मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए क्यों आयोजित किया जाता है व्हाइट कोट फंक्शन, क्या चरक शपथ अनिवार्य है?

Published on 13 अक्टू॰ 2026

मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए क्यों आयोजित किया जाता है व्हाइट कोट फंक्शन, क्या चरक शपथ अनिवार्य है?

मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए क्यों आयोजित किया जाता है व्हाइट कोट फंक्शन?

मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद स्टूडेंट्स के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी एक खास और यादगार अवसर होता है. इस समारोह के दौरान नए मेडिकल स्टूडेंट्स को पहली बार सफेद कोट पहनाया जाता है और उन्हें मरीजों की सेवा, ईमानदारी और मेडिकल प्रोफेशन के नैतिक मूल्यों का पालन करने की शपथ दिलाई जाती है. यह प्रोग्राम छात्रों के डॉक्टर बनने की यात्रा की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है.

आमतौर पर मेडिकल कॉलेजों में इसका आयोजन MBBS के शुरुआती दिनों में फाउंडेशन कोर्स के दौरान किया जाता है. आइए जानते हैं व्हाइट कोट सेरेमनी का महत्व और इसमें क्या-क्या होता है.

क्या है व्हाइट कोट सेरेमनी?

व्हाइट कोट सेरेमनी मेडिकल और हेल्थ सेवा से जुड़े कोर्सेज में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए आयोजित होने वाला एक दीक्षा समारोह है. इसका उद्देश्य छात्रों को डॉक्टर की जिम्मेदारियों और मेडिकल प्रोफेशन के मूल्यों से परिचित कराना है. इस समारोह में सफेद कोट पहनकर छात्र यह समझते हैं कि डॉक्टर बनने का मतलब केवल पढ़ाई पूरी करना या डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि मरीजों की देखभाल करना और उनके प्रति संवेदनशील रहना भी है. यह प्रोग्राम छात्रों को उनकी नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने में मदद करता है.

कब आयोजित होती है व्हाइट कोट सेरेमनी?

व्हाइट कोट सेरेमनी आमतौर पर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के बाद शुरुआती दिनों में आयोजित की जाती है. MBBS के छात्रों के लिए इसका आयोजन अक्सर फाउंडेशन कोर्स के दौरान होता है. हालांकि, इसकी तारीख और प्रोग्राम का स्वरूप अलग-अलग कॉलेजों में अलग-अलग हो सकता है. इसमें नए छात्रों के साथ उनके माता-पिता, परिवार के सदस्य, कॉलेज के डीन, प्रोफेसर और वरिष्ठ डॉक्टर भी शामिल होते हैं.

समारोह में क्या-क्या होता है?

  • सफेद कोट पहनाना: कॉलेज के सीनियर डॉक्टर या प्रोफेसर नए छात्रों को सफेद कोट पहनाते हैं. यह मेडिकल प्रोफेशन में उनके एडमिशन का प्रतीक है.
  • शपथ ग्रहण: छात्रों को मरीजों के प्रति जिम्मेदारी, ईमानदारी, गोपनीयता और सेवा भाव बनाए रखने की शपथ दिलाई जाती है. इसमें हिप्पोक्रेटिक शपथ या चरक शपथ शामिल हो सकती है.
  • वरिष्ठों का संबोधन: डीन और अनुभवी डॉक्टर अपने अनुभव शेयर करते हैं और छात्रों को मेडिकल सेक्टर की चुनौतियों के बारे में बताते हैं.
  • परिवार की भागीदारी: इस अवसर पर परिवार के सदस्य भी शामिल होते हैं और छात्रों की इस उपलब्धि का हिस्सा बनते हैं.

क्या है व्हाइट कोट का महत्व और इतिहास?

सफेद कोट को मेडिकल सेक्टर में विश्वास, स्वच्छता, जिम्मेदारी और प्रोफेशनल बिहेवियर का प्रतीक माना जाता है. इसे पहनने के साथ छात्रों को यह संदेश दिया जाता है कि मरीजों की देखभाल करते समय उनकी गरिमा और भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है. व्हाइट कोट सेरेमनी की शुरुआत 1989 में अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के प्रित्जकर स्कूल ऑफ मेडिसिन में हुई थी. बाद में 1993 में अर्नोल्ड पी. गोल्ड फाउंडेशन ने इसे व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

आज यह समारोह केवल MBBS या MD तक सीमित नहीं है. डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी और फिजियोथेरेपी जैसे स्वास्थ्य संबंधी कोर्सेज में भी इसका आयोजन किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट्स में शुरुआत से ही जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और मरीजों की सेवा के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना है.

महर्षि चरक शपथ

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मेडिकल छात्रों के लिए हिप्पोक्रेटिक ओथ की जगह महर्षि चरक शपथ लेने की सिफारिश की थी. चरक संहिता से ली गई यह शपथ अनुशासन, नैतिकता, सेवा भाव और मरीजों के कल्याण पर जोर देती है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह शपथ वैकल्पिक है, अनिवार्य नहीं. छात्र इसे हिंदी, अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषाओं में ले सकते हैं. वर्ष 2022 में तमिलनाडु के मदुरै मेडिकल कॉलेज में इसे लेकर विवाद भी हुआ था.

सपना यादव

सपना यादव

दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्‍यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने पत्रकारिता को लक्ष्‍य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्‍यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्‍होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.

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