Trigrahi Yoga: त्रिग्रही योग क्या है... एक ही राशि में 3 ग्रह आएं तो क्या होता है?

Published on 8 अग॰ 2026

Trigrahi Yoga benefits: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी युति का विशेष महत्व बताया गया है. आकाशमंडल में ग्रह लगातार अपनी राशि बदलते रहते हैं. इस गोचर के दौरान कई बार ऐसा समय आता है जब दो या दो से अधिक ग्रह एक ही राशि में प्रवेश कर जाते हैं. जब ज्योतिषीय गणना के अनुसार किसी एक ही राशि में तीन ग्रह एक साथ विराजमान होते हैं, तो इसे त्रिग्रही योग कहा जाता है. ज्योतिष में त्रिग्रही योग को बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली माना गया है. यह योग शुभ होगा या अशुभ, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन से तीन ग्रह एक साथ आए हैं और वे किस राशि व भाव में बैठे हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि त्रिग्रही योग क्या है और जब एक ही राशि में तीन ग्रह मिलते हैं, तो जातक के जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.

क्या होता है त्रिग्रही योग?

ज्योतिष में किसी कुंडली में ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व माना जाता है. जब तीन ग्रह एक ही राशि में आकर एक साथ स्थित होते हैं, तो उनकी संयुक्त स्थिति को त्रिग्रही योग कहा जाता है. यहां त्रि का अर्थ तीन और ग्रही का संबंध ग्रहों से माना जाता है. यानी एक ही राशि में तीन ग्रहों की युति होने पर त्रिग्रही योग बनता है. हालांकि इस योग को केवल ग्रहों की संख्या देखकर शुभ या अशुभ नहीं कहा जा सकता. इसका फल इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन से तीन ग्रह एक साथ हैं, वे कुंडली में किस भाव में बैठे हैं और उनकी आपसी स्थिति कैसी है.

तीन ग्रहों की युति क्यों होती है खास?

हर ग्रह की अपनी प्रकृति और कारकत्व माना गया है. सूर्य को आत्मविश्वास, पिता और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है. चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक माना जाता है. मंगल साहस और ऊर्जा से संबंधित है, जबकि बुध बुद्धि और वाणी का प्रतिनिधित्व करता है.इसी तरह गुरु को ज्ञान और विस्तार, शुक्र को प्रेम, सुख-सुविधा और कला, शनि को कर्म और अनुशासन, जबकि राहु-केतु को छाया ग्रह माना जाता है. जब इनमें से तीन ग्रह एक ही राशि में आ जाते हैं तो उनके गुण एक साथ सक्रिय होने पर अलग-अलग प्रभाव देते हैं. अगर ग्रह आपस में मित्र हों और मजबूत स्थिति में हों तो परिणाम सकारात्मक माने जा सकते हैं. वहीं ग्रहों के बीच शत्रुता या कमजोर स्थिति होने पर चुनौतीपूर्ण परिणाम भी बताए जाते हैं.

क्या त्रिग्रही योग हमेशा शुभ होता है?

ऐसा नहीं है कि तीन ग्रहों का एक ही राशि में होना हमेशा शुभ फल देता है. त्रिग्रही योग का फल पूरी कुंडली के आधार पर देखा जाता है.ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति, राशि के स्वामी, संबंधित भाव, ग्रहों का बल, दृष्टि और अन्य योगों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

गोचर में त्रिग्रही योग बने तो क्या होता है?

जब गोचर के दौरान तीन ग्रह एक ही राशि में आ जाते हैं, तब भी ज्योतिष में इसे त्रिग्रही योग कहा जाता है. इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म राशि और कुंडली में उस राशि की स्थिति के आधार पर देखा जाता है. गोचर में बनने वाला यह योग सभी राशियों के लिए समान प्रभाव वाला नहीं माना जाता. किसी राशि के लिए यह करियर और धन से जुड़े अवसरों का संकेत माना जा सकता है, जबकि किसी दूसरी राशि के लिए मानसिक दबाव या निर्णयों में बदलाव की स्थिति बन सकती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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