'असली TMC कौन?' ममता बनर्जी ने EC को लिखी चिट्ठी, बागी गुट के बारे में कर डाला ये खुलासा...

Published on 30 जुल॰ 2026

Mamata Banerjee:  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर 'असली पार्टी कौन' को लेकर चल रहे विवाद पर एक बार फिर ममता बनर्जी ने हुंकार भरी है. पूर्व सीएम ने विवाद के बीच चुनाव आयोग (EC) को पत्र लिखकर जांच प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है. उन्होंने आयोग से कहा है कि प्रतिद्वंद्वी गुट को अब और समय न दिया जाए और मामले का जल्द निपटारा किया जाए.

जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा है कि उनकी पार्टी तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब पहले ही दाखिल कर चुकी है. इसके बावजूद प्रतिद्वंद्वी गुट को बार-बार अतिरिक्त समय दिए जाने से निष्पक्ष प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि अब इस मामले को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए. उन्होंने विपक्षी गुट पर मामले में देरी करने का आरोप लगाया है.

Trinamool Congress (TMC) chief Mamata Banerjee has written a letter to Election Commission of India (ECI) Secretary Ashwani Kumar Mohal, urging the poll panel to conclude the inquiry initiated by it.@AITCofficial | @MamataOfficial | #MamataBanerjee | #TrinamoolCongress |… pic.twitter.com/nhOJeu07f9

— United News of India (@uniindianews) July 29, 2026

ममता ने पत्र में क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता बनर्जी ने आयोग से कहा है कि मामले का जल्द निपटारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राजनीतिक स्पष्टता के लिए जरूरी है. दरअसल, इसके पीछे उनका तर्क है कि लगातार समय बढ़ाने से गलत संदेश जाएगा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं. उन्होंने विपक्षी गुट पर मामले में देरी करने और आयोग को बरगलाने का आरोप भी लगाया है.

क्या है पूरा मामला?

बता दें ये नकली और असली टीएमसी का विवाद तब शुरू हुआ जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के सामने दावा किया कि वही 'असली TMC' है. इसके बाद आयोग ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और जवाब मांगे. अब इस मसले पर ममता बनर्जी का कहना है कि बागी गुट को पहले ही समय सीमा बढ़ाकर दी जा चुकी है, इसलिए अब और मोहलत देने का कोई औचित्य नहीं है. इससे इस मसले पर वेस्ट बंगाल की आम जनमा में भ्रम पैदा होगा और विपक्षी गुट आयोग को बरगला भी सकते हैं.

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चुनाव आयोग के फैसले पर रहेगी नजर

ममता बनर्जी की चुनाव आयोग को लिखे इस शिकायती पत्र के बाद अब सभी की नजर चुनाव आयोग पर है. आयोग को दोनों पक्षों के दावों, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद यह तय करना होगा कि पार्टी की मान्यता और उससे जुड़े अधिकार किस गुट के पास रहेंगे. फिलहाल आयोग ने अंतिम फैसला नहीं सुनाया है. न ही आयोग ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान दिया है. अब देखने होगा कि चुनाव आयोग किस गुट को टीएमसी का चुनाव चिन्ह और मान्यता देखता है.

FAQ

Q1. 'रियल TMC' विवाद क्या है?

A. यह विवाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो गुटों के बीच पार्टी की वास्तविक पहचान और मान्यता को लेकर है. एक ओर ममता बनर्जी का नेतृत्व वाला गुट है, जबकि दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट खुद को 'असली TMC' होने का दावा कर रहा है. 

Q2. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी क्यों लिखी?

A. ममता बनर्जी ने आयोग से जांच जल्द पूरी करने और प्रतिद्वंद्वी गुट को बार-बार अतिरिक्त समय न देने की मांग की है. उनका कहना है कि उनकी पार्टी तय समय में जवाब दाखिल कर चुकी है, जबकि दूसरे गुट को कई बार समय दिया गया है.

Q3. क्या चुनाव आयोग तय करेगा कि असली TMC कौन है?

A. हां. यदि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के दो या अधिक गुट पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा करते हैं, तो अंतिम निर्णय चुनाव आयोग करता है. 

Q4. चुनाव आयोग फैसला किन आधारों पर करता है?

A. आयोग आमतौर पर यह देखता है कि किस गुट को पार्टी के संगठन और निर्वाचित प्रतिनिधियों (सांसद, विधायक आदि) का बहुमत समर्थन प्राप्त है. पार्टी के संविधान, संगठनात्मक ढांचे और अन्य दस्तावेज भी देखे जाते हैं. 

Q5. क्या आयोग किसी गुट से चुनाव चिह्न भी छीन सकता है?

A. हां. यदि आयोग को लगता है कि विवाद का तत्काल समाधान संभव नहीं है या कोई गुट असली पार्टी साबित नहीं हो पाया है, तो वह मूल चुनाव चिह्न फ्रीज कर सकता है और दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी चुनाव चिह्न दे सकता है. बाद में अंतिम निर्णय के बाद स्थायी व्यवस्था की जाती है.

Q6. क्या पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं?

A. हां. शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), समाजवादी पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) जैसे कई दलों में विभाजन के बाद चुनाव आयोग को यह तय करना पड़ा कि असली पार्टी और उसका चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा.

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ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है?

इस तरह के विवादों में सबसे अहम प्रावधान Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 का पैराग्राफ 15 है. इसके तहत यदि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में विभाजन हो जाता है और एक से अधिक गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करते हैं, तो भारत निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह सभी तथ्यों, दस्तावेजों और दावों की जांच कर तय करे कि असली राजनीतिक दल कौन-सा है.

आयोग जांच के दौरान कई पहलुओं पर विचार करता है, जैसे...

-पार्टी संगठन में किस गुट का बहुमत है.
-सांसदों और विधायकों का समर्थन किस गुट के पास है.
-पार्टी का संविधान और आंतरिक नियम क्या कहते हैं.
-दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेज और साक्ष्य.

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