RBI Repo Rate Hike: 3 साल बाद फिर बढ़ा रेपो रेट, अब हर महीने कटेगी ज्यादा EMI!

Published on 7 अक्टू॰ 2026

RBI Policy: रिजर्व बैंक ने 3 साल बाद रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की महंगाई के चलते यह फैसला हुआ। अब होम और कार लोन की EMI बढ़ सकती है।

RBI MPC Meeting Decisions: अगर आप दशहरा, दिवाली या धनतेरस में नई कार बुक करने की सोच रहे थे, घर के लिए होम लोन का इंतजार कर रहे थे या पहले से बैंक को हर महीने EMI चुका रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद अहम खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिनों तक चली बैठक बुधवार को खत्म हो गई। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ऐलान किया कि रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस प्वाइंट्स) की बढ़ोतरी की जा रही है। इस बढ़ोतरी के बाद अब रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% पर पहुंच गया है। jr तीन साल बाद रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में इजाफा करने का फैसला लिया है। इससे पहले आखिरी बार फरवरी 2023 में दरें बढ़ाई गई थीं।

'न्यूट्रल' से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग', RBI का रुख क्या है?

आरबीआई ने सिर्फ दरें ही नहीं बढ़ाईं, बल्कि अपना रुख (Stance) भी पूरी तरह बदल दिया है। पहले बैंक का रुख 'न्यूट्रल' था, जिसे अब बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (Calibrated Tightening) कर दिया गया है। इसका मतलब ये है कि केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान अब आने वाले दिनों में महंगाई को काबू में रखने पर रहेगा। इसका संकेत ये भी है कि आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर है, बल्कि जरूरत पड़ने पर कर्ज और सख्त किया जा सकता है।

आखिर क्यों महंगा करना पड़ा कर्ज?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, यह कड़ा फैसला कई घरेलू और ग्लोबल फैक्टर्स को ध्यान में रखकर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। खराब मौसम के चलते सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन जब बाजार में कैश फ्लो बहुत ज्यादा होता है तो महंगाई तेजी से भागती है। उसे ब्रेक लगाने के लिए दरें बढ़ाना जरूरी समझा गया।

RBI के नए फैसले के बाद दूसरे रेट्स का क्या हुआ?

रेपो रेट के 5.50% होते ही बैंक से जुड़े दूसरे टेक्निकल रेट्स भी बदल गए हैं। SDF (स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी) अब बढ़कर 5.25% हो गया है। MSF (मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी) भी बढ़कर 5.75% पर पहुंच गया है। बैंक रेट (Bank Rate) भी बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है। इन सभी दरों के बढ़ने का मतलब ये है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से फंड लेना और अपनी लिक्विडिटी मैनेज करना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।

रेपो रेट बढ़ने से आपकी EMI और नए लोन पर क्या असर पड़ेगा?

आम कंज्यूमर के नजरिए से समझें तो बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ते ही वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। अगर आपका होम लोन फ्लोटिंग रेट पर चल रहा है, तो बैंक आने वाले दिनों में ब्याज दरें बढ़ाएंगे। इसका असर यह होगा कि या तो आपकी मंथली ईएमआई बढ़ जाएगी, या फिर लोन खत्म होने का समय (Tenure) लंबा हो जाएगा। फेस्टिव सीजन में मिलने वाले ऑटो लोन और पर्सनल लोन के नए ऑफर्स पर अब पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है।

क्या RBI इस फैसले से किसी को फायदा भी होगा?

जब बैंक कर्ज महंगा करते हैं, तो उन्हें नया पैसा जुटाने के लिए डिपॉजिट्स पर भी ज्यादा ब्याज देना पड़ता है। यानी अगर आप आने वाले हफ्तों में बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको पहले से बेहतर और ज्यादा रिटर्न मिलने की पूरी उम्मीद है।