उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने व हरित परिवहन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से 238 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यह योजना केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव स्कीम तथा उत्तर प्रदेश ईवी मैन्युफैक्चरिंग एवं मोबिलिटी पॉलिसी-2022 के तहत लागू की जा रही है।
प्रस्ताव के अनुसार पहले चरण में 238 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जिन पर कुल 714 चार्जर लगाए जाएंगे। इन स्टेशनों के संचालन एवं रखरखाव के लिए 10 वर्ष का अनुबंध किया जाएगा। सरकारी भूमि पर स्थापित होने वाले चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग केवल ईवी चार्जिंग के लिए किया जाएगा। संबंधित विभागों से भूमि उपयोग के बदले एक रुपये प्रति किलोवाट की दर से शुल्क लिया जाएगा।
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योजना के तहत चार्जिंग स्टेशनों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सरकारी कार्यालयों में स्थापित स्टेशनों के लिए अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवीएसई (चार्जिंग उपकरण) पर 100 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित होने वाले चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी श्रेणीवार सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
सरकार का लक्ष्य शहरों के साथ-साथ प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर भी सुदृढ़ चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन मिल सके। राज्य सरकार यूपी को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और विकास का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके तहत व्यापक चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क विकसित करने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने, ईवी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
इन शहरों में स्थापित होंगे चार्जिंग स्टेशन
गौतमबुद्धनगर में 39, लखनऊ में 36, मेरठ में 35, गोरखपुर में 32, वाराणसी में 28, आगरा में 21, मथुरा में 14, प्रयागराज में 13, कानपुर नगर में 12, गाजियाबाद में छह और कानपुर देहात में दो स्थानों सहित कुल 238 स्थानों की पहचान की गई है। इनमें नोएडा, लखनऊ नगर निगम, वाराणसी नगर निगम, मेरठ नगर निगम और गोरखपुर नगर निगम सहित कई सरकारी संस्थाओं की भूमि शामिल है। मुख्य सचिव स्तर पर विभिन्न विभागों से उपलब्ध सरकारी भूमि का ब्योरा मांगा गया है, ताकि चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।