फाजिल्का की एक महिला अपने पति की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों से जान का खतरा बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंची। महिला का आरोप था कि पति की हत्या के दोषी पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद उसे और उसके परिवार को धमकियां दे रहे हैं। माम
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सुखविंदर कौर के पति पुष्पिंदर सिंह की हत्या हुई थी। इस मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। सजा काटने के दौरान दोषियों जसविंदर सिंह उर्फ जस्सा और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी को जेल प्रशासन की ओर से पैरोल दी गई।
याचिकाकर्ता सुखविंदर कौर का आरोप था कि पैरोल पर बाहर आने के बाद दोनों ने उसे और परिवार को डराना-धमकाना शुरू कर दिया। जान-माल का खतरा देखते हुए सुखविंदर कौर ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रुख किया और पुलिस सुरक्षा की मांग की।

अदालत में दोनों पक्षों ने इस तरह रखी दलीलें
- याचिकाकर्ता ने कहा- पैरोल पर बाहर आकर धमकाया: पीड़िता की ओर से वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसके पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों ने पैरोल का फायदा उठाकर पीड़ित परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं। ऐसे में पीड़िता के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए फाजिल्का पुलिस को तुरंत सुरक्षा देने के निर्देश जारी किए जाएं।
- सरकार बोली- एक जेल तो दूसरे की मौत हुई: पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को तीनों प्रतिवादियों की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जसविंदर सिंह उर्फ जस्सा की मृत्यु हो चुकी है। वहीं, गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की पैरोल अवधि खत्म/रद्द होने के बाद उसने आत्मसमर्पण कर दिया था और वह वर्तमान में सेंट्रल जेल, फिरोजपुर में बंद है।
- लखविंदर सिंह उस हत्या के मामले में दोषी नहीं: सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि लखविंदर सिंह उस हत्या के मामले में दोषी नहीं है, जिसमें जसविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह को सजा सुनाई गई थी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि स्थानीय पुलिस, यानी एसएसपी फाजिल्का और डीएसपी के स्तर पर पीड़िता को उसकी जरूरत के अनुसार उचित सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
SSP फाजिल्का को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और राज्य सरकार का आश्वासन दर्ज करने के बाद जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने याचिका का निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने एसएसपी फाजिल्का को निर्देश दिए कि वे कानून के अनुसार याचिकाकर्ता सुखविंदर कौर और अन्य के जीवन व स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करें।