
सावन 2026Image Credit source: unsplash
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस महीने में शिवभक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं. वहीं, कई भक्त सावन के सोमवार का व्रत भी रखते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होने की कामना की जाती है. साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान कुल चार सावन सोमवार पड़ेंगे. सोमवार के व्रत में पूजा के साथ खान-पान का भी खास ध्यान रखा जाता है. ऐसे में अगर आप भी सावन सोमवार का व्रत रखने जा रहे हैं तो यह जानना जरूरी है कि व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
साल 2026 में सावन सोमवार कब-कब हैं?
सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. साल 2026 में सावन के चार सोमवार होंगे.
- पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
- दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
- तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
- चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
सावन सोमवार के व्रत में क्या खा सकते हैं?
व्रत के दौरान केला, सेब, अनार, पपीता, संतरा, अंगूर और दूसरे मौसमी फलों का सेवन किया जा सकता है.
दूध और दही का सेवन
सावन सोमवार के व्रत में दूध, दही और छाछ का सेवन भी कई लोग करते हैं. भगवान शिव को दूध अर्पित करने की भी परंपरा है.
साबूदाना
व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी या साबूदाना वड़ा काफी पसंद किया जाता है. इसे बनाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है.
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा
व्रत में गेहूं और दूसरे अनाज की जगह कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी रोटी, पूरी या पकौड़ी खाई जाती है. इसे व्रत के अनुकूल भोजन माना जाता है.
आलू और शकरकंद
व्रत में आलू और शकरकंद का सेवन भी किया जाता है. इन्हें उबालकर या हल्के मसालों के साथ बनाकर खाया जा सकता है. व्रत के दौरान इन्हें बनाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है.
सूखे मेवे
बादाम, काजू, अखरोट, किशमिश और मखाने जैसे सूखे मेवे व्रत में खाए जा सकते हैं. इनसे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है.
सावन सोमवार के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
अनाज से बचें
सावन सोमवार के व्रत में आमतौर पर गेहूं, चावल, दाल और दूसरे अनाज का सेवन नहीं किया जाता है.
सामान्य नमक न खाएं
व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है. इसलिए व्रत के दौरान बनाए जाने वाले भोजन में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है.
प्याज और लहसुन से परहेज
सावन सोमवार के व्रत में प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं किया जाता. व्रत के दौरान भोजन को सात्विक रखने पर जोर दिया जाता है.
मांसाहारी भोजन से दूरी
सावन में सोमवार का व्रत रखने वाले लोग मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करते. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में सात्विक भोजन करना और संयम बरतना शुभ माना जाता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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