सावन माह की पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु और शिवजी की विशेष आराधना की जाती है। व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए खान-पान, पहनावे और व्यवहार से जुड़े कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है।
Putrada Ekadashi Vrat Niyam : सावन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखती है। सावन का पावन महीना होने के कारण इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की आराधना का भी दुर्लभ संयोग बनता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से यह व्रत रखने पर संतान सुख और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हालांकि, व्रत और पूजा के दौरान अनजाने में हुई छोटी गलतियां भी पूजा के फल को प्रभावित कर सकती हैं।
शुभ मुहूर्त और तिथि का समय
पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 02:00 बजे से शुरू होगी, जो 24 अगस्त को सुबह 04:18 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के नियम अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत और पूजन 23 अगस्त को ही मान्य रहेगा।
पुत्रदा एकादशी पर इन 5 गलतियों से बचें
1. चावल के सेवन से बचें
एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से व्रत का पुण्य समाप्त हो जाता है।
यदि आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी एकादशी के दिन सात्विक आहार ही लें और चावल से परहेज करें।
2. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी दल के अधूरी मानी जाती है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को छूना या पत्ते तोड़ना सही नहीं माना जाता।
इसलिए पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एकादशी से एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
3. काले या गहरे रंग के वस्त्र न पहनें
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में काले रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता।
पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा के समय पीले, सफेद या हल्के नारंगी रंग के सात्विक वस्त्र धारण करें। पीला रंग भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है।
4. तामसिक भोजन से दूर रहें
इस पावन दिन पर मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें।
घर का वातावरण पूरी तरह शुद्ध और सात्विक बनाए रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
5. क्रोध और कटु वचनों से बचें
व्रत का अर्थ केवल भूखे रहना नहीं, बल्कि मन और वाणी पर संयम रखना भी है।
इस दिन किसी का अनादर न करें, व्यर्थ के विवाद से बचें और अपने मन को शांत रखकर ईश्वर के नाम का स्मरण करें।