
POCSO केस में दिल्ली HC ने रद्द की महिला टीचर की जमानतImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)
जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है. हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में 4 हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने पुलिस को वीडियो और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी.
ASG SV राजू ने कहा कि अगर कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) बनता है और पुलिस को इसकी जानकारी मिलती है, तो वो कार्रवाई करेंगे. कोर्ट ने अनीता ठाकुर मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि ऐसी गलतियों के लिए पब्लिक लॉ के तहत भी उपाय मांगे जा सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि मामले की मेरिट पर कोई राय जाहिर किए बिना, वह बस उनसे अपना जवाब दाखिल करने और अपनी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए कह रहा है.
कोर्ट ने आदेश देते हुए चार हफ्ते के भीतर (दिल्ली पुलिस और भारत सरकार की ओर से) एक काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस बीच, कोर्ट निर्देश दिया कि रिट याचिकाओं में बताई गई घटना से संबंधित सभी जरूरी रिकॉर्ड – जैसे CCTV फुटेज और कोई भी वीडियोग्राफी को दिल्ली पुलिस या भारत सरकार द्वारा जारी SOP के अनुसार सुरक्षित रखा जाए.
‘गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे थे पुलिस अधिकारी’
वहीं, सोनम वांगचुक को विरोध स्थल से हटाने के लिए बल प्रयोग से संबंधित याचिका (54 नंबर की याचिका) के मामले में याचिकाकर्ता ने कहा कि सभी पुलिस अधिकारी गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे थे. उनके पास कोई वर्दी या बैज नहीं था. वो जबरदस्ती मंच पर चढ़े और अन्य प्रदर्शनकारियों की पिटाई की और उस मंच की ओर बढ़े जहां वांगचुक लेटे हुए थे. जिन लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, उनकी पिटाई की गई.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी आतंकवादी या देश-विरोधी व्यक्ति को ले जा रहे हों. वह भूख हड़ताल पर थे. यह एक मौलिक अधिकार है. अगर मैं अपनी असहमति जाहिर नहीं कर सकता, तो कौन करेगा और हमारे पास इसके अलावा और क्या हथियार है? हम अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा की मांग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जब मिस्टर वांगचुक को ले जाया गया, तो DCP ने X पर पोस्ट किया कि यह कदम हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया था. कोर्ट ने कहा कि शायद यह यहां मुद्दा नहीं है. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मुद्दा है, इस कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मेडिकल मदद दी जानी चाहिए. इसपर कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा उनकी पत्नी ने उठाया था, उसपर बात न करें.
‘सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई याचिका’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कहा कि दो बातें हैं, आखिरी 54 नंबर की याचिका दूसरी याचिकाओं से अलग है. 54 नंबर वाली याचिका में घटना और तारीख पूरी तरह से अलग हैं. इसमें कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) नहीं बनता है. ऐसे मामले में FIR दर्ज नहीं की जा सकती.
उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) हुआ है, तो वो धारा 154(3) के तहत कोर्ट जा सकते हैं. जहां तक वांगचुक का सवाल है, तो कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है और यह कोर्ट इस मामले को देख रहा है. ऐसा लगता है कि यह याचिका सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई है, इसमें बहुत ज्यादा पब्लिसिटी शामिल है. इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए.
संसद तक मार्च करने की जानकारी सार्वजनिक होने पर बढ़ी भीड़
इस मामले मेंसीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने आगे कहा कि उन्होंने कहा था कि 20 तारीख को वे संसद तक मार्च करेंगे. असल में, सभी लोग 20 तारीख को ही इकट्ठा हुए थे, 19 तारीख तक कोई हिंसा नहीं हुई थी. उन्होंने दलील दी कि संसद तक मार्च करने की जानकारी सार्वजनिक होने के कारण 20 तारीख को भीड़ बढ़ने लगी और इसी भीड़ पर हमला किया गया. यह लड़के-लड़कियों की भीड़ थी. इसमें मिस्टर हेगड़े के बेटे भी शामिल थे. हर तरह के बैकग्राउंड से आए बच्चे वहां मौजूद थे.
विकास सिंह ने कहा किआम जानकारी में अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है कि इकट्ठा हुए लोग हिंसक हो गए थे. ऐसे कई वीडियो हैं, जिनमें सादे कपड़ों में कुछ लोग बैठे दिख रहे हैं, उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया.
‘बदले की भावना से की गई पुलिस की कार्रवाई’
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील हरिहरन ने कहा कि कई ऐसे वीडियो हैं, जिनमें कीलें लगी लाठियां दिख रही हैं, जिनसे बच्चों को पीटा जा रहा है. पेलेट्स और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया, क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से इसी तरह निपटा जाएगा?
उन्होंने कोर्ट से कहा कि लोगों के इकट्ठा होने का मकसद कानूनी था, वो NEET परीक्षा के बारे में अपनी शिकायतें बताना चाहते थे. अगर आप देखें, तो CrPC की धारा 144 के तहत कोई आदेश भी लागू नहीं था. ऐसा कोई सर्कुलर नहीं है, जिससे पता चले कि कोई आदेश जारी किया गया था और लोगों को इकट्ठा होने से मना किया गया था. ऐसी स्थिति में, अगर उनका कहना है कि भीड़ बेकाबू हो गई थी, तब भी उससे निपटने का एक खास तरीका होता है. चेतावनी दी जानी चाहिए थी. ऐसा किए जाने का कोई सबूत नहीं है. ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि बच्चों को चेतावनी देने के लिए सीटी बजाई गई हो कि बल का प्रयोग किया जाएगा. औपनिवेशिक काल में भी इन नियमों का पालन किया जाता था. पुलिस की कार्रवाई बदले की भावना से की गई थी.
हरिहरन ने कहा, ‘विरोध-प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. इसीलिए मैं चाहता हूं कि आप उन वीडियो को देखें. कम से कम जिन पुलिसकर्मियों की पहचान हो सकती है, उनके खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए और पूरी घटना की जांच होनी चाहिए. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि जिन लोगों ने पुलिस अधिकारियों को चोट पहुंचाई है, उन्हें छोड़ दिया जाए. जहां तक छात्रों की बात है, तो 90 से ज्यादा छात्र घायल हुए हैं’.
उन्होंने आगे कहा कि इस बात को लेकर कुछ निर्देश जारी किए जाने चाहिए कि किस तरह के आचार-संहिता का पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा किहम उस सारी जानकारी को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं जिससे पता चल सके कि पुलिस को निर्देश किसने दिए थे.
वकील विकास सिंह ने किया सेक्शन 149 का जिक्र
इसके बाद वकीलविकास सिंह ने BNSS के सेक्शन 149 का जिक्र करते हुए कहा कि सैनिक बल का हर अधिकारी ऐसे आदेश का पालन ऐसे तरीके से करेगा जैसा वह ठीक समझे, लेकिन ऐसा करते समय वह कम से कम बल का इस्तेमाल करेगा और लोगों और संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचाएगा, जो भीड़ को हटाने और ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने के लिए सही हो.
उन्होंने आगे कहा किइस सेक्शन के तहत सिर पर मारने की कभी इजाजत नहीं दी जा सकती. उनसे CCTV सुरक्षित रखने की उम्मीद की जाती है. कोर्ट को यह आदेश देना चाहिए कि बॉडी कैमरों को जब्त किया जाए, वरना भविष्य में कोई ठीक से जांच नहीं हो पाएगी.
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जीतेन्द्र भाटी
करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.
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