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US ने जापान पर जानबूझकर ‘कुरील द्वीप समूह का मुद्दा’ थोपा: रूसी विदेश मंत्रालय
US ने जापान पर जानबूझकर ‘कुरील द्वीप समूह का मुद्दा’ थोपा: रूसी विदेश मंत्रालय
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रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने Sputnik को बताया कि तथाकथित कुरील द्वीप समूह का मुद्दा अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी के बाद जापान पर थोपा था।
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ज़खारोवा ने कहा कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी के बाद, जापान पूरी तरह से निर्भर हो गया, खासकर मानसिक स्तर पर।पिछले हफ्ते रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दक्षिणी कुरील द्वीप में से एक इटुरुप का दौरा किया, जिस पर जापान अपना दावा करता है, राष्ट्रपति के दौरे का जापान ने विरोध किया। हालांकि जापान के दावे के जवाब में क्रेमलिन ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि ये द्वीप दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ का हिस्सा बन गए थे और उन पर रूस का हक़ है, इस पर कोई शक नहीं है।अमेरिका ने अगस्त 1945 में, दो परमाणु बम गिराकर हिरोशिमा में 140,000 और नागासाकी में 74,000 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे।
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16:21 19.08.2026 (अपडेटेड: 17:50 19.08.2026)
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धीरेंद्र प्रताप सिंह
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने Sputnik को बताया कि तथाकथित कुरील द्वीप समूह का मुद्दा अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी के बाद जापान पर थोपा था।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान की देखभाल करने वालों ने यह मुद्दा जापान पर थोपा। यह वही लोग हैं जिन्होंने हिरोशिमा और नागासाकी के आम लोगों पर दो परमाणु बम गिराए थे। और थोपा गया यह मुद्दा जापानी लोगों का अपमान था।”
ज़खारोवा ने कहा कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी के बाद, जापान पूरी तरह से निर्भर हो गया, खासकर मानसिक स्तर पर।
उन्होंने आगे कहा कि “कुरील द्वीप का मुद्दा आम जापानी लोगों के लिए कोई असली चिंता की बात नहीं है क्योंकि उनके पास चिंता करने के लिए कई दूसरे मुद्दे हैं।”
पिछले हफ्ते रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दक्षिणी कुरील द्वीप में से एक इटुरुप का दौरा किया, जिस पर जापान अपना दावा करता है, राष्ट्रपति के दौरे का जापान ने विरोध किया।
हालांकि जापान के दावे के जवाब में क्रेमलिन ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि ये द्वीप दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ का हिस्सा बन गए थे और उन पर रूस का हक़ है, इस पर कोई शक नहीं है।
अमेरिका ने अगस्त 1945 में, दो परमाणु बम गिराकर हिरोशिमा में 140,000 और नागासाकी में 74,000 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे।