Satya Niketan PG Collapse: बिल्डिंग विभाग के 3 इंजीनियर सस्पेंड, क्या 7 छात्रों की मौत के थे जिम्मेदार?

Published on 10 सित॰ 2026

Time Published: Thursday, September 10, 2026, 20:57 [IST]

Satya Niketan PG Collapse: नई दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने की घटना के कुछ दिनों बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम ने भवन विभाग के तीन इंजीनियरों को ड्यूटी में लापरवाही और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में कथित चूक के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

MCD की ओर से गुरुवार (10 सितंबर) को जारी आदेश के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम जोन (पूर्ववर्ती नजफगढ़ जोन) के भवन विभाग में तैनात एक असिस्टेंट इंजीनियर और दो जूनियर इंजीनियरों पर यह कार्रवाई की गई है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि इन तीनों अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही सत्य निकेतन में सात लोगों की मौत हुई। हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच जरूरी है।

Satya Niketan PG Collapse

किन तीन इंजीनियरों पर हुई कार्रवाई?

MCD के आदेश के अनुसार, भवन विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर (AE) रविंदर कुमार को निलंबित किया गया है। इसी विभाग और जोन में तैनात जूनियर इंजीनियर सुमन सौरभ और मोहित यादव को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

नगर निगम ने यह कार्रवाई संबंधित सेवा नियमों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत की है। अधिकारियों पर अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में कर्तव्य की उपेक्षा के आरोप लगाए गए हैं।

क्या 3 इंजीनियर ही 7 मौतों के जिम्मेदार हैं?

यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि तीनों इंजीनियरों का निलंबन उसी इलाके में भवन विभाग की जिम्मेदारी से जुड़ा है, जहां PG की इमारत गिरी थी। लेकिन निलंबन का आदेश अपने आप में यह साबित नहीं करता कि तीनों अधिकारी सात लोगों की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। आदेश में कार्रवाई का आधार ड्यूटी में लापरवाही और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी कथित चूक बताई गई है।

हादसे की वास्तविक वजह, भवन में किस तरह का निर्माण हुआ था, क्या नियमों का उल्लंघन किया गया था और अधिकारियों की भूमिका कितनी थी, इन सवालों का जवाब जांच के निष्कर्षों से ही सामने आएगा।

सत्य निकेतन हादसे में गई थी 7 लोगों की जान

सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक लड़कों के PG की इमारत ढह गई थी। हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हुई, जबकि सात अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। हादसे ने राजधानी में अवैध और अनधिकृत निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इसी के बाद MCD ने अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अपने स्तर पर कार्रवाई तेज करने का दावा किया है।

41 इमारतें ध्वस्त, 61 सील

MCD के मुताबिक, अनधिकृत निर्माण के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत अब तक 41 इमारतों को ध्वस्त किया गया है। इसके अलावा 61 ऐसी इमारतों की पहचान की गई है, जिन्हें अवैध पाए जाने के बाद सील कर दिया गया है। नगर निगम का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली में भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है।

MCD ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

तीन इंजीनियरों के निलंबन के साथ MCD ने अपने जमीनी स्तर के अधिकारियों को भी सख्त संदेश दिया है। निगम ने कहा है कि अनधिकृत निर्माण के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या कर्तव्य में चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के मुताबिक उल्लंघन के मामलों में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। MCD ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी स्तरों पर जवाबदेही तय की जाएगी और ड्यूटी ठीक से नहीं निभाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई होगी।

अब जांच के दायरे में क्या-क्या?

सत्य निकेतन हादसे के बाद सिर्फ बिल्डिंग गिरने की वजह ही नहीं, बल्कि अनधिकृत निर्माण की निगरानी और उसे रोकने में संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच में मुख्य रूप से यह देखा जा सकता है कि...

  • क्या इमारत में अनधिकृत निर्माण हुआ था?
  • क्या भवन विभाग को इसकी जानकारी थी?
  • क्या किसी स्तर पर शिकायत या सूचना पहले मिली थी?
  • अगर उल्लंघन था तो समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • संबंधित अधिकारियों ने अपने क्षेत्र में निरीक्षण और प्रवर्तन की प्रक्रिया का पालन किया या नहीं?
  • हादसे के लिए तकनीकी या संरचनात्मक कारण क्या थे?

इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रशासनिक लापरवाही किस स्तर पर हुई और हादसे की जिम्मेदारी किसकी बनती है।