आत्मा के प्रशिक्षण से बदली पान की खेती, वैशाली के किसानों की बढ़ी आमदनी
वैशाली में, ATMA के तहत एक किसान समूह ने पान की खेती का आधुनिकीकरण किया है, जिससे उपज और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। प्रशिक्षण और साझा प्रथाओं से खेती करने वाले परिवारों की आय बढ़ी है, जो कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन और सामूहिक खेती में कार्यक्रम की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
By Oneindia Staff
Published: Saturday, October 24, 2026, 18:31 [IST]
बिहार मूल रूप से कृषि प्रधान राज्य है, जहां की लगभग 80% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। किसानों की स्थिति में सुधार लाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए बिहार सरकार कई प्रमुख योजनाएं चला रही है और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
आज कहानी वैशाली के एक ऐसे किसानों की, जिनके परिवार में पीढ़ियों से पान की खेती होती आ रही है। लेकिन जब से उन्होंने ATMA योजना के तहत प्रशिक्षण लेकर आधुनिक तकनीक अपनाई है, तब से पान के उत्पादन और गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार आया है। इसके साथ ही किसानों की आमदनी में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
किसान विजय कुमार चौरसिया बताते हैं, "आत्मा के माध्यम से ही हम लोगों का समूह बना है। आत्मा के जरिए हम लोगों को अच्छा लाभ मिल रहा है। पान के व्यवसाय से ही हम सभी के परिवार का भरण-पोषण होता है। इसी की कमाई से हम लोग अपने सभी काम करते हैं।"
ATMA (आत्मा) का पूरा नाम 'Agricultural Technology Management Agency' हिंदी में कहें तो 'कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी' है। यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य कृषि विस्तार प्रणाली को मजबूत करना और किसानों तक नई कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाना है।
वैशाली जिले के लालगंज प्रखंड की बसंता जहानाबाद पंचायत में आत्मा, वैशाली के माध्यम से कृषक हित समूह का गठन किया गया। इस समूह के सदस्यों ने सामूहिक रूप से पान की पारंपरिक खेती को वैज्ञानिक तरीके से अपनाया। इससे उन्होंने अपनी आमदनी में बड़ा बदलाव लाते हुए एक नई मिसाल कायम की है।
*पान कानपुर और लखनऊ भी भेजा जाता*
समूह के एक अन्य किसान श्याम जी बताते हैं कि, "हम लोग अपने पूर्वजों के समय से ही पान की खेती करते आ रहे हैं। पान तोड़कर हाजीपुर की पान मंडी में बेचते हैं। यहां से पान कानपुर और लखनऊ भी भेजा जाता है। उत्तर प्रदेश तक हमारे पान की आपूर्ति होती है। इस व्यवसाय से हम लोगों को अच्छा लाभ मिल रहा है।"
श्याम जी आगे बताते हैं, "यहां की मिट्टी और जलवायु में पीढ़ियों से पान की खेती होती आ रही है। लेकिन अब आधुनिक तकनीक, सही रखरखाव और समूह आधारित खेती से पान के उत्पादन और गुणवत्ता, दोनों में तेजी से सुधार हुआ है।"
आत्मा योजना के तहत मिले प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक ने वैशाली के किसानों को पान की खेती का बेहतर तरीका अपनाने में मदद की है। इससे पान के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुले हैं। कृषक हित समूह के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से खेती कर रहे हैं और अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। परंपरागत खेती को वैज्ञानिक तकनीक से जोड़कर ये किसान आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं।
Read more about: