बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में कार्यरत करीब 18 हजार ठेका कर्मियों की न्यूनतम मजदूरी को लेकर विवाद गहराने लगा है। झारखंड सरकार और केंद्र सरकार की निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दरों की तुलना में अकुशल मजदूर के लिए प्रतिदिन 181 रुपए का अंतर सामने आ रहा है।
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सभी 18 हजार कर्मियों पर समान अंतर लागू होने की पुष्टि संबंधित कार्यों और मजदूरी नियमों की जांच के बाद ही हो सकती है। श्रमिक संगठनों ने केंद्रीय श्रम मंत्री, श्रम सचिव और मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) को पत्र भेजकर सेल की इकाइयों में ठेका श्रमिकों की मजदूरी की समीक्षा कराने, जांच समिति गठित करने और केंद्रीय न्यूनतम मजदूरी के लिए पात्र श्रमिकों को बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग की है। बताते चलें कि ठेका श्रमिकों के लिए केंद्रीय न्यूनतम वेतन की घोषणा 21 नवंबर 2025 को हुई थी। लेकिन बीएसएल समेत सेल के अन्य ईकाइयों में इसे अमल में नहीं लाया गया।
बोकारो क्षेत्र झारखंड की ‘ए’ श्रेणी में आता है। एक अक्टूबर 2026 से झारखंड में अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 523 रुपए प्रतिदिन है। अगर िसर्फ अकुशल मजदूरों की ही बात करें, तो बीएसएल में एक मजदूर को प्रतिदिन 181 रुपए कम मिल रहा है।
ठेका श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी के दरों में अंतर
अकुशल श्रमिक 523 704 181
अर्धकुशल श्रमिक 548 794 246
कुशल श्रमिक 722 933 211
उच्च कुशल श्रमिक 833 1,024 191
न्यूनतम मजदूरी सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं
पहले भी की गई है शिकायत
बीएसएल में कार्यरत ठेका श्रमिक पहले से ही कम वेतन मिलने की शिकायतें करते रहे हैं। कई विभागों में ठेका एजेंसियों पर आरोप है कि वे मजदूरी का कुछ हिस्सा वापस ले लेती हैं, नहीं देने पर परेशान किया जाता है। नए श्रम कानून लागू होने के बाद श्रमिकों को उम्मीद थी कि उन्हें केंद्रीय वेतनमान का लाभ मिलेगा, लेकिन सर्कुलर नहीं आने से उम्मीदों को झटका लगा है। जबकि इस मुद्दे पर यूनियन के प्रतिनिधियों की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। सेल के विभिन्न इकाइयों में लगभग 80 हजार ठेका श्रमिक कार्यरत हैं।
उचित वेतन दिलाना अधिकारियों का काम
श्रमिकों की श्रेणी राज्य दर/दिन केंद्रीय दर/दिन प्रतिदिन कम
उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की मांग
संगठनों ने सेल की इकाइयों में ठेका श्रमिकों के कार्यों और मजदूरी भुगतान की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने, पात्र श्रमिकों को बकाया एरियर का भुगतान करने और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि बीएसएल में सड़क निर्माण, भवन अनुरक्षण, विद्युत लाइन, जलापूर्ति और सीवरेज पाइपलाइन जैसे निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों में लगे ठेका श्रमिकों की मजदूरी की समीक्षा की जानी चाहिए। केंद्रीय और राज्य दरों के लागू होने की स्थिति स्पष्ट कर पात्र श्रमिकों को वैधानिक लाभ दिलाया जाए।