भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में लोग रोजगार, कारोबार और बेहतर जीवन की तलाश में विदेश जाते हैं. खासकर खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में लाखों भारतीय काम कर रहे हैं. इन देशों में काम करने से उनकी कमाई भी अच्छी होती है. लेकिन, इन चमकते अवसरों के पीछे एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है. विदेश मंत्रालय की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 से 2025 के बीच हजारों भारतीय नागरिकों की विदेशों में मौत हुई.
आंकड़ों में सामने आया कि इनमें सबसे ज्यादा मौतें प्राकृतिक वजहों से हुईं हैं, लेकिन कार्यस्थल पर हादसे, आत्महत्या, अपराध और अन्य वजहों से भी बड़ी संख्या में भारतीयों ने जान गंवाई. यह आंकड़े न केवल भारतीय प्रवासियों की स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि विदेश में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर अब भी कई चुनौतियां मौजूद हैं. लोकसभा में विदेश मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकार ने 2023 से 2025 के बीच विदेशों में भारतीय नागरिकों की मौत के मामलों की समीक्षा की है.
सऊदी और UAE में सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट में अलग-अलग देशों के आधार पर और कारणों के आंकड़े साझा किए गए हैं. इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका, ब्रिटेन, इटली और जर्मनी जैसे देशों के आंकड़े सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं, क्योंकि इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में सबसे ज्यादा भारतीयों की मौत दर्ज की गई. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ओमान, मलेशिया, कुवैत और इटली जैसे देशों का स्थान है. सरकार का कहना है कि भारतीय मिशन लगातार प्रवासी भारतीयों की मदद करते हैं और किसी भी शिकायत पर स्थानीय प्रशासन तथा नियोक्ताओं से संपर्क कर समाधान की कोशिश की जाती है.
- सऊदी अरब में सबसे ज्यादा मौतें: 2023-2025 के दौरान 7,981 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज हुई.
- UAE दूसरे स्थान पर: संयुक्त अरब अमीरात में कुल 7,458 भारतीयों की मौत हुई.
- ज्यादातर मौतें प्राकृतिक कारणों से: लगभग हर बड़े देश में सबसे ज्यादा मौतें प्राकृतिक वजहों की वजह से हुईकार्यस्थल
- हादसे और आत्महत्या भी चिंता का विषय: खाड़ी देशों में कार्यस्थल दुर्घटनाओं और आत्महत्या के कई मामले सामने आए.
- सरकार ने सहायता व्यवस्था मजबूत करने का दावा किया: बीमा योजना, कानूनी सहायता और शव को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की बात कही गई.

विदेशों में भारतीयों की मौत (Getty Image)
किन देशों में सबसे ज्यादा भारतीयों की मौत हुई?
विदेश मंत्रालय के दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब में 6,376 लोगों की प्राकृतिक वजहों से मौत हुई. इसके अलावा 182 लोगों की कार्यस्थल पर हादसे में, 354 ने आत्महत्या की, 29 लोगों की अपराध से जुड़ी घटनाओं में और 1,040 लोगों की अन्य वजहों से मौत हुई. इस तरह कुल मौतों का आंकड़ा 7,981 पहुंच गया. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी स्थिति गंभीर रही. यहां 5,702 प्राकृतिक मौतें, 128 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 511 आत्महत्याएं, 25 अपराध से जुड़ी मौतें और 1,092 अन्य कारणों से मौतें दर्ज हुईं.
कुल मिलाकर 7,458 भारतीय नागरिकों की जान गई. अमेरिका में 2,850 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज हुई. इनमें 2,340 प्राकृतिक मौतें, 46 कार्यस्थल हादसे, 62 आत्महत्याएं, 37 अपराध और 365 अन्य कारण शामिल हैं. इटली में कुल 1,057 भारतीयों की मौत हुई, जबकि कुवैत में 2,191, ओमान में 1,498 और मलेशिया में 1,437 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज की गई.
टॉप देशों में और कौन से नाम शामिल?
विदेश मंत्रालय के 2023-2025 के आंकड़ों के अनुसार, इन श्रेणियों में शीर्ष 20 देशों में इटली, कतर, बहरीन, सिंगापुर, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, जर्मनी, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, चीन, नाइजीरिया और थाईलैंड प्रमुख रूप से शामिल हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी वाले देशों में प्राकृतिक मौतों के साथ-साथ कार्यस्थल हादसे, आत्महत्या और अन्य कारण भी चिंता का विषय बने हुए हैं.
प्राकृतिक मौतें सबसे ज्यादा क्यों?
रिपोर्ट में साफ दिखता है कि ज्यादातर देशों में प्राकृतिक वजहों से मौतों की संख्या सबसे ज्यादा है. माना जा रहा है कि विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय लंबे समय तक काम करते हैं. बढ़ती उम्र, हृदय रोग, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं इसके प्रमुख वजह हो सकते हैं. वहीं खाड़ी देशों में अत्यधिक गर्मी, कठिन काम और लंबी ड्यूटी भी स्वास्थ्य पर असर डालती है.
कार्यस्थल हादसे और मानसिक स्वास्थ्य भी चिंता
आंकड़े बताते हैं कि कार्यस्थल पर होने वाले हादसे और आत्महत्या के मामले भी कम नहीं हैं. खासकर निर्माण, तेल एवं गैस और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार से दूरी, आर्थिक दबाव, नौकरी का तनाव और सामाजिक अकेलापन भी कई प्रवासी श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं.
सरकार ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है. इसी उद्देश्य से कई व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को तुरंत सहायता मिल सके. सरकार ने बताया कि दिल्ली, दुबई, रियाद और जेद्दा जैसे जगहों में प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) संचालित किए जा रहे हैं, जो भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर प्रवासी भारतीयों को मार्गदर्शन, परामर्श और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराते हैं.

विदेशों में भारतीयों की मदद (Getty Image)
इसके अलावा, भारतीय मिशनों में 24 घंटे हेल्पलाइन, ईमेल, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से भी मदद ली जा सकती है. शिकायतों के निवारण के लिए MADAD, CPGRAMS और e-Migrate जैसे ऑनलाइन पोर्टलों की सुविधा भी उपलब्ध है. जिन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक काम करते हैं, वहां विशेष लेबर विंग बनाए गए हैं, जो श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए स्थानीय प्रशासन और नियोक्ताओं के साथ समन्वय करते हैं. साथ ही, इंडियन एंबेसी समय-समय पर ओपन हाउस और कांसुलर कैंप आयोजित कर प्रवासी भारतीयों की शिकायतें सुनते हैं और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करते हैं.
बीमा और शव लाने की नई व्यवस्था
सरकार ने बताया कि प्रवासी भारतीय बीमा योजना (PBBY) के तहत ईसीआर श्रेणी के कामगारों के लिए बीमा अनिवार्य है. दुर्घटना में मौत या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है. इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय का eCARe पोर्टल विदेश से भारत शव लाने की मंजूरी की प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है और 48 घंटे के भीतर मंजूरी देने का लक्ष्य रखता है. जरूरतमंद भारतीयों की मदद के लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) के जरिए कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, टिकट और शव को भारत भेजने जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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