क्या आप जानते हैं कि रूपी सोरेन भी लड़ी थीं लोकसभा चुनाव? बाबूलाल मरांडी से हुआ था मुकाबला

Published on 8 अक्टू॰ 2026

रांची: झारखंड की राजनीति में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के परिवार का दुमका से गहरा और पुराना रिश्ता रहा है. शिबू सोरेन की धर्मपत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन किस्कू ने अपने जीवन में केवल एक बार चुनाव लड़ा था. वर्ष 1999 में उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दुमका लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था. इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता और उस समय केंद्र सरकार में मंत्री रहे बाबूलाल मरांडी से हुआ था. कांटे के मुकाबले में रूपी सोरेन महज 4648 मतों के अंतर से चुनाव हार गयी थीं.

1999 में शिबू सोरेन की परंपरागत सीट पर उतरीं

वर्ष 1999 का दुमका लोकसभा चुनाव झामुमो के लिए काफी महत्वपूर्ण था. दुमका को लंबे समय से शिबू सोरेन की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता रहा है. ऐसे में पार्टी ने उनकी पत्नी रूपी सोरेन को मैदान में उतारा. दूसरी ओर भाजपा ने उस समय के केंद्रीय मंत्री और पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल बाबूलाल मरांडी को उम्मीदवार बनाया. चुनाव में दोनों के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला.

सिर्फ 4648 वोट से मिली हार

चुनाव परिणाम में भाजपा के बाबूलाल मरांडी को 2,01,141 वोट मिले, जबकि झामुमो की रूपी सोरेन किस्कू को 1,96,493 मत प्राप्त हुए. दोनों उम्मीदवारों के बीच केवल 4648 वोट का अंतर रहा. इस तरह रूपी सोरेन अपने एकमात्र चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को कड़ी चुनौती दी. चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश भी की थी.

दुमका से रहा गहरा पारिवारिक रिश्ता

रूपी सोरेन का दुमका से रिश्ता केवल चुनाव तक सीमित नहीं था. शिबू सोरेन ने दुमका को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया था. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चले लंबे आंदोलन में दुमका महत्वपूर्ण केंद्र रहा. शिबू सोरेन ने इसी क्षेत्र से आंदोलन को मजबूत किया और अलग झारखंड राज्य के गठन की राजनीतिक लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

शिबू सोरेन आठ बार रहे सांसद

दुमका लोकसभा सीट शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही. वह इस सीट से आठ बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. लंबे समय तक दुमका में सक्रिय रहने के कारण उनका यहां व्यापक राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव बना. इसी दौरान रूपी सोरेन भी उनके साथ राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में नजर आती रहीं. दुमका के खिजुरिया स्थित आवास से भी सोरेन परिवार का पुराना रिश्ता रहा है.

बेटों ने भी दुमका की राजनीति संभाली

रूपी सोरेन और शिबू सोरेन के तीनों बेटों का भी दुमका की राजनीति से सीधा जुड़ाव रहा. उनके बड़े पुत्र स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जामा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक बने. इसके बाद हेमंत सोरेन ने वर्ष 2009 में दुमका विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया. बाद में उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और झारखंड के मुख्यमंत्री बने.

बसंत सोरेन भी लगातार दूसरी बार विधायक

शिबू और रूपी सोरेन के छोटे पुत्र बसंत सोरेन भी दुमका की राजनीति में सक्रिय रहे हैं. वर्तमान में वह दुमका विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक हैं. इस तरह एक ही परिवार की कई पीढ़ियों ने दुमका का राजनीतिक प्रतिनिधित्व किया है. शिबू सोरेन की लोकसभा राजनीति से लेकर दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन तक, दुमका सोरेन परिवार की राजनीतिक यात्रा का अहम केंद्र रहा है.

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एक चुनाव, लेकिन लंबा राजनीतिक जुड़ाव

रूपी सोरेन ने भले ही अपने जीवन में केवल एक बार चुनाव लड़ा, लेकिन दुमका से उनका जुड़ाव उससे कहीं पुराना और व्यापक था. 1999 के चुनाव में उन्होंने बाबूलाल मरांडी को कड़ी टक्कर दी. चुनाव परिणाम में मामूली अंतर से हार के बावजूद उनका राजनीतिक महत्व परिवार और पार्टी के संदर्भ में बना रहा. दुमका ने सोरेन परिवार को लगातार राजनीतिक जमीन दी और परिवार के सदस्यों ने भी अलग-अलग दौर में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. यही वजह है कि रूपी सोरेन का नाम भी दुमका और सोरेन परिवार के राजनीतिक इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता.

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