
रक्षाबंधन 2026Image Credit source: pexels
Raksha Bandhan Rituals: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का त्योहार है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं. इस दिन राखी बांधने को लेकर कई धार्मिक परंपराएं भी प्रचलित हैं. इन्हीं परंपराओं में एक खास परंपरा भगवान गणेश से जुड़ी है. मान्यता है कि भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले सबसे पहले भगवान गणेश को राखी अर्पित करनी चाहिए. भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है. इसलिए किसी भी शुभ काम की शुरुआत उनकी पूजा से करने की परंपरा है.
सबसे पहले भगवान गणेश को क्यों बांधते हैं राखी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं. यानी वे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं. ऐसे में रक्षाबंधन के दिन उन्हें सबसे पहले रक्षा सूत्र अर्पित करने का विशेष महत्व बताया जाता है. बहनें भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा कर सकती हैं. इसके बाद गणेश जी को रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करके रक्षा सूत्र बांधा जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से रक्षाबंधन का पर्व शुभ तरीके से शुरू होता है और भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है. इसके अलावा रक्षाबंधन के दिन इष्टदेव, कुल देवता और भगवान कृष्ण को राखी अर्पित कर परिवार की सुख-शांति की कामना करनी चाहिए.
भगवान गणेश के बाद भाई को बांधें राखी
गणेश जी की पूजा और उन्हें रक्षा सूत्र अर्पित करने के बाद भाई को राखी बांधी जाती है. सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है. इसके बाद अक्षत लगाकर आरती की जाती है और फिर उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है. राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाई जाती है. भाई भी अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करता है.
रक्षाबंधन पर भगवान गणेश की पूजा का महत्व
भगवान गणेश को शुभता, बुद्धि और मंगल के देवता के रूप में पूजा जाता है. किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा मान्यताओं में लंबे समय से चली आ रही है. इसी वजह से रक्षाबंधन जैसे शुभ पर्व पर भी कई लोग सबसे पहले गणेश जी का याद करते हैं. मान्यता है कि विघ्नहर्ता की पूजा के बाद किए गए शुभ कार्य में बाधाएं कम होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
रक्षाबंधन 2026 पर कब बांधें राखी?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा. श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. राखी बांधने के लिए 28 अगस्त को सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है. इस दौरान बहनें भाई को राखी बांध सकती हैं.
क्या भगवान गणेश को राखी बांधना जरूरी है?
भगवान गणेश को राखी बांधना एक धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ी मान्यता है. इसे हर परिवार में जरूरी नियम के रूप में नहीं देखा जाता. कई परिवारों में रक्षाबंधन की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है, जबकि कुछ जगहों पर सीधे भाई को राखी बांधने की परंपरा निभाई जाती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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