सागर जहरीली शराब कांड के बीच जबलपुर में ‘सागर गोल्ड’ की बिक्री रोकने वाले सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे को ही नोटिस मिलने से विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। विभाग ने बिना रासायनिक जांच और सक्षम अनुमति के बिक्री रोकने का आदेश देने को नियमों का उल्लंघन बताया है। वहीं सागर में मौतों और गिरफ्तारियों का आंकड़ा भी चर्चा में है।
‘सागर गोल्ड’ की बिक्री रोकने वाले अफसर को ही नोटिस (S.Media)
- Published: 09 Sep 2026, 09:35 AM IST
- Last Updated: 09 Sep 2026, 09:35 AM IST
भोपाल: सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पूरे मध्यप्रदेश में शराब की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। इसी बीच जबलपुर से सामने आया एक मामला विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यहां ‘सागर गोल्ड’ शराब की बिक्री रोकने का आदेश देने वाले सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे को ही कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है।
संजीव कुमार दुबे ने 6 सितंबर को ‘सागर गोल्ड’ नाम से बिक रही शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया था। यह फैसला सागर में इसी नाम से कथित तौर पर बेची गई शराब के सेवन से मौतों की खबरों के बाद लिया गया था। दुबे ने शराब को विषाक्त बताते हुए उसकी बिक्री रोकने के निर्देश दिए थे।
15 दिन में मांगा जवाब
वाणिज्यिक कर विभाग ने दुबे को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने को कहा है। विभाग का आरोप है कि उन्होंने शराब का रासायनिक परीक्षण कराए बिना और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लिए बगैर बिक्री रोकने का आदेश जारी किया।
विभाग ने इस कार्रवाई के लिए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1966 के नियम-5 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम-10 का हवाला दिया है।
मौतों के बाद कार्रवाई, फिर उसी पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी शराब के सेवन से लोगों की मौत की आशंका सामने आई हो, तब तत्काल बिक्री रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए या पहले रासायनिक जांच और औपचारिक अनुमति का इंतजार किया जाना चाहिए।
एक तरफ सागर की घटना के बाद संदिग्ध शराब पर कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ उसे रोकने वाले अधिकारी को नियमों के उल्लंघन के लिए नोटिस मिल गया। इससे आबकारी विभाग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सागर में मौतों का आंकड़ा भी विवाद में
सागर जहरीली शराब मामले में एक आरोपी राम सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 25 बताई जा रही है, जबकि जिला प्रशासन ने अब तक 15 मौतों की पुष्टि की है। पुलिस ने 30 नामजद आरोपियों में से दो और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 16 हो गई है।
राम सिंह को पहले बंडा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां मंगलवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक वह कथित तौर पर शराब बेचने के साथ खुद भी उसका सेवन कर चुका था।
अब जांच में यह सवाल भी अहम
सागर कांड की जांच में पुलिस शराब बनाने, बेचने और सप्लाई करने वालों तक पहुंचने में जुटी है। लेकिन अब यह भी पता करना जरूरी होगा कि संदिग्ध शराब की पहचान, उसकी बिक्री रोकने और आगे की कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया क्या थी। जिम्मेदारी किस स्तर पर थी और कहां चूक हुई, इसका जवाब जांच से सामने आना बाकी है।