगार और 300 रुपये मजदूरी का प्रावधान है।

रायपुर। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए रायपुर स्थित ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी), निमोरा में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 3 से 5 अगस्त तक चलने वाली इस तीन दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश के सभी निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य भाग ले रहे हैं।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को अधिनियम के प्रावधानों, उनकी जिम्मेदारियों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देना है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में योजना को बेहतर तरीके से लागू कर सकें।

विकसित भारत के लक्ष्य में पंचायत प्रतिनिधियों की अहम भूमिका

कार्यशाला में जिला पंचायतों की विभिन्न स्थायी समितियों के सभापति भी शामिल हुए। इस अवसर पर विकसित भारत-जीरामजी योजना के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि विजन@2047 को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 लागू किया गया है। इस कानून में ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार, आजीविका और समग्र विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार और 300 रुपये दैनिक मजदूरी

आयुक्त सिन्हा ने बताया कि अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इसके साथ ही मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत होने वाले सभी विकास कार्यों का चयन और अनुमोदन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा। इससे विकास कार्यों में जनभागीदारी बढ़ेगी और पारदर्शिता तथा जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।

जिला पंचायत सदस्यों को दिया जा रहा व्यवहारिक प्रशिक्षण

कार्यशाला के दूसरे दिन सरगुजा, रायपुर और बस्तर संभाग के जिला पंचायत सदस्यों ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान संयुक्त आयुक्त रामधन श्रीवास, एसआईआरडी के संकाय सदस्य आनंद रघुवंशी और अन्य मास्टर ट्रेनर्स ने प्रतिभागियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और उनके व्यवहारिक उपयोग की जानकारी दी। प्रशिक्षण सत्रों में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर योजना के संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

वीबी-जीरामजी योजना के इन प्रमुख विषयों पर हुआ प्रशिक्षण

कार्यशाला में प्रतिभागियों को वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 की अवधारणा और उद्देश्य, पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका, विकसित ग्राम पंचायत योजना का निर्माण, योजना के तहत स्वीकृत किए जाने वाले कार्यों, पात्र परिवारों के पंजीयन और ग्रामीण रोजगार कार्ड से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है।

इसके अलावा निगरानी और पर्यवेक्षण व्यवस्था, शिकायत निवारण प्रणाली, अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के साथ अभिसरण, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक अंकेक्षण, पारदर्शिता, जवाबदेही, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

ग्राम सभाओं को मिलेगा और अधिक अधिकार, ग्रामीण विकास को नई रफ्तार

इस कार्यशाला का उद्देश्य जिला पंचायत प्रतिनिधियों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यवहारिक समझ से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में वीबी-जीरामजी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें। अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्राम सभाओं की भूमिका और मजबूत होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और सतत विकास को नई गति मिलेगी, जिससे विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।