Stock Market Crash: भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है।
Stock Market Crash: भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है।
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Stock Market Crash: (ANI)
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार के बाद बिकवाली तेज हो गई और सेंसेक्स 909 अंक से ज्यादा टूटकर 71,729 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 323 अंक गिरकर 22,280 के स्तर पर आ गया. बाजार में इस गिरावट के पीछे RBI की सख्त मौद्रिक नीति, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेत प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं.
RBI के फैसले का बाजार पर असर
RBI ने हाल में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 फीसद कर दिया गया है. यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है. इसके अलावा, RBI ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है. इस फैसले के बाद निवेशकों में यह चिंता बढ़ी है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं. इससे शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
बाजार पर FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का भी बड़ा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने पिछले छह कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹43,395 करोड़ की निकासी की है. इससे खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा है.
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 102-103 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. महंगा कच्चा तेल भारत के लिए चिंता बढ़ाता है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
इन सेक्टर्स में ज्यादा गिरावट
गुरुवार को बिकवाली व्यापक रही. मेटल, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, फार्मा और हेल्थकेयर समेत कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला. जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी मेटल करीब 3.23 फीसदी और ऑयल-गैस इंडेक्स करीब 2.60 फीसदी नीचे था.
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमत, RBI की नीति, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी. वैश्विक बॉन्ड यील्ड और अमेरिका समेत दूसरे बाजारों के संकेत भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं.