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पैकेट फूड पर दिखेगा बड़ा 'रेड वॉर्निंग लेबल', सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने जताई सहमती
केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग पर सख्त 'रेड वार्निंग लेबल' को एक साथ लागू करने पर ...और पढ़ें
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सरकार खाद्य पैकेजिंग पर 'रेड वार्निंग लेबल' एक साथ लागू करेगी
HighLights
सरकार खाद्य पैकेजिंग पर 'रेड वार्निंग लेबल' एक साथ लागू करेगी
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के दो-चरणों वाले प्रस्ताव पर सवाल उठाए
अतिरिक्त चीनी, नमक या वसा वाले उत्पादों पर लगेगा लेबल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग के लिए सख्त 'रेड वार्निंग लेबल' को एक ही बार में लागू कर सकती है, न कि चरणों में जैसा कि अभी प्रस्तावित है। यह 100 अरब डॉलर के खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योग के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
केंद्र ने यह बात तब कही गई जब शीर्ष अदालत ने पहले के प्रस्ताव पर सवाल उठाए। शीर्ष अदालत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है और सख्त लेबल लागू करने में देरी के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) की बार-बार आलोचना कर चुकी है।
एफएसएसएआइ ने पिछले महीने दो-चरण वाली लेबलिंग योजना का सुझाव दिया था। इसकी शुरुआत उन उत्पादों पर लाल रंग के षट्कोणीय चेतावनी वाले लेबल से होनी थी जिनमें तीन वर्गों यानी अतिरिक्त चीनी (एडेड शुगर), नमक (साल्ट) या संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) में से कम से कम दो निर्धारित सीमा से अधिक हों।
अथारिटी का कहना था कि दूसरे चरण में सख्त नियम लागू किए जाएंगे। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा था कि दो-वर्गों वाला तरीका उद्योगों को लाभ पहुंचाने वाला है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करता है, क्योंकि इससे कई उत्पाद जांच से बच जाएंगे।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को सरकारी वकील से सवाल किया कि एफएसएसएआइ दो चरणों वाला तरीका क्यों अपना रहा है। जस्टिस पार्डीवाला ने "और" शब्द पर जोर देते हुए कहा, "इसमें शुगर और साल्ट दोनों होने चाहिए।
क्या तभी आप उनसे लेबल लगाने के लिए कहेंगे?" एफएसएसएआइ की ओर से एडिशनल सालिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने कहा कि कोर्ट की बात सुनने के बाद अब वह सुझाव दे रहे हैं कि वह इन चरणों को "एक ही बार में" लागू कर सकते हैं।
इसका मतलब यह होगा कि जिन खाने-पीने की चीजों में तीनों चीजें यानी एडेड शुगर, साल्ट या सैचुरेटेड फैट में से कोई भी अधिक मात्रा में होगा, उन पर लाल रंग का षट्कोणीय चिह्न बना होगा।
खाने-पीने की चीजों पर सख्त लेबलिंग का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब देश के केंद्रीय और राज्य खाद्य नियामक सख्ती से नियम लागू कर रहे हैं। खाने-पीने की चीजें तैयार करने वाली जगहों पर छापे मारे जा रहे हैं। कई स्थानों पर साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली है, जिस कारण उन्हें बंद करा दिया गया है।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान एक वकील ने अपना पक्ष समझाने के लिए एक पैकेट दिखाया और कहा, कोई भी 100 ग्राम अचार नहीं खा सकता। इसलिए, चेतावनी वाले लेबल 'पर-सर्विंग' (एक बार में खाई जाने वाली मात्रा) के आधार पर तय किए जाने चाहिए, न कि अधिकारियों के प्रस्ताव के अनुसार 100 ग्राम उत्पाद में नमक व चीनी की मात्रा के आधार पर।
उदाहरण के लिए अमेरिका ने 'पर-सर्विंग' के आधार पर पैकेट के अगले हिस्से पर लेबलिंग का प्रस्ताव दिया है, जिसका भारतीय उद्योग समर्थन करता है। जबकि कई अन्य देश 100 ग्राम के पैमाने का इस्तेमाल करते हैं। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की, "हमें लोगों और खासकर बढ़ते बच्चों की सेहत की चिंता है।
हमने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। हम उम्मीद करते हैं कि हर कोई इस काम में सहयोग करेगा, क्योंकि यह राष्ट्र हित का मामला है।" पीठ ने कहा कि वह शुक्रवार से पहले लिखित आदेश जारी करेगी।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)