मोनू सुसाइड केस,दोनों पक्षों के आरोपों की जांच SIT करेगी: परिजन पर पुलिस टीम पर हमले का आरोप; मंत्री मदन सहनी ने कार्यशैली पर उठाए सवाल - Darbhanga News

Published on 20 अग॰ 2026

दरभंगा एसएसपी के निर्देश पर मोनू सहनी सुसाइड और पुलिस टीम पर हमले मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। नगर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में आत्महत्या और उसके बाद पुलिस टीम पर हुए हमले मामले की जांच की जाएगी। इस संबंध में पुलिस ने स्पष्ट किया

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दोनों पक्षों की ओर से दर्ज हुई प्राथमिकी

ASI इंद्रदेव कुमार के फर्द बयान पर बहादुरपुर थाना कांड संख्या 254/26, दिनांक 18 अगस्त 2026 को BNS की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

वहीं, मृतक मोनू के पिता जागेश्वर सहनी के आवेदन पर बहादुरपुर थाना कांड संख्या 255/26 दर्ज किया गया है। इसमें BNS की धारा 108/3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों मामले अनुसंधान के अधीन हैं।

मंगलवार को जांच के लिए पुलिस मोनू के घर पहुंची थी।

मंगलवार को जांच के लिए पुलिस मोनू के घर पहुंची थी।

19 जुलाई को मोबाइल गुम होने की जानकारी दी गई थी

पुलिस के अनुसार, बहादुरपुर थाना क्षेत्र के ओझौल निवासी कुलदीप झा ने 19 जुलाई 2026 को अपना मोबाइल गुम होने की लिखित सूचना थाने में दी थी। इस संबंध में सनहा संख्या 882/26 दर्ज किया गया और मोबाइल का विवरण CEIR पोर्टल पर अपलोड किया गया।

14 अगस्त को CEIR पोर्टल से जानकारी मिली कि उक्त मोबाइल में 10 अगस्त को 6206044056 नंबर का इस्तेमाल किया गया था। इस नंबर का धारक खराजपुर वार्ड-9 निवासी मोनू कुमार, पिता जागेश्वर सहनी बताया गया। इसके बाद जिला आसूचना इकाई में प्रतिनियुक्त सहायक अवर निरीक्षक इंद्रदेव कुमार 16 अगस्त को मोनू के घर सत्यापन के लिए पहुंचे।

पुलिस के मुताबिक, उस समय मोनू घर पर मौजूद था और उसके भाई रवि कुमार ने POCO कंपनी का एक मोबाइल पुलिसकर्मी को दिया। उसका IMEI नंबर जांचने पर वह गुम हुए मोबाइल से अलग पाया गया। पुलिस ने बताया कि उस मोबाइल में इस्तेमाल 9162586859 नंबर की धारक राधा देवी, पिता राजेश कुमार यादव, निवासी ब्रह्मोतरा, थाना अशोक पेपर मिल, दरभंगा पाई गई। पुलिस के अनुसार, इस संबंध में भी सत्यापन किया जा रहा था।

17 अगस्त को मोनू की आत्महत्या की सूचना

पुलिस के अनुसार, 17 अगस्त को दोपहर करीब 1:45 बजे चौकीदार मनीष पासवान ने थानाध्यक्ष बहादुरपुर को सूचना दी कि मोनू कुमार ने अपने घर में आत्महत्या कर ली है। इस संबंध में बहादुरपुर थाना में सनहा संख्या 670/26 दर्ज किया गया।

पुलिस के अनुसार, उसी दिन शाम करीब 4 बजे मोनू के भाई रवि कुमार ने जिला आसूचना इकाई के पुलिस पदाधिकारी को फोन कर बताया कि मोबाइल मिल गया है और उसे ले जाने के लिए कहा। पुलिस पदाधिकारी ने व्यस्त होने की बात कहते हुए बाद में आने की बात कही। इसके करीब 15 मिनट बाद रवि कुमार ने दोबारा फोन कर तत्काल मोबाइल ले जाने को कहा।

पुलिस का दावा है कि सूचना मिलने के बाद ASI इंद्रदेव कुमार अन्य कर्मियों के साथ रवि कुमार के घर पहुंचे। वहां पहुंचते ही रवि कुमार, उनके परिजन और अन्य अज्ञात लोगों ने पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों पर हमला कर दिया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटनास्थल पर पहले से मौजूद महाल चौकीदार मनीष पासवान ने बीच-बचाव कर पुलिसकर्मियों को बचाया।

मौत के बाद रोते-बिलखते हुए मोनू के परिजन।

मौत के बाद रोते-बिलखते हुए मोनू के परिजन।

मंत्री मदन सहनी ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल

इधर, बिहार सरकार के मंत्री और बहादुरपुर विधायक मदन सहनी ने मोनू सहनी की आत्महत्या के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर लोगों को अपराधियों से ज्यादा पुलिस का भय महसूस होता है।

मंत्री ने पुलिस अधिकारियों, दरोगा और पुलिसकर्मियों पर आम लोगों से कथित अवैध वसूली और भयादोहन किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो जनप्रतिनिधियों को भी गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।

मदन सहनी ने मामले की जांच दरभंगा SSP से व्यक्तिगत रूप से कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने दरभंगा पुलिस की कार्यशैली के साथ भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी DSP की पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए।

मंत्री मदन सहनी ने उठाए सवाल।

मंत्री मदन सहनी ने उठाए सवाल।

परिजनों ने पुलिस दबाव का लगाया आरोप

मोनू के परिजनों का आरोप है कि मोबाइल को लेकर पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ के कारण वह मानसिक रूप से परेशान था। मृतक के पिता जागेश्वर सहनी ने बताया कि उनके बेटे ने करीब दो हजार रुपए में मोबाइल खरीदा था और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम उनके घर पहुंची थी।

परिजनों का आरोप है कि मोनू से दूसरे मोबाइल के संबंध में पूछताछ की गई। उस पर दूसरे मामले में फंसाने का दबाव बनाया गया और रुपए की मांग की गई। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से अलग घटनाक्रम बताते हुए कहा है कि तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस टीम मोबाइल का सत्यापन करने पहुंची थी।

पुलिस टीम पर हमले और हथियार छीने जाने का मामला

पुलिस के अनुसार, मोनू की आत्महत्या की सूचना के बाद उसके परिजनों ने तकनीकी टीम को फोन कर दूसरे मोबाइल के मिलने की जानकारी दी थी। मोबाइल लेने पहुंची पुलिस टीम पर कथित रूप से हमला किया गया। घटना के बाद कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिसकर्मियों को भीड़ से बाहर निकाला गया।

स्थानीय लोगों की ओर से बाद में सादे लिबास में पहुंचे पुलिसकर्मियों पर फायरिंग किए जाने का आरोप भी लगाया गया है और CCTV फुटेज सामने आने का दावा किया गया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पुलिस की ओर से फायरिंग किए जाने के आरोप से इनकार किया है। इन सभी आरोपों की जांच भी SIT करेगी।

मोनू का आपराधिक इतिहास भी बताया

पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति में मोनू कुमार का पूर्व आपराधिक इतिहास भी बताया है। बहादुरपुर थाना में वर्ष 2020 में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज था, जिसमें आरोप पत्र समर्पित किया जा चुका है। इसके अलावा लहेरियासराय थाना में वर्ष 2024 में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में भी वर्ष 2025 में आरोप पत्र समर्पित किया गया है।

पुलिस ने कहा है कि बहादुरपुर थाना कांड संख्या 254/26 और 255/26 में दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों और आवेदन में वर्णित तथ्यों की जांच के लिए SIT को निर्देश दिया गया है। अब जांच के बाद ही मोनू की आत्महत्या की वास्तविक परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई से उसके संबंध तथा पुलिस टीम पर हमले की पूरी घटना की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।