रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में खुलेआम कटे हुए बकरे और मुर्गे की बिक्री के मामले में सख्त रुख अपनाया है. इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नियमावली तैयार करने के लिए समय दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि खुले में मांस की बिक्री को नियमानुसार संचालित किया जा सके. सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के सचिव को इस संबंध में शपथ पत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का भी निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है.
सरकार ने बताया, तैयार है नियमावली का ड्राफ्ट
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता योगेश मोदी ने अदालत को बताया कि खुले में कटे मांस की बिक्री और स्लॉटर हाउस के संचालन को लेकर नियमावली का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया गया है. फिलहाल यह ड्राफ्ट वित्त विभाग के पास भेजा गया है. उन्होंने अदालत को बताया कि वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. सरकार की ओर से पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया गया. अदालत ने सरकार की दलील पर विचार करते हुए उसे आवश्यक समय तो दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि नियमावली बनाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी.
पहले भी दिया जा चुका है दो माह का समय
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले राज्य सरकार को दो माह के भीतर नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया गया था. इसके बावजूद अभी तक नियम लागू नहीं हो सके हैं. ऐसे में अदालत सरकार की प्रगति रिपोर्ट पर लगातार नजर बनाए हुए है. हाइकोर्ट ने सरकार से कहा कि वह अगली सुनवाई तक नियमावली तैयार करने की दिशा में हुई प्रगति का विस्तृत ब्यौरा शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करे.
याचिका में उठाया गया स्वास्थ्य और स्वच्छता का मुद्दा
यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से हाइकोर्ट पहुंचा है. याचिकाकर्ता श्यामानंद पांडेय ने अपनी याचिका में कहा है कि रांची समेत झारखंड के कई शहरों और कस्बों में खुलेआम कटे हुए बकरे और चिकन का प्रदर्शन करते हुए बिक्री की जाती है. याचिका में कहा गया है कि खुले में मांस लटकाकर बेचना न केवल स्वच्छता के मानकों के विपरीत है, बल्कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. खुले वातावरण में मांस रखने से धूल, गंदगी, मक्खियों और अन्य प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.
नियमों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खुले में मांस की बिक्री खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े लागू नियमों के विपरीत है. याचिका में यह भी कहा गया कि इस प्रकार की बिक्री सर्वोच्च न्यायालय की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की भावना के अनुरूप नहीं है. याचिका में मांग की गई है कि राज्य सरकार खुले में मांस की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए और आधुनिक एवं स्वच्छ स्लॉटर हाउस के संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों की रक्षा हो सके.
2023 में भी हाइकोर्ट दे चुका है निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हाइकोर्ट की एकल पीठ ने 19 जुलाई 2023 को इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण आदेश दिया था. उस समय अदालत ने राज्य सरकार को खुले में मांस की बिक्री को विनियमित करने तथा स्लॉटर हाउस के संचालन के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया था. हालांकि, दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नियमावली पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है. इसी कारण मामला अब भी अदालत में विचाराधीन है और सरकार की कार्रवाई पर न्यायालय लगातार निगरानी रखे हुए है.
इसे भी पढ़ें: रांची के जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन पर हाईकोर्ट नया आदेश, नई योजना पर सभी पक्षों से मांगा जवाब
20 अगस्त को सरकार को देना होगा शपथ पत्र
अब 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में राज्य सरकार को शपथ पत्र के साथ यह बताना होगा कि नियमावली तैयार करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया किस चरण में पहुंची है. अदालत की अगली सुनवाई पर इस मामले में आगे की दिशा तय होने की संभावना है.
इसे भी पढ़ें: SIR का जायजा लेने कुड़ू पहुंचे कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दुबे, चुनावी पाठशाल में हुए शामिल