RBI Repo Rate: लोन लेने वालों के लिए आज का दिन अहम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) की बैठक के फैसलों का ऐलान आज सुबह 10 बजे किया गया। जिसमें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) रेपो रेट (Repo Rate Decision) समेत कई अहम फैसलों (MPC Meeting 2026) की जानकारी दी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन लेने वालों को बड़ा झटका दिया है। RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। इस फैसले का असर होम लोन, कार लोन समेत रेपो रेट से जुड़े दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में कुछ ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। इससे पहले रेपो रेट लंबे समय से 5.25% पर बना हुआ था। अब केंद्रीय बैंक ने इसमें 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का फैसला लिया है।
पहले से जताया जा रहा था बढ़ोतरी का अनुमान
साल 2026 में यह RBI की चौथी MPC बैठक थी। इससे पहले अप्रैल, जून और अगस्त में हुई बैठकों में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था और इसे 5.25% पर बरकरार रखा गया था। इस बार एक्सपर्ट्स पहले ही रेपो रेट में बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे थे। वेस्ट एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव को इसके पीछे बड़ी वजह माना जा रहा था। अब RBI ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इन अटकलों पर मुहर लगा दी है।
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट (Repo Rate Decision) वह ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा उधार देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है। इसका असर आगे ग्राहकों को मिलने वाले लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। वहीं, रेपो रेट घटने पर बैंकों के लिए पैसा सस्ता होता है। ऐसे में लोन की ब्याज दरें कम होने और EMI घटने की संभावना रहती है।
अगर RBI रेपो रेट (Repo Rate Decision) में बढ़ोतरी करता है, तो इसका असर खासतौर पर उन लोन पर पड़ सकता है जिनकी ब्याज दर रेपो रेट (Repo Rate Decision) जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी है। ऐसे लोन की ब्याज दर बढ़ने पर आपकी EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि बढ़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के लोन की EMI तुरंत बढ़ जाएगी। इसका असर आपके लोन की ब्याज दर और बैंक की शर्तों पर निर्भर करेगा।
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महंगाई से रेपो रेट का क्या कनेक्शन है?
रेपो रेट (Repo Rate Decision) का इस्तेमाल RBI महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भी करता है। जब महंगाई ज्यादा होती है, तो RBI ब्याज दरें बढ़ाकर या उन्हें ऊंचे स्तर पर रखकर बाजार में पैसों की उपलब्धता को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। महंगे लोन की वजह से लोग कम कर्ज लेते हैं और खर्च में कमी आती है। इससे मांग कम होने और महंगाई पर दबाव घटने में मदद मिल सकती है। इसके उलट, जब महंगाई नियंत्रण में होती है और अर्थव्यवस्था को सहारे की जरूरत होती है, तो RBI ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इससे लोन सस्ते हो सकते हैं और खर्च व निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
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