स्लोवाकिया समेत चार यूरोपीय देशों (V4) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे सराहा।
स्लोवाकिया समेत चार यूरोपीय देशों (V4) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।
- Published: 22 Sep 2026, 08:20 AM IST
- Last Updated: 22 Sep 2026, 08:20 AM IST
UN Security Council: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की मजबूत होती दावेदारी को यूरोप से एक और ताकतवर समर्थन मिला है। स्लोवाकिया ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक मंच पर भारत को यूएनएससी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था में स्थायी तौर पर शामिल किया जाना चाहिए। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने इसके पीछे तर्क दिया कि 'ग्लोबल साउथ' के सबसे बड़े प्रतिनिधि और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में भारत पूरी तरह से इस स्थान का हकदार है। यह कूटनीतिक समर्थन न्यूयॉर्क में चल रही 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान सामने आया है।
पहली बार आयोजित हुई 'V4+इंडिया' उच्च-स्तरीय बैठक
यह पूरा घटनाक्रम विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विसेग्राद ग्रुप (V4) के बीच हुई एक ऐतिहासिक पहली उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान देखने को मिला। इस खास वी4 समूह में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेकिया (चेक गणराज्य) शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस विशेष सप्ताह के दौरान इन चारों यूरोपीय देशों ने नए 'V4+इंडिया' प्रारूप के अंतर्गत भारत के साथ अपनी पहली मंत्री-स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया, जिसे कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक को बताया ऐतिहासिक
इस उच्च-स्तरीय चर्चा को ऐतिहासिक करार देते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच कूटनीति, अर्थव्यवस्था, रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान, कनेक्टिविटी और आपसी जन-सरोकार के विषयों पर खुलकर बात हुई।
- बैठक में यह आम सहमति बनी कि दोनों पक्ष हर साल अपने विदेश मंत्रियों के स्तर पर मिलेंगे और आपसी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए एक वार्षिक बिजनेस फोरम की शुरुआत करेंगे।
- रक्षा क्षेत्र में वी4 देशों के साथ भारत का पुराना और बेहद भरोसेमंद इतिहास रहा है, जिसे अब आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार नई गति दी जाएगी। इसके साथ ही, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के मोर्चे पर भी आपसी सहयोग को गहरा किया जाएगा।
- यूरोपीय संघ के साथ भारत के प्रगाढ़ होते रिश्तों के बीच, यूक्रेन के हालात और खाड़ी देशों के घटनाक्रम जैसे गंभीर वैश्विक संकटों पर भी बहुत उपयोगी चर्चा हुई।
वैश्विक कूटनीति में V4 देशों का बढ़ता महत्व
अंतरराष्ट्रीय पटल पर वी4 देशों के औद्योगिक और राजनीतिक वजन पर प्रकाश डालते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि भारत इन चारों देशों को उच्च तकनीक, मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था और बेहतरीन नवाचार क्षमताओं वाले विश्वसनीय साझीदार के रूप में देखता है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक और जरूरी सुधारों के साथ-साथ खुद के लिए स्थायी सदस्यता की पुरजोर मांग करता रहा है।
वर्तमान में यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन) हैं, जबकि 10 अन्य अस्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। भारत ने इसी साल जुलाई में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सीट की उम्मीदवारी का औपचारिक अभियान भी शुरू किया है।
‘We all agree as V4 countries that India as a part of the Global South, upcoming superpower in the Indo-Pacific region, must be at the table as the permanent member of the UN Security Council’
- Foreign Minister Juraj Blanár of Slovakia after the first V4 + India FMM #UNGA81… pic.twitter.com/QwFsjlXWYC
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 21, 2026
मजबूत भविष्य के सहयोग पर बनी मुहर
इस उच्च-स्तरीय विचार-विमर्श में पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, हंगरी की उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री डॉ. अनीता ओर्बन, स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार और चेकिया के विदेश मंत्री पेट्र मैसिंका ने सक्रिय रूप से भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे विदेश मंत्री जयशंकर न्यूयॉर्क में 26 सितंबर को जनरल डिबेट को संबोधित करने वाले हैं।