Bihar School News : सरकारी स्कूल की छत ने खोली निर्माण की पोल! ढलाई पूरी होने से पहले ही भरभराकर गिरी, जहानाबाद में निर्माण पर बड़ा सवाल

Published on 7 अक्टू॰ 2026

जहानाबाद : बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने के दावे के बीच जहानाबाद से सामने आई एक घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काको प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय खालिसपुर में भवन निर्माण के दौरान छत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। खास बात यह है कि छत की ढलाई का काम अभी पूरा भी नहीं हुआ था। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल भवन के निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे थे। उनका दावा है कि निर्माण सामग्री और काम की गुणवत्ता को लेकर संबंधित स्तर पर शिकायत भी की गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य चलता रहा। अब ढलाई के दौरान ही छत का हिस्सा गिरने के बाद ग्रामीणों के सवाल और तेज हो गए हैं।

ढलाई शुरू हुई और सामने आ गई ‘पोल’

स्कूल भवन की छत की ढलाई का काम चल रहा था। इसी दौरान छत का एक हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा। गनीमत रही कि घटना के समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। लेकिन जिस तरह निर्माणाधीन छत ढलाई पूरी होने से पहले ही गिर गई, उसने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर निर्माण सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता की समय रहते जांच की गई होती तो शायद इस तरह की स्थिति सामने नहीं आती। अब सवाल यह है कि आखिर निर्माण कार्य की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी?

सरकारी भवन का निर्माण कोई सामान्य निर्माण कार्य नहीं होता। खासकर जब बात स्कूल भवन की हो तो इसकी मजबूती और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में निर्माण के दौरान ही छत का हिस्सा गिरना निश्चित तौर पर जांच का विषय बन गया है।

पहले शिकायत, फिर भी जारी रहा काम?

ग्रामीणों के आरोपों के मुताबिक, निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी। यदि वास्तव में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायत पहले ही सामने आ चुकी थी, तो फिर सवाल उठता है कि उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई?

क्या शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था? क्या निर्माण सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराई गई? अगर जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट क्या थी? और अगर जांच नहीं हुई तो आखिर क्यों?इन सवालों का जवाब अब ग्रामीण विभाग से मांग रहे हैं।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है पूरा मामला

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक निर्माणाधीन छत के गिरने तक सीमित नहीं है। यह सीधे तौर पर उन बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जिन्हें भविष्य में इसी भवन में पढ़ाई करनी है। अगर निर्माण के दौरान ही भवन की छत का हिस्सा गिर रहा है, तो निर्माण पूरा होने के बाद उसकी मजबूती को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीण चाहते हैं कि किसी भी तरह की जल्दबाजी में भवन को तैयार घोषित करने के बजाय पहले निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए।

जिम्मेदारों की निगरानी पर भी सवाल

स्कूल भवन के निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी और तकनीकी कर्मियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि निर्माण कार्य की निगरानी कौन कर रहा था?क्या मौके पर तकनीकी स्तर से निरीक्षण किया जा रहा था? क्या निर्माण के दौरान इस्तेमाल हो रही सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी? क्या ढलाई से पहले जरूरी तकनीकी जांच की गई थी? यदि इन प्रक्रियाओं का पालन किया गया था तो छत का हिस्सा गिरने की वजह क्या थी? और अगर प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही निर्माण की तकनीकी जांच हो और यह भी पता लगाया जाए कि काम निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जा रहा था या नहीं।ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि से बनने वाले स्कूल भवन में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

अब विभाग की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ढलाई पूरी होने से पहले ही छत का हिस्सा आखिर क्यों गिरा? क्या इसकी वजह निर्माण सामग्री की गुणवत्ता थी, तकनीकी खामी थी या निर्माण प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही हुई?इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन घटना ने स्कूल भवन निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर बहस जरूर छेड़ दी है।

अब नजर इस बात पर है कि विभाग इस घटना को महज एक हादसा मानकर आगे बढ़ता है या फिर पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी भी तय करता है। क्योंकि मामला सिर्फ एक छत के गिरने का नहीं, उन बच्चों की सुरक्षा का है जिनके लिए यह भवन तैयार किया जा रहा है।