दिल की तरह अब दिमाग में भी पेसमेकर... RML अस्पताल में पहली बार हुई डीप ब्रेन सर्जरी

Published on 18 अक्टू॰ 2026

दिल की तरह अब दिमाग में भी पेसमेकर… RML अस्पताल में पहली बार हुई डीप ब्रेन सर्जरी

आरएमएल अस्पताल में हुई डीप ब्रेन सर्जरी.

आम तौर पर पार्किंसन बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक उम्र के बाद काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में बेहद ही जटिल ब्रेन सर्जरी की एक प्रक्रिया से मरीज को गुजरना पड़ता है. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पहली बार डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी की गयी है. आरएमएल अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागध्यक्ष डॉ शरद पांडेय की देखरेख में इस सर्जरी को अंजाम दिया गया.

टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में डॉ शरद पांडेय ने बताया कि यह आरएमएल में पहली सर्जरी थी, जिसे नेपाल के एक अधिकारी पर किया गया. उन्होने दावा किया कि सर्जरी के बाद महिला की हालत स्थिर है.

दिल में तो पेसमेकर लगना आम बात है लेकिन अब तकनीक ने इतना कुछ प्रगति कर लिया है कि ब्रने में भी पेसमकर लग रहे हैं. नेपाल की रहने वाली 55 वर्षीय सरकारी अधिकारी की ऐसी ही सर्जरी हुई है. उन्हें पार्किंसन की वजह से चलने फिरने से लेकर हाथों में कपकपी और कई समस्याओँ से वह दोचार हो रही थीं. इसकी वजह से पिछले छह महीने से वह छुट्टी पर थी.

काफी जटिल प्रक्रिया से हुई सर्जरी

डॉ शरद पांडेय ने बताया कि यह सर्जरी आसान नहीं है. इसे सुबह 9 बजे शुरु किया गया, जिसे शाम को लगभग 5.30 बजे खत्म किया गया. इसमें आरएमल अस्पताल के दूसरे विभाग के डॉक्टरों ने भी प्रमुख भूमिका निभाई जिसमें एनेस्थिसिया और कई विभाग प्रमुख हैं.

क्या है डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी?

डीबीएस (Deep Brain Stimulation – डीप ब्रेन स्टिमुलेशन) एक आधुनिक न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में पतले इलेक्ट्रोड (तार) प्रत्यारोपित किए जाते हैं. मस्तिष्क के मूवमेंट या गतिविधि को नियंत्रित करने वाले खास हिस्से में बहुत बारीक तार डाले जाते हैं. न्यूरोस्टिम्युलेटर (पेसमेकर जैसा उपकरण) छाती या पेट की त्वचा के नीचे एक छोटा बैटरी-चालित उपकरण लगाया जाता है, जिसे पल्स जेनरेटर कहते हैं. यह उपकरण इलेक्ट्रोड के जरिए मस्तिष्क को नियंत्रित विद्युत आवेग भेजता है, जिससे असामान्य मस्तिष्क गतिविधियों और लक्षणों में सुधार होता है.

आम तौर पर इस तरह के इलाज यदि मरीज किसी भी नीजि अस्पताल में करवाता है तो वहां कम से कम उसे 30 लाख रुपये का खर्च वहन करना पड़ता है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह काफी कम खर्चे में हो जाता है.

इसके साथ ही एक बार डीबीएस सर्जरी होने के बाद मरीज को पार्किसंन बीमारी की दवाओं पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाती है. आमतौर पर सर्जरी के एक से छह महीने के भीतर मरीज पर असर दिखने लगता है.

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कुमार कुन्दन

कुमार कुन्दन

साल 2004 में "जी न्यूज" से पत्रकारिता की शुरुआत किया। इसके बाद "टोटल टीवी", "न्यूज24", " इंडिया टीवी", इसके बाद "राजस्थान पत्रिका" अखबार और फिर टीवी 9 भारतवर्ष से जुड़ा.

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