शिमला: ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और साहित्यिक अर्थवत्ता पर विशेष व्याख्यान

Published on 13 अक्टू॰ 2026

शिमला: ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और साहित्यिक अर्थवत्ता पर विशेष व्याख्यान

October 13, 2026

शिमला: ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और साहित्यिक अर्थवत्ता पर विशेष व्याख्यान

शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में आयोजित हीरक जयंती समारोह के तीसरे दिन ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक अर्थवत्ता और मातृभूमि के प्रतीकात्मक चित्रण पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय सिविल लेखा सेवा (ICAS) के अधिकारी एवं भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली में मुख्य लेखा नियंत्रक अखिलेश झा ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना, उसके ऐतिहासिक संदर्भों और भारतीय राष्ट्रीय चेतना में इसके महत्त्व पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान अकादमिक लेखन पर आधारित एक पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। इसके अतिरिक्त कला प्रदर्शनी और पुस्तक मेले के माध्यम से साहित्य, संस्कृति तथा कला से जुड़े विषयों पर ज्ञान-संवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अखिलेश झा ने अपने व्याख्यान में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ‘वंदे मातरम्’ को उसके साहित्यिक और ऐतिहासिक संदर्भों में समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गीत की रचना के समय की परिस्थितियों, तत्कालीन सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक वातावरण तथा मातृभूमि को एक सशक्त प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने वाली साहित्यिक दृष्टि पर चर्चा की। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि किसी साहित्यिक रचना का वास्तविक अर्थ समझने के लिए उसकी कुछ पंक्तियों तक सीमित रहने के बजाय संपूर्ण रचना, उसके प्रतीकों और भाव-प्रवाह का समग्र अध्ययन करना आवश्यक है।

मातृभूमि के प्रतीकों में शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की अभिव्यक्ति

व्याख्यान का एक प्रमुख पक्ष ‘वंदे मातरम्’ में मातृभूमि के चित्रण और उसके प्रतीकात्मक अर्थों से जुड़ा रहा। झा ने दुर्गा, कमला और वाणी जैसे प्रतीकों के माध्यम से शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की अभिव्यक्ति को समझाया। उन्होंने इन प्रतीकों को मातृभूमि की सामर्थ्य, संभावनाओं और सांस्कृतिक विरासत की साहित्यिक अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मातृभूमि की यह कल्पना देश की क्षमताओं, संसाधनों और ज्ञान-परंपरा के प्रति विश्वास की भावना से भी जुड़ती है। इस दृष्टिकोण से ‘वंदे मातरम्’ को केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक समर्थ, समृद्ध और आत्मविश्वास से परिपूर्ण राष्ट्र की आकांक्षा को व्यक्त करने वाली साहित्यिक रचना के रूप में भी देखा जा सकता है।

व्याख्यान में गीत के अंतिम भाव पर भी चर्चा की गई। इसमें मातृभूमि की समृद्धि और उसकी संतानों की सामूहिक क्षमता की कल्पना को प्रमुखता दी गई। वक्ता ने साहित्य, इतिहास और सांस्कृतिक प्रतीकों के परस्पर संबंधों को समझने की दृष्टि प्रस्तुत करते हुए रचना के व्यापक अर्थबोध पर ध्यान केंद्रित किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की फेलो डॉ. अनुराधा रतूड़ी ने वक्ता का परिचय दिया। इसके बाद संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने श्री अखिलेश झा को सम्मानित किया। व्याख्यान के उपरांत प्रो. चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय संबोधन दिया, जबकि संस्थान के लाइब्रेरियन एवं अकादमिक संसाधन अधिकारी डॉ. राजीव कुमार मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

अकादमिक लेखन पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण

हीरक जयंती समारोह के अंतर्गत डॉ. जैस्मिन आनंद, एसोसिएट रिसर्चर, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान द्वारा लिखित पुस्तक “Academic Writing in English: Enhancing Skill and Using Language as a Resource” का लोकार्पण भी किया गया। पुस्तक का प्रकाशन पंजाब विश्वविद्यालय प्रकाशन ब्यूरो, चंडीगढ़ द्वारा किया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप तैयार की गई यह पुस्तक अकादमिक लेखन, शोध-कौशल, आलोचनात्मक चिंतन और प्रभावी संप्रेषण की क्षमताओं को विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें भाषा को ज्ञान अर्जित करने, विचारों को व्यवस्थित करने और उन्हें स्पष्ट एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के महत्त्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखा गया है।

पुस्तक में विभिन्न शैक्षणिक विषयों से जुड़े विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अकादमिक लेखन को अधिक प्रभावी बनाने संबंधी मार्गदर्शन दिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शोध एवं अध्ययन के दौरान अपने विचारों को तार्किक, स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने में सहायता प्रदान करना है। पुस्तक का लोकार्पण प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी, अखिलेश झा, डेक्कन कॉलेज, पुणे के पूर्व कुलपति प्रो. वसंत शिंदे तथा प्रख्यात कलाकार प्रो. निशा जायसवाल की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, संस्थान के फेलो और शोध-सहयोगियों ने भाग लिया।

कला प्रदर्शनी और पुस्तक मेले में भी जुट रहे कला एवं साहित्य प्रेमी

संस्थान के हीरक जयंती समारोह के दौरान कला प्रदर्शनी ‘Bharatiya Forms, Expressions and Consciousness’ भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी में प्रख्यात कलाकार निशा जायसवाल की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। पद्मश्री से सम्मानित कथक नृत्यांगना शोवना नारायण ने 11 अक्टूबर को प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था।

यह प्रदर्शनी 15 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक रवीन्द्रनाथ टैगोर आर्ट गैलरी, पूल थिएटर के निकट, में देखी जा सकती है। इसके साथ ही संस्थान परिसर में पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। पुस्तक मेला भी 15 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहेगा। दोनों आयोजनों में प्रवेश निःशुल्क है और इनके लिए संस्थान का नियमित प्रवेश टिकट लेना आवश्यक नहीं है।

11 से 15 अक्टूबर तक आयोजित हीरक जयंती समारोह के माध्यम से संस्थान इतिहास, साहित्य, संस्कृति, कला और अकादमिक विमर्श से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद को प्रोत्साहित कर रहा है। इन गतिविधियों के जरिए संस्थान की बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

15 अक्टूबर को राज्यपाल करेंगे कांगड़ा लघुचित्रों की स्थायी गैलरी का उद्घाटन

हीरक जयंती समारोह के समापन दिवस 15 अक्टूबर को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में कांगड़ा लघुचित्रों पर आधारित पर्यटकों के लिए निर्मित स्थायी गैलरी का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता करेंगे। ‘Folk and Rural Imagery in Kangra Miniatures: An Indigenous Indian Art Perspective’ विषय पर आधारित यह गैलरी हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लघुचित्र कला परंपरा और उसकी विशिष्ट दृश्य-संस्कृति से पर्यटकों, कला-प्रेमियों और शोधार्थियों को परिचित कराने का माध्यम बनेगी।

इस पहल का उद्देश्य कांगड़ा लघुचित्रों की कलात्मक विरासत को संरक्षित करना, उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व को व्यापक दर्शक-वर्ग तक पहुंचाना और भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति रुचि को बढ़ावा देना है। स्थायी गैलरी के माध्यम से क्षेत्र की पारंपरिक कला को समझने तथा उसकी विशिष्टताओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

संस्थान का हीरक जयंती समारोह 15 अक्टूबर तक जारी रहेगा। विशेष व्याख्यान, पुस्तक लोकार्पण, कला प्रदर्शनी, पुस्तक मेले और स्थायी गैलरी के उद्घाटन जैसी गतिविधियों के माध्यम से यह आयोजन ज्ञान, साहित्य, कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।