UPI पर लागू होने वाले MDR चार्ज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नई व्यवस्था को लागू करने में अगर कोई कमी या समस्या सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने इस मुद्दे पर पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत भी की है।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, ताकि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। वित्त मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला UPI चार्ज नहीं है।
UPI पर GST को लेकर क्या है सरकार का कहना?
UPI MDR पर GST को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, MDR पर लागू होने वाला GST कोई अलग से UPI टैक्स नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, GST के दायरे में आने वाले कारोबारी इस पर दिए गए GST को Input Tax Credit (ITC) के जरिए एडजस्ट कर सकेंगे। अगर व्यवस्था को लेकर कोई समस्या सामने आती है, तो GST काउंसिल उस पर विचार कर सकती है।
क्या UPI की वजह से बढ़ेगा कैश ट्रांजैक्शन?
MDR लागू होने के बाद कैश लेनदेन बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल ऐसे किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के बावजूद डिजिटल पेमेंट और UPI का इस्तेमाल प्रभावित नहीं होगा।
15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर नया MDR ढांचा लागू होगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और सभी Person-to-Person यानी P2P ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन भी प्रभावित नहीं होंगे।
स्टॉक मार्केट में 0.02% MDR क्यों?
कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट पर 0.02% MDR तय किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। इसमें म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर्स से जुड़े भुगतान शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्टॉक मार्केट में यह दर तय करने से पहले SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श किया गया था। वहीं, नए चार्ज को लेकर ब्रोकरों की ओर से उठाई गई चिंताओं की SEBI समीक्षा कर सकता है।
कुल मिलाकर, सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि MDR की नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी आम ग्राहक के लिए UPI भुगतान की लागत सीधे न बढ़े और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।