क्या एआई आपकी जीभ और चेहरे की तस्वीरों से हृदय रोग का पता लगा सकता है? | IBC24

Published on 18 अक्टू॰ 2026

(डेविड सी. गेज, वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय)

वेस्टमिंस्टर, 18 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) चेहरे और जीभ की तस्वीरों के आधार पर तैयार एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रणाली ने एक छोटे परीक्षण में कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित प्रत्येक मरीज की सटीक पहचान की। चीन में किये गए एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है।

शोधकर्ताओं ने 518 लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया, जिनमें सीएचडी से पीड़ित 200 मरीज और 318 स्वस्थ स्वयंसेवी थे। प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे और जीभ की तस्वीरें एक विशेष रूप से तैयार किए गए स्कैनिंग प्रणाली की मदद से ली गईं। तस्वीरों का विश्लेषण ‘डीप लर्निंग’ तकनीक के जरिए किया गया। यह एआई की एक तकनीक है, जो तस्वीरों में मौजूद विशेषताओं को पहचानना सीखती है।

‘डीप लर्निंग’ एआई और ‘मशीन लर्निंग’ का एक उन्नत हिस्सा है। यह तकनीक कंप्यूटर और मशीनों को मानव मस्तिष्क की तरह सोचने, समझने और डेटा से खुद सीखने योग्य बनाती है।

इस प्रणाली ने पहले जीभ और चेहरे की तस्वीरों का अलग-अलग विश्लेषण किया। इसके बाद, दोनों से प्राप्त जानकारियों को मिलाकर यह अनुमान लगाया कि किन लोगों को सीएचडी है। दोनों तस्वीरों से मिली जानकारियों का संयुक्त रूप से इस्तेमाल करने पर परिणाम, किसी एक तस्वीर के आधार पर किए गए विश्लेषण की तुलना में बेहतर रहे।

सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्करण ने 104 लोगों पर किए गए परीक्षण में 98 प्रतिशत सटीकता हासिल की। उसने सीएचडी से पीड़ित सभी 40 मरीजों की सही पहचान की। हालांकि, दो स्वस्थ लोगों को भी इस बीमारी से पीड़ित बता दिया गया।

एआई प्रणाली ने जीभ के मध्य भाग, उसकी सतह पर जमी परत, मुंह के आसपास की त्वचा और गालों पर विशेष ध्यान दिया। सीएचडी से पीड़ित कुछ मरीजों की जीभ का रंग गहरा था, उस पर मोटी परत जमी हुई थी या चेहरे की त्वचा के रंग में बदलाव दिखाई दे रहे थे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि एआई द्वारा चिह्नित किए गए चेहरे और जीभ के हिस्से पारंपरिक चीनी चिकित्सा की उन मान्यताओं के अनुरूप हैं, जिनमें जीभ, चेहरे और हृदय के बीच संबंध बताया गया है।

शारीरिक बनावट और बाहरी लक्षणों के आधार पर बीमारी का पता लगाने की पद्धति केवल पारंपरिक चीनी चिकित्सा तक सीमित नहीं है। डॉक्टर लंबे समय से यह मानते आए हैं कि शरीर पर दिखाई देने वाले कुछ लक्षण अंदरूनी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत दे सकते हैं।

होंठों का नीला पड़ना रक्त में ऑक्सीजन के कम स्तर का संकेत हो सकता है। वहीं, पलकों के आसपास वसा के पीले जमाव, जिन्हें ‘जेथेलस्मा’ कहा जाता है, शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक होने की ओर संकेत कर सकते हैं। ऐसा अक्सर आनुवंशिक कारणों से होने वाली किसी बीमारी के कारण होता है।

जीभ या गालों को देखकर धमनियों में रुकावट का पता लगाया जा सकता है या नहीं, यह एक अलग विषय है। त्वचा का रंग, रोशनी, उम्र, दवाइयों का सेवन और धूम्रपान जैसे कई कारक चेहरे और जीभ की बनावट और रंग-रूप को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि ये लक्षण हृदय की कोरोनरी धमनियों में रुकावट के कारण ही उत्पन्न होते हैं।

सीएचडी तब विकसित होता है, जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियां वसा के जमाव के कारण संकरी हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को ‘एथेरोस्क्लेरोसिस’ कहा जाता है। इससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है और अंततः दिल का दौरा पड़ सकता है।

कई लोगों में इस बीमारी का पहला संकेत सीने में दर्द, दिल का दौरा पड़ना या कोई अन्य जानलेवा स्थिति होती है। इसलिए, बीमारी का पहले ही पता लगा लेना निवारक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

फिलहाल डॉक्टर उम्र, धूम्रपान, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसे कारकों के आधार पर हृदय रोग के जोखिम का आकलन करते हैं। यदि सीएचडी होने का संदेह हो, तो इसकी जांच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी), रक्त परीक्षण या विशेष प्रकार की जांच की जा सकती है।

तस्वीरों के जरिए की जाने वाली एक त्वरित, दर्दरहित और कम खर्चीली जांच यह तय करने में मदद कर सकती है कि किन लोगों को इन चिकित्सकीय जांचों की जरूरत है। यह विशेष रूप से उन समुदायों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच सीमित है।

शोधकर्ताओं को इस तरीके की तुलना जोखिम का आकलन करने के मौजूदा तरीकों से भी सीधे तौर पर करनी होगी। यदि यह उपयोगी साबित होता है, तो भविष्य में इसका इस्तेमाल हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने वाली मानक जांचों, कोलेस्ट्रॉल परीक्षणों और रक्तचाप मापने के साथ किया जा सकता है।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र सुभाष

सुभाष

Web Title: क्या एआई आपकी जीभ और चेहरे की तस्वीरों से हृदय रोग का पता लगा सकता है?