UP Fake Medicine Scam: यूपी में नकली दवाओं का बड़ा खेल! रद्द लाइसेंस पर चल रहा करोड़ों का कारोबार, लखनऊ से गोरखपुर तक फैला नेटवर्क - Haribhoomi

Published on 27 जुल॰ 2026

उत्तर प्रदेश में रद्द लाइसेंस के सहारे चल रहे करोड़ों के नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। बीपी और लिवर जैसी बीमारियों की जाली दवाएं फर्जी बिलिंग के जरिए बाजार में खपाई जा रही थीं।FSDA की जांच में लखनऊ से गोरखपुर, उत्तराखंड और हिमाचल तक फैले इस जानलेवा नेटवर्क के काले खेल से पर्दा उठा है।

UP Fake Medicine Racket

जांच में पता चला है कि नकली दवाओं का मुख्य निर्माण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हो रहा था।

  • Published: 27 Jul 2026, 03:00 PM IST
  • Last Updated: 27 Jul 2026, 03:02 PM IST

उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के एक बहुत बड़े और खतरनाक सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच में सामने आया है कि जिन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस किसी कारण से रद्द कर दिए गए थे, उन्हीं रद्द लाइसेंसों के नंबर पर फर्जी बिलिंग कर करोड़ों रुपये का काला कारोबार चलाया जा रहा था।

​यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज और आगरा से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ है। गिरोह के लोग ब्लड प्रेशर (BP) और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियों की नकली दवाएं बाजार में खपा रहे थे, जिससे आम मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

​रद्द लाइसेंस पर 8 फीसदी कमीशन का खेल और लखनऊ से जुड़े तार 
FSDA की जांच रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के शिव शक्ति मेडिकल स्टोर का लाइसेंस 5 जनवरी को ही रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद अमीनाबाद स्थित 'विद्या फार्मा' के संचालक प्रियांशु और सुधांशु इस रद्द लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल कर दवाओं की फर्जी आपूर्ति करते रहे।

​इसके एवज में दुकान संचालक को 3 से 8 फीसदी तक का कमीशन दिया जाता था, जबकि नकली दवाएं पहुंचाने वाले हरमीत और साहिल को 2 फीसदी का कमीशन मिलता था। यही दवाएं बाद में लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर के व्यापारियों तक भेजी जा रही थीं।

​बाजार में बीपी और फैटी लिवर की नकली दवाओं की भरमार 
​जांच में खुलासा हुआ है कि बीपी नियंत्रित करने वाली लोकप्रिय दवा 'तेल्मा एम' (बैच नंबर 18240682) और 'तेल्मा एच' (बैच नंबर 18240905 और 18240628) की फर्जी बिलिंग की गई है। आशंका जताई जा रही है कि इन बैच नंबरों के तहत बड़ी मात्रा में बीपी की नकली दवाएं बाजार में बिक चुकी हैं।

​इसके अलावा, फैटी लिवर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा 'इवियन 40' को भी अवैध तरीके से तैयार कर खपाया जा रहा था।

​उत्तराखंड-हिमाचल से सप्लाई, मेरठ और बागपत में पैकिंग 
​जांच में पता चला है कि नकली दवाओं का मुख्य निर्माण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हो रहा था। उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित 'आरएस ग्लोबल फार्मा' और बागपत की 'प्रेस्कॉट फार्मा जेल प्राइवेट लिमिटेड' का नाम इसमें सामने आया है।

​हाल ही में मेरठ के खरदौनी में की गई छापेमारी के दौरान दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद हुई हैं। गिरोह का तरीका यह था कि जिन मेडिकल स्टोरों की बिक्री औसत कम होती थी या लाइसेंस रद्द हो चुका होता था, उन्हें लालच देकर फर्जी बिलिंग के जाल में फंसाया जाता था।

​FSDA की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कई शहरों में जांच शुरू 
​फर्जी ट्रेडिंग और जानलेवा दवाओं के इस खेल को देखते हुए FSDA की टीमों ने लखनऊ के अलावा प्रयागराज, आगरा, गोरखपुर और मेरठ समेत कई जिलों में गहन जांच और छापेमारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।