Udaipur: डॉ. इकबाल सक्का की अनोखी कलाकारी, मूंग के दाने से भी छोटे मक्का-मदीना के मॉडल, सऊदी PM को भेंट करेंगे

Published on 22 अग॰ 2026

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्वर्ण शिल्पी और 211 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके प्रोफेसर डॉ. इकबाल सक्का ने एक बार फिर अपनी सूक्ष्म कला का अनोखा नमूना पेश किया है। उन्होंने महज 1 मिलीमीटर आकार के मक्का शरीफ और मदीना शरीफ के मॉडल तैयार किए हैं। मूंग के दाने से भी छोटे इन मॉडल्स को देखने के लिए सूक्ष्म लेंस की जरूरत पड़ती है।



डॉ. सक्का ने सोने से खाना-ए-काबा का सूक्ष्म मॉडल तैयार किया है। इसमें बारीक मीनारों के साथ सोने का दरवाजा बनाया गया है। काबा शरीफ को काली मखमल और उनके द्वारा डिजाइन की गई पोशाक से सजाकर वास्तविक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।

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डॉ. सक्का के अनुसार मक्का शरीफ के दरवाजे की पूर्वी दीवार पर जिस तरह संग-ए-अस्वद चांदी की फ्रेम में जड़ा है, उसी तर्ज पर उन्होंने 1 मिलीमीटर के मक्का मॉडल के दरवाजे पर भी चांदी की फ्रेम तैयार की है। इसमें सऊदी अरब से लाए गए एक छोटे पत्थर की बारीक कटिंग कर उसे जड़ा गया है। यह बेहद सूक्ष्म काम सामान्य आंखों से स्पष्ट नजर नहीं आता और इसे लेंस की मदद से देखा जा सकता है। इसी तरह उन्होंने 1 मिलीमीटर आकार का मदीना शरीफ का मॉडल भी तैयार किया है। इसमें बारीक मीनारों के साथ हरे रंग का गुंबद बनाया गया है। गुंबद-ए-खिजरा के ऊपर छोटी सी खिड़की भी तैयार की गई है, जो लेंस से देखने पर मदीना-ए-मुनव्वरा के स्वरूप की झलक देती है।

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इन सूक्ष्म कलाकृतियों के साथ भारत का तिरंगा और सऊदी अरब का राष्ट्रीय ध्वज भी प्रदर्शित किया गया है। डॉ. सक्का का कहना है कि इन कलाकृतियों के जरिए वे भारत और सऊदी अरब के बीच आपसी प्रेम, सम्मान और सांस्कृतिक संबंधों का संदेश देना चाहते हैं। डॉ. इकबाल सक्का इन अनमोल कलाकृतियों को भारतवासियों की ओर से सऊदी अरब के युवराज एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान को भेंट करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने दिल्ली स्थित सऊदी अरब दूतावास के राजदूत को पत्र भेजा है। साथ ही सऊदी प्रधानमंत्री को भी पत्र प्रेषित किया है।



मक्का-मदीना के चांदी के मॉडल तैयार करने में डॉ. सक्का को करीब  7 दिन का समय लगा। इनके निर्माण में लगभग 2 ग्राम चांदी और 100 मिलीग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है। इतने छोटे आकार में मीनार, दरवाजा, गुंबद और अन्य बारीक आकृतियां तैयार करना उनकी सूक्ष्म स्वर्ण शिल्प कला की खास पहचान है। डॉ. सक्का का कहना है कि इन कलाकृतियों के माध्यम से वे दोनों देशों के बीच प्रेम, सम्मान और सांस्कृतिक भाईचारे का संदेश दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं।