पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार दबाव में है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
Stock market today crash
- Published: 22 Jul 2026, 10:11 AM IST
- Last Updated: 22 Jul 2026, 10:11 AM IST
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भी कमजोरी का दौर जारी रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कमजोर शुरुआत की। कारोबार शुरू होते ही प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए। निवेशकों की निगाहें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हुई हैं, जिनका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
सुबह के कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 599 अंकों से अधिक टूटकर 76,870 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 24,100 के नीचे फिसल गया और करीब 164 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके कारण कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जाती है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर नकारात्मक असर डाल रही है।
किन शेयरों में दिखी कमजोरी?
शुरुआती कारोबार में एविएशन और फार्मा सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में दबाव देखा गया। इंडिगो और सन फार्मा के शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। कई अन्य सेक्टरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत
एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा। जापान का टॉपिक्स इंडेक्स बढ़त में रहा, जबकि हांगकांग का हेंगसेंग इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। चीन के शंघाई कंपोजिट में हल्की बढ़त दर्ज की गई। यूरोपीय बाजारों के वायदा संकेतों में भी सीमित मजबूती देखने को मिली।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी रहेगी।