इंदौर: हाथों में संविधान लेकर कैलाश विजयवर्गीय के घर पहुंचे दंपत्ति; सुरक्षा घेरा तोड़ किया प्रदर्शन| Navbharat Live

Published on 22 जुल॰ 2026

इंदौर: हाथों में संविधान लेकर कैलाश विजयवर्गीय के घर पहुंचे दंपत्ति; सुरक्षा घेरा तोड़ किया प्रदर्शन

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सार

Indore Protest: कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर इंदौर में अनोखा विरोध, हाथों में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के घर पहुंचे दंपत्ति, सुरक्षा घेरा तोड़ने पर पुलिस ने लिया हिरासत में।

Police and security officials responded swiftly to the demonstration and are examining the circumstances surrounding the security breach

कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन (सोर्स- नवभारत लाइव)

विस्तार

Protest Outside Kailash Vijayvargiya House: नीट परीक्षा और छात्रों को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित टिप्पणी का विरोध अब सड़कों से निकलकर उनके घर तक पहुंच गया। बुधवार को इंदौर में सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडे अपनी पत्नी सरिता पांडे के साथ हाथों में संविधान की प्रतियां लेकर सीधे मंत्री विजयवर्गीय के निवास के बाहर पहुंच गए। हैरानी की बात यह रही कि भारी पुलिस बंदोबस्त और बैरिकेडिंग के बावजूद दोनों सुरक्षा घेरा पार कर मंत्री के घर तक पहुंचने में सफल रहे।

जैसे ही दंपत्ति ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर पैदल पहुंचकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया, तो पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मीडिया से चर्चा कर रहे दोनों पति पत्नी को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां उनसे पूछताछ की का रही है।

कैलाश विजयवर्गीय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी खड़े हुए सवाल

इस घटनाक्रम ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मंत्री विजयवर्गीय को पहले से ही विशेष सुरक्षा प्राप्त है, वहीं प्रदर्शनकारी पति पत्नी को ना पहचानने के चलते पुलिस की लापरवाही भी सामने आई और दोनों पति पत्नी विजयवर्गीय के घर तक पहुंच गए।

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‘मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने युवाओं के संघर्ष का किया अपमान’

मीडिया से चर्चा करते हुए प्रदर्शनकारी प्रहलाद पांडे और सरीता पांडे ने आरोप लगाया कि मंत्री ने छात्रों के आंदोलन को प्रायोजित बताकर युवाओं और उनके संघर्ष का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन सरकार संवाद की बजाय विरोध की आवाज दबाने का काम कर रही है।

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‘हम तो शांतिपूर्ण तरीके से बात रखने आए थे, लेकिन हमें थाने में बैठा दिया गया’

सरिता पांडे ने कहा कि चुनाव के समय नेता जनता के दरवाजे पर वोट मांगने आते हैं, लेकिन जब वही जनता अपने बच्चों के भविष्य और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब मांगने पहुंचती है तो उसे पुलिस के जरिए रोक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए थे, लेकिन उन्हें पुलिस थाने ले जाकर बैठा दिया गया।

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