Sharadiya Navratri 2026: इस बार 10 दिन का होगा शारदीय नवरात्र, जानें घटस्थापना और संधि पूजा का मुहूर्त | shardiya-navratri-2026-10-days-ghatasthapana-sandhi-puja-muhurat

Published on 21 सित॰ 2026

वाराणसी: Sharadiya Navratri 2026: शक्ति आराधना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष विशेष संयोग के साथ शुरू होने जा रहा है। नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर, रविवार से होगा और यह पर्व 20 अक्टूबर, मंगलवार तक चलेगा। तिथि की वृद्धि के कारण इस बार नवरात्र नौ के बजाय 10 दिनों का होगा। अष्टमी तिथि दो दिन रहने से श्रद्धालुओं को मां भगवती की आराधना के लिए अतिरिक्त अवसर मिलेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, नवरात्र के दौरान घटस्थापना, संधि पूजा और विजयादशमी की तिथियां विशेष महत्व रखेंगी।

पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन कलश या घटस्थापना को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इसी के साथ नौ दिनों की देवी आराधना और व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस वर्ष नवरात्र के प्रथम दिन पूरे समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन परिस्थितियों में सामान्य समय पर कलश स्थापना को उचित नहीं माना जाता। ऐसे में अभिजित मुहूर्त को घटस्थापना के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बताया गया है।

11:20 से 12:07 तक रहेगा अभिजित मुहूर्त

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु इसी अवधि में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर सकते हैं। नवरात्र की शुरुआत में घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा शुरू होगी। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत, पाठ, जप और देवी आराधना करेंगे। कई स्थानों पर नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अनुष्ठान और धार्मिक आयोजन भी किए जाएंगे।

हाथी पर आएंगी मां दुर्गा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के डॉ. सुभाष पांडेय ने बताया कि नवरात्र का आरंभ रविवार को होने के कारण इस वर्ष देवी के आगमन का वाहन हाथी माना गया है। धार्मिक ज्योतिष परंपरा में हाथी को वर्षा और प्राकृतिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार देवी के आगमन के वाहन का पर्व की प्रकृति से प्रतीकात्मक संबंध माना जाता है। इस लिहाज से हाथी पर देवी के आगमन को अच्छी वर्षा और समृद्धि के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

मंगलवार को होगा देवी का गमन

इस बार नवरात्र का समापन मंगलवार को होगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मंगलवार को नवरात्र समाप्त होने पर देवी के गमन का वाहन मुर्गा यानी कुक्कुट माना गया है। नवरात्र का धार्मिक पर्व 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ आगे बढ़ेगा। इसके बाद 21 अक्टूबर को नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा। श्रद्धालु अपने संकल्प और परंपरा के अनुसार व्रत का समापन करेंगे।

19 अक्टूबर को संधि पूजा

महाअष्टमी और महानवमी के संधिकाल को नवरात्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर संधि काल बनता है। इसी अवधि में विशेष संधि पूजा की जाती है। इस वर्ष 19 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक संधि पूजा का समय बताया गया है। इस दौरान देवी की विशेष आराधना की जाएगी।

चंड-मुंड वध से जुड़ी है संधि पूजा की मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी और नवमी के संधिकाल में ही मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण कर चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था। इसी घटना की स्मृति में संधि पूजा की परंपरा मानी जाती है। नवरात्र के इस विशेष चरण में मंदिरों और पूजा स्थलों पर देवी की आराधना के साथ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। इस वर्ष अष्टमी तिथि के दो दिन रहने और 10 दिवसीय नवरात्र होने के कारण श्रद्धालुओं के बीच पर्व को लेकर विशेष उत्साह रहने की उम्मीद है।