Ranchi : झारखंड के प्रोजेक्ट भवन और नेपाल हाउस सचिवालय परिसर इन दिनों सरकारी संसाधनों की बर्बादी की तस्वीर पेश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सवारी रही 75 से अधिक सरकारी गाड़ियां अब खुले में खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं. इनमें एंबेसडर, टाटा सफारी, बोलेरो और जिप्सी जैसी कई गाड़ियां शामिल हैं, जो कभी वीआईपी काफिले का हिस्सा हुआ करती थीं.
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मौजूदा स्थिति यह है कि प्रोजेक्ट भवन में 45 और नेपाल हाउस में करीब 30 वाहनों को कंडम घोषित किया जा चुका है. इसके बावजूद इनका निस्तारण नहीं हो पाया है. समय पर नीलामी या स्क्रैप की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से ये वाहन अब लोहे के ढेर में बदलते जा रहे हैं.
15 साल पूरे होने के बाद अटकी प्रक्रिया
सरकारी नियमों के अनुसार 15 साल पूरे कर चुके वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है. ऐसे वाहनों को स्क्रैप या नीलामी के जरिए हटाया जाना चाहिए. लेकिन झारखंड में यह प्रक्रिया काफी धीमी है. कागजी कार्रवाई, वाहनों की कीमत तय करने में देरी और अन्य औपचारिकताओं के कारण फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती हैं.

जानकारी के अनुसार मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) की ओर से बेस प्राइस तय करने में समय लगता है. इसके अलावा टैक्स और इंश्योरेंस से जुड़ी औपचारिकताएं भी प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं. इसी वजह से वर्षों से कई वाहन सचिवालय परिसर में खड़े हैं.
जितनी देरी, उतना घट रहा मूल्य
लंबे समय तक खुले में खड़े रहने के कारण इन वाहनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है. कई गाड़ियों के पार्ट्स खराब हो चुके हैं और उन पर जंग लग चुकी है. ऐसे में जब इनकी नीलामी होगी, तब सरकार को इनका उचित मूल्य मिलने की संभावना भी कम हो जाएगी. यानी जितनी देरी होगी, सरकारी संपत्ति का नुकसान उतना ही बढ़ेगा.
पार्किंग की जगह भी हो रही प्रभावित
कबाड़ बन चुके इन वाहनों ने सचिवालय परिसर की बड़ी पार्किंग जगह घेर रखी है. इससे अधिकारियों, कर्मचारियों और सचिवालय आने वाले लोगों को वाहन पार्क करने में परेशानी होती है. लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है.
सरकार ने दिया था पुराने वाहन हटाने का निर्देश
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने सभी विभागों को 15 साल से पुराने वाहनों की सूची तैयार कर उन्हें स्क्रैप या नीलामी की प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था. हालांकि, जानकारी के अनुसार यह प्रक्रिया आज भी लंबे समय से लंबित है. इसके कारण कंडम घोषित वाहन अब भी सचिवालय परिसर में खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं. समय पर निस्तारण नहीं होने से एक ओर सरकारी संपत्ति का मूल्य लगातार घट रहा है, वहीं सचिवालय परिसर में पार्किंग की समस्या भी बनी हुई है.
अगर यह प्रक्रिया जल्द पूरी नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति पूरी तरह बेकार हो जाएगी और सरकारी संसाधनों का नुकसान लगातार बढ़ता रहेगा.
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