Rajat Sharma's Blog: मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं से मिलने से क्यों इनकार किया? - India TV Hindi

Published on 13 अक्टू॰ 2026

दो सवाल हैं: 

एक तो ये कि राहुल गांधी और उनके साथी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में ज्ञापन देकर क्या हासिल करना चाहते थे? उनका इरादा क्या है? 

दूसरा, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं से मिलने से क्यों इनकार किया? राहुल गांधी को क्या नसीहत दी?

पहले CJI की बात। Chief Justice सूर्यकांत ने राहुल गांधी को समझा दिया कि सुप्रीम कोर्ट में मीटिंग नहीं होती, यहां केस की सुनवाई होती है जिसके लिए समय और तारीख़ कोर्ट तय करता है। सुप्रीम कोर्ट कोई जंतर-मंतर नहीं है, जहां आप टहलते हुए चले जाएं। अपने आरोपों की चिट्ठी सौंप दें..और बाद में जज साहिबान को दोषी ठहराएं। कोर्ट संविधान से चलता है। संविधान की किताब दिखाने वालों को ये basic rule तो पता होने चाहिए थे।

जिस मामले की अगले दिन सुनवाई होनी है, उस पर प्रोटेस्ट मार्च निकालना क्या सुप्रीम कोर्ट पर pressure डालने की कोशिश नहीं है? अगर किसी और ने सुप्रीम कोर्ट में केस आने से पहले एक बयान भी दे दिया होता, तो यही लोग कहते कि कोर्ट को धमकाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बता दिया कि यहां केस लड़ने के लिए तथ्यों और प्रमाण की ज़रूरत होती है। हवा में बात नहीं की जा सकती। अब राहुल गांधी को अपने आरोपों के सबूत देने होंगे।

मुझे याद है, दो साल पहले जब हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की हार हुई थी तो राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी हार के लिए चुनाव आयोग पर आरोप लगाए थे। उस समय उनसे पूछा गया था कि अगर आपके पास सबूत हैं तो आप कोर्ट क्यों नहीं जाते तो राहुल ने कहा था, That's not my job (ये मेरा काम नहीं है)। पर अब ऐसा क्या बदल गया कि उन्हें कोर्ट की शरण में जाना पड़ा? क्या वो अपने बिछाए जाल में फंस गए? 

कोर्ट पर दबाव बनाने की एक और कोशिश हुई। केरलम कांग्रेस ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाला, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को खुलेआम धमकी दी गई। इस ट्वीट में केरलम कांग्रेस ने लिखा, “ डियर सूर्यकांत, अगर लॉ एंड ऑर्डर आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो आप तुरंत रिजाइन कर दें। हम आपकी जगह किसी दूसरे की तलाश कर लेंगे, जो इसे अच्छी तरह हैंडल कर सकता हो”। जब बीजेपी ने इस पोस्ट पर आपत्ति उठाई तो इस tweet को केरलम कांग्रेस की timeline से हटा लिया गया। लेकिन भारत के मुख्य न्यायाधीश को धमकी देना शर्मनाक है। ये संविधान के खिलाफ है। ये देखा गया है कि जब किसी के पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए पुख़्ता सबूत नहीं होते तब इस तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं।  

राहुल गांधी का असली एजेंडा क्या है?

जब प्रशांत किशोर 'आप की अदालत' में आए थे तो उन्होंने कहा था कि वह ये देख कर हैरान होते हैं कि इतनी बार चुनाव हारने के बावजूद राहुल गांधी इतने confidence से कैसे बात कर पाते हैं। ये बात आज भी वैसी की वैसी है। राहुल राष्ट्रपति भवन गए, तो उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति  ने 'वोट चोरी' को support कर दिया। वो कहते हैं कि चुनाव आयोग के अंदर से उन्हें सारी जानकारी मिलती है। कल कहा कि 50 प्रतिशत पुलिसवाले उनके informer और supporter हैं। ये भी दावा किया कि मोदी सरकार के 200 अफसर उनको गुप्त सूचनाएं देते हैं।

अब इन दावों का कोई सबूत नहीं है। केजरीवाल भी इसी तरह की बातें करते थे। किसी कागज़ को दिखा कर कहते थे मेरे पास IB की रिपोर्ट है। उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद मोदी जी योगी को हटा देंगे। ये बातें इसलिए बेमानी हैं  क्योंकि  मोदी सरकार में अंदर की कोई बात लीक नहीं होती। और ये कोई secret नहीं है।

लेकिन बात सिर्फ़ दावों की नहीं है। एजेंडा इससे कहीं बड़ा है। संसद को चलने मत दो, Judiciary को सरकार के दबाव में बताओ, मीडियो को discredit करो, बहस, संवाद और बातचीत के सारे रास्ते बंद कर दो, Youtubers की आधा सच, आधा झूठ बोलने वाली फ़ौज खड़ी कर दो, युवाओं के कंधे  पर रखकर बंदूक़ चलाओ। पर ये चीजें लंबे समय तक नहीं चलती। किसी भी आंदोलन के सफल होने के लिए दो चीजें ज़रूरी हैं- नेतृत्व में नैतिक बल हो और जो मुद्दा उठाया जाए, उसके पीछे तथ्य हों, प्रमाण हों। Youtubers की REELS जनाधार का विकल्प नहीं हो सकतीं। ड्रामेबाज़ी से सवालों के जवाब नहीं दिए जा सकते।

चुनाव आयोग के काम करने के तरीकों को लेकर बहुत सारे सवाल हैं, उनके जवाब मिलने चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग में अंदरूनी टकराव का मतलब वोटों की हेराफेरी नहीं हो सकता, बार-बार चुनाव हारने वालों का बहाना नहीं हो सकता।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 12 अक्टूबर 2026 का पूरा एपिसोड

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