UP राज्यसभा चुनाव: स्मृति ईरानी से हरीश द्विवेदी तक, BJP किसे भेजेगी संसद? कितने दावेदार लाइन में, समझें गणित

Published on 25 सित॰ 2026

Time Published: Friday, September 25, 2026, 19:41 [IST]

UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। सूबे की सियासी हलचल तेज हो चुकी है और जोड़-तोड़ का गणित बिछाया जाने लगा है। विधानसभा में संख्याबल के दम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) आसानी से 8 सीटें अपने नाम कर सकती है। मौजूदा समय में बीजेपी के 7 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जबकि एक सीट पहले से खाली पड़ी है। पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुराने चेहरों में से किसे दोबारा मौका मिलेगा और किन नए दिग्गजों की लॉटरी लगेगी।

मौजूदा समीकरण में इन 10 सीटों में आठ बीजेपी के पास, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है। एक बीजेपी सीट दिनेश शर्मा के अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद इस्तीफे से खाली हुई थी। यानी बीजेपी के सामने पुराने चेहरों को दोबारा मौका देने के साथ कुछ नए नाम लाने की भी गुंजाइश है।

UP Rajya Sabha Election 2026

UP में कौन-कौन से BJP सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है?

बीजेपी के जिन 7 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है, उनमें अरूण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, पूर्व डीजीपी बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। इसके अलावा डॉ. दिनेश शर्मा के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल बनने के बाद एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है।

इन 7 निवर्तमान सांसदों में दो केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान अगर बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी को मंत्री पद पर बरकरार रखा जाता है, तो उनका दोबारा उच्च सदन जाना तय है। वहीं, पार्टी 4 से 5 सीटों पर नए चेहरों को लाकर सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी में है।

बीएल वर्मा और हरदीप पुरी: किसे मिलेगा दोबारा मौका?

केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली लोध (OBC) समुदाय से आते हैं। शीर्ष नेतृत्व से उनकी नजदीकी और लोध वोटबैंक को साधे रखने के लिए पार्टी उन्हें दोबारा मौका दे सकती है। दूसरी ओर, 74 वर्ष के हो चुके कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर थोड़ी कशमकश है।

सिख समुदाय में पकड़ और पंजाब के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से वे मजबूत दावेदार हैं, लेकिन बीजेपी का 75 साल का अनकहा नियम उनके लिए अड़चन बन सकता है। अगर उन्हें विराम दिया जाता है, तो किसी नए चेहरे की एंट्री होगी।

दलित और ओबीसी चेहरों का क्या होगा?

यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। वे राज्य में बड़ा दलित चेहरा हैं और अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सपा नेतृत्व पर लगातार हमलावर रहने के कारण वे दोबारा राज्यसभा भेजे जाने के मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं।

महिला कोटे से आने वाली दो महिला सांसदों-सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य के भविष्य पर भी चर्चा तेज है।

  • गीता शाक्य: ओबीसी बिरादरी से आती हैं और पार्टी के ओबीसी मोर्चे की कमान संभाल चुकी हैं। उनका दोबारा जाना लगभग तय माना जा रहा है।
  • सीमा द्विवेदी: जौनपुर से तीन बार विधायक रह चुकी ब्राह्मण चेहरा हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा में रिपीट करने के बजाय आगामी यूपी विधानसभा चुनाव के मैदान में उतार सकती है।

स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी: नए चेहरों में सबसे आगे

राज्यसभा की नई दावेदारियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ा है। हाल ही में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ-साथ हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभारी भी बनाया गया है। ऐसे में महिला और तेजतर्रार नेता के रूप में उन्हें यूपी से राज्यसभा भेजा जा सकता है।

ब्राह्मण समुदाय को साधे रखने के लिए हरीश द्विवेदी का नाम भी रेस में काफी आगे है। संगठन में हरीश द्विवेदी की सक्रियता और कद तेजी से बढ़ा है। उन्हें दो-दो राज्यों का प्रभार सौंपा गया है। पूर्वांचल में ब्राह्मण समाज के बीच सियासी संदेश देने के लिए बीजेपी उन पर दांव लगा सकती है।

नीरज शेखर और अरुण सिंह पर फंसा पेच

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए नीरज शेखर फिर से उच्च सदन जाने की होड़ में हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व इस दुविधा में है कि उन्हें राज्यसभा में बनाए रखा जाए या फिर उनके परिवार को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में मौका दिया जाए।

पूर्वांचल से आने वाले और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह भी टिकट के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। वे लंबे समय तक बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक,

"पार्टी इस बार सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले लेगी। कम से कम चार से पांच सीटें नए उम्मीदवारों को दी जा सकती हैं।"

आठ सीटों में कितने नए चेहरे आएंगे?

यूपी की 10 सीटों के चुनाव में बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि उम्मीदवारों के चयन और सामाजिक संतुलन का भी है। मौजूदा विधानसभा गणित बीजेपी गठबंधन को आठ सीटों की स्थिति में रखता है, लेकिन कौन पुराने चेहरे लौटेंगे और किन नए नेताओं को मौका मिलेगा, यह पार्टी की आधिकारिक सूची से ही साफ होगा।

अभी स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, बीएल वर्मा, बृजलाल, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर और अरुण सिंह जैसे नाम अलग-अलग वजहों से चर्चा में हैं। लेकिन राज्यसभा पहुंचने वाले नामों की अंतिम सूची अभी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित दावेदारों की दौड़ के तौर पर देखना ही सही होगा।