Radha Rani Ki Aarti: राधा अष्टमी पर जरूर पढ़ें राधा रानी की आरती, यहां देखें पूरी आरती - Haribhoomi

Published on 18 सित॰ 2026

Radha Rani Ki Aarti: राधा अष्टमी पर राधा रानी की पूजा के बाद पढ़ें ये सुंदर आरती। यहां देखें राधा रानी की आरती के पूरे बोल।

Radha Rani Ki Aarti

राधा अष्टमी पर पढ़ें राधा रानी की आरती(AI generated)

  • Published: 19 Sep 2026, 09:00 AM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 08:33 AM IST

Radha Rani Ki Aarti: राधा अष्टमी के दिन राधा-कृष्ण की पूजा के साथ भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है। पूजा के बाद दीपक जलाकर राधा रानी की आरती करने से माहौल भक्तिमय हो जाता है। अगर आप भी इस बार राधा अष्टमी पर घर में पूजा कर रहे हैं, तो आरती के लिए पहले से तैयारी कर लें। यहां पढ़ें राधा रानी की पूरी आरती।

राधा रानी की आरती

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

आरती उतारूं तेरी, तुमको मनाऊं
सांझ-सवेरे मैं तो शीश नवाऊं।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

वृषभानु की तुम हो दुलारी, कीर्ति लाड़ लड़ावे जी
तुम ही रमा, तुम सखी हो प्यारी, बरसानो बतलावे जी
तेरी मंद-मंद मुस्कान पे सब वारूं, बसो रे मन आंगन में।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

आंखें तेरी खुलती नहीं रे, कर्ता रची क्या माया है
आंख जो खोली तूने, राधे-श्याम का दर्शन पाया है
तेरे नैनों में मैं श्याम को निहारूं, ऐसे ही बसो अंखियां में।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

ओ राधा लाडली, तेरे रूप पर रीझे मनमोहन घनश्याम
कुंज गली में उनकी मुरली बोले केवल राधा नाम
मैं भी ऐसे तेरे नाम को पुकारूं, देखूं छवि तेरी मधुबन में।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

राधा लाडली ब्रज की किशोरी, कान्हा के मन बसती है
यमुना तट पर बंसी बजती, फूलों में तू हंसती है
रास रचाती कान्हा संग, मैं भी बरसाने में आऊं जीवन में।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

आरती शुभ ये राधा जी की, भक्तों के मन भावे
राधे धाम में, बरसाने में, आरती बड़ी सुहावे
मैं भी तेरे धाम में अपने पल गुजारूं, बसो जी राधा मेरे मन में।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

राधा अष्टमी पर पूजा के बाद दीपक जलाकर राधा रानी की आरती की जाती है। आरती के बाद श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं और प्रसाद परिवार के लोगों में बांटें। 

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